कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

राफ़ेल घोटाले पर लिखी किताब पर चुनाव आयोग ने लगाई रोक, कार्रवाई से दुखी प्रकाशक ने पूछा- सरकार और आयोग को इससे क्या आपत्ति

तमिल भाषा में एस विजयन द्वारा लिखी गई इस किताब का विमोचन दि हिंदू के संपादक एन. राम करने वाले थे.

मोदी सरकार में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठते रहे हैं. कई विपक्षी नेताओं का मानना है कि यह संस्था केंद्र सरकार के एजेंट के रूप में कार्य कर रही है. ताज़ा मामला इन बयानों को बल प्रदान करता है. चुनाव आयोग ने मंगलवार को राफ़ेल पर लिखी गई किताब ‘राफ़ेल: घोटाला जिससे देश हिल गया’ के विमोचन पर रोक लगा दी. चुनाव आयोग ने प्रकाशक के यहां से किताब की सारी प्रतियां जब्त कर ली.

बता दें कि तमिल भाषा में एस विजयन द्वारा लिखी गई इस किताब का विमोचन दि हिंदू के संपादक एन. राम करने वाले थे. जिन्होंने खुद ही राफ़ेल को लेकर अलग-अलग खुलासे किया है.

नवभारत टाइम्स के अनुसार आयोग के अधिकारियों का कहना है कि “इस किताब में राफ़ेल को लेकर कई संवेदनशील जानकारियां है जो आचार संहिता का उल्लंघन है.”

यह किताब भारती प्रकाशन से प्रकाशित हुई है. इस प्रकाशन के संपादक पीके राजन चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, “कहा पता नहीं किताब पर क्यों बैन लगा है? किताब में जो बातें लिखी हैं वह पब्लिक डॉमेन में मौजूद है. हमने चुनाव पर कई किताबें प्रकाशित की हैं। आज अचानक चुनाव आयोग और सरकार को क्या आपत्ति हो गई? हम अपनी किताब अपनी दुकान पर भी नहीं बेच सकते है.”

दरअसल, चुनाव आचार संहिता के बाद भी भाजपा के धुआंधार प्रचार में सरकारी धन के उपयोग पर चुनाव आयोग के तरफ़ से कोई कार्रवाई नहीं होने पर विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग केंद्र सरकार के गुर्गे की तरह व्यवहार कर रहा है.

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