कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

‘चौकीदार ने की है चोरी, वोट की चोरी लोकतंत्र पर हमला’: EVM के ख़िलाफ़ जंतर-मंतर पर लोगों का प्रदर्शन

"सरकार ने देश की जनता, ग्रामीणों, किसानों और व्यापारियों को दोनों हाथों से लूटा है. लेकिन इसके बावजूद देश में दोबारा मोदी सरकार बनी है और वह भी बहुमत से, जिसका साफ मतलब है कि ईवीएम में धांधली की गई है.”

लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत मिलने के बाद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ  ग्रहण के कुछ घंटों पहले गुरुवार को दिल्ली में सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों समेत छात्र राजनेताओं ने ईवीएम विरोधी राष्ट्रीय जन आंदोलन धरना प्रदर्शन का आयोजन किया.

दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्र हुए लोगों ने आगामी किसी भी चुनाव को बैलेट पेपर से चुनाव करवाने और नई निर्वाचित भाजपा सरकार को बर्खास्त करने की मांग रखी है. धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पीएम मोदी के शपथ ग्रहण का भी विरोध किया है.

सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने ईवीएम के जरिए भाजपा को मिले बहुमत पर निशाना साधते हुए कहा, “साफ तौर पर 2019 लोकसभा चुनावों में ईवीएम से हुए चुनाव में धांधली हुई है. मोदी ने साल 2014 में सरकार बनाने के बाद 5 साल लागतार देश की जनता, ग्रामीणों, किसानों और व्यापारियों को दोनों हाथों से लूटा है. लेकिन इसके बावजूद देश में दोबारा मोदी सरकार बनी है और वह भी बहुमत से, जिसका साफ मतलब है कि ईवीएम में धांधली की गई है.” उनकी मांग है कि सभी वीवीपैट की पर्चियों की गिनती की जाए और आगामी हर चुनाव बैटेल पेपर द्वारा संपन्न करवाया जाए.

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ईवीएम के खिलाफ़ लोगों का जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन

रोजे के दौरान धरने पर बैठे मो. सिराजुद्दीन ने मोदी सरकार को “काली सरकार” करार दिया है. उन्होंने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में लोकतंत्र के हत्यारों को बर्खास्त करने की मांग की है. मो. सिराजुद्दीन ने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव के दौरान देश के लोकतंत्र की हत्या हुई है.

सिराजुद्दीन ने कहा, “चुनाव में ईवीएम धांधली और अदला-बदली के जरिए षडंत्रकारी सरकार बनाई जा रही है. ईवीएम को बिल्कुल बंद कर दिया जाए. दुनिया के विकासशील देशों में भी बैलेट पेपर से चुनाव होते हैं.”

निर्वाचन आयोग पर आरोप लगाते हुए कहा, “चुनाव आयोग सरकार के साथ मिलकर हेराफेरी करवाई है. अमेरिका के टीएनएन ने भी बताया कि भारत में ईवीएम की हेराफेरी से सरकार बनाई जा रही है. लोकतंत्र की हत्या हो रही है.” उन्होंने कहा कि यह सांकेतिक धरना है लेकिन वे इस लढ़ाई को जारी रखेंगे.

सिराजुद्दीन ने राष्ट्रपति से मांग करते हुए कहा, “इन सभी तथ्यों की जांच की जाए और ईवीएम धोखाधड़ी से बनी काली सरकार को तुंरत बर्खास्त कर दोबारा निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं.”

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EVM विरोधी राष्ट्रीय जन आंदोलन

राष्ट्रीय जनहित संघर्ष पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वकील भानु प्रताप सिंह ने भी ईवीएम के विरोध में जारी धरने को अपना समर्थन दिया है. उन्होंने कहा कि देश में जो जमीनी स्तर पर और जनता की भावनाएं थी, चुनाव के परिणाम उसके बिल्कुल विपरीत हैं. ईवीएम के साथ लगातार हेराफेरी की घटनाएं हुई हैं जिससे साबित होता है कि ईवीएम धांधली हुई है.
उन्होंने कहा, “देशभर से यह ख़बरें आ रही हैं कि ईवीएम से निकली वोटों की संख्या अलग है. चुनाव आयोग कहता है कि कोई गड़बड़ नहीं है. आयोग ने भाजपा का पक्ष लेकर नरेंद्र मोदी और अमित शाह को खुली छूट दी है. उन्होंने आचार संहिता का खुलेआम उल्लंघन किया है. मोदी और अमित शाह ने पुलवाम हमले और जवानों के नाम का इस्तेमाल किया है.”

“देश का किसान, युवा, जवान, छात्र और महिलाएं पीड़ित हैं लेकिन बावजूद इसके भाजपा को प्रचंड जीत मिली है. जो साफ दर्शाता है कि चुनाव में धांधली हुई है,” भानु प्रताप सिंह ने यह कहते हुए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को भाजपा का “एजेंट” बताया और कहा कि वे स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहे हैं.

विपक्ष की भूमिका को लेकर भानु प्रताप सिंह ने कहा, “विपक्ष ईवीएम के मुद्दे को लेकर चुप्पी साधे हुए है. विपक्ष सो रहा है. चुनावी नतीजों के बाद विपक्ष को सड़कों पर होना चाहिए था. लेकिन वह कहीं नहीं है. रिजल्ट के बाद सभी चुप बैठे हैं…अगर लड़ेंगे नहीं तो कुछ नहीं होगा.”

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लोकतंत्र के हत्यारों को बर्खास्त करो

पेश से लेखिका शीबा असलम फहमी भी इस धरना प्रदर्शन में शामिल थी. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा के इशारों पर काम कर रहा है. शीबा असलम फहमी ने कहा, “सोशल मीडिया पर इतने विडियो वायरल हुए हैं जिससे साबित होता है कि चुनाव में धांधली हुई है. भाजपा की जीत से जनता खुश नहीं है.” उन्होंने विपक्षी पार्टियों से आग्रह किया कि आगामी किसी भी चुनाव को बैलेट पेपर द्वारा संपन्न करवाने पर जोर दिया जाए.

धरना प्रदर्शन में शामिल हुई छात्र नेता और AISA की अध्यक्ष कंवलप्रीत कौर ने कहा, “देश की एक नागरिक के तौर पर हमें दिखाया जा रहा है कि कितनी मजबूत सरकार बनी है. लेकिन मैं मानती हूं यह देखने में भले ही मजबूत है लेकिन बहुत ज्यादा कमजोर सरकार है. क्योंकि लोकतंत्र में कोई भी सरकार लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव लड़कर आता है तो उसकी जिम्मेदारी बनती है कि देश के किसी एक भी आदमी को संदेह है, कि हमने जिसे वोट किया था वह वोट उसे नहीं गया. यह सरकार और चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि उस संदेह को दूर करने के लिए काम करे.”

जंतर मंतर पर जुटे लोग

उन्होंने आगे कहा, “हम लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं. पिछले पांच सालों में हमने ऐसी कई लड़ाई लड़ी है. देश के नागरिक का मूलभूत अधिकार है कि हम पांच सालों में एक बार किसी भी प्रत्याशी को वोट देकर चुन सकते हैं. वो वोट हमारा वोट होगा. लेकिन अगर हमारा वोट छीनने की कोशिश की जाएगी, तो हम चुप नहीं बैठेंगे.”
बता दें कि सात चरणों में संपन्न हुए चुनाव के दौरान अलग-अलग राज्यों से कथित ईवीएम धांधली एवं हेराफेरी की ख़बरें सामने आती रही हैं. मोदी सरकार के 5 सालों के कार्यकाल में देश के किसान, युवा, जवान और मजदूर वर्ग कई बार भाजपा का विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं. ऐसे में 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को प्रचंड जीत मिलाना ईवीएम धांधली की ख़बरों को बढ़ावा दे रहा है.

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