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373 लोकसभा सीटों पर EVM में पड़े वोट और गिनती हुए वोटों की संख्या में पाया गया अंतर: द क्विंट की रिपोर्ट

 इस गड़बड़ी पर स्पष्टीकरण देने की बजाय चुनाव आयोग ने अपने वेबसाइट से ये आंकड़े हटा लिए हैं.

बीते आम चुनाव में ईवीएम में डाले गए वोट और कुल वोटों की संख्या में कथित तौर पर अंतर पाया गया है. द क्विंट की रिपोर्ट के मुताबिक 373 संसदीय क्षेत्रों में ईवीएम में पड़े कुल वोट और गिनती के बाद मतों की संख्या में अंतर देखी गई है. द क्विंट ने चुनाव आयोग की वेबसाइट से यह आंकड़ा लेकर रिपोर्ट किया है. पहले चार चरण के चुनावों में इस तरह की गड़बड़ी पाई गई है.

उदाहरण के तौर पर देखें तो तमिलनाडु कांचीपुरम संसदीय सीट पर ईवीएम में कुल 2,14,086 वोट डाले गए, जबकि गिनती के समय 12,32,417 वोट पाए गए. अन्य संसदीय सीटों पर भी इसी तरह की ख़ामी पाई गई है.

बाकी के 299 लोकसभा सीटों पर हालांकि यह अंतर कम है. कई राज्यों में गिनती के समय वोटों की संख्या में वृद्धि देखी गई.

इस बाबत 27 मई को द क्विंट ने चुनाव आयोग को ईमेल लिखा. इस गड़बड़ी पर किसी तरह का स्पष्टीकरण देने की बजाय चुनाव आयोग ने अपने वेबसाइट से इन आंकड़ों को पूरी तरह हटा लिया.

द क्विंट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जब चुनाव आयोग से यह पूछा गया कि वेबसाइट से उन आंकड़ों को क्यों हटा लिया गया, इस पर आयोग की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई.

द क्विंट की रिपोर्ट का कहना है, “देर शाम में हमें चुनाव आयोग का एक ईमेल मिला. इसमें मात्र एक संसदीय सीट पर हुई गड़बड़ी को लेकर स्पष्टीकरण दिया गया था. हमने अपने ईमेल में 1 से 4 चरणों में जिन लोकसभा सीटों पर चुनाव हुए थे, उन सभी के आंकड़े भेजे थे. लेकिन, हम अभी चुनाव के उत्तर का इंतजार कर रहे हैं.”

द क्विंट की रिपोर्ट के मुताबिक विशेषज्ञों का कहना है कि ईवीएम में डाले गए एक भी वोट को गिनती के समय अधिक पाया जाता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है.

द क्विंट के मुताबिक पूर्व चुनाव आयुक्त ओ.पी. रावत का कहना है, “पहली नज़र में यह एक गंभीर मामला जान पड़ता है. अपने कार्यकाल के दौरान मैंने इस तरह के मामले (जहां ईवीएम में पड़े वोट और गिनती के समय वोटों की संख्या में अंतर पाई गई हो) नहीं देखे हैं.

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