कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

सवर्णों को 10% आरक्षण भी जुमला? सरकारी नौकरियों में युवाओं को नहीं मिल रहा आरक्षण का लाभ

युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. उन्होंने अब #EWSJumla के माध्यम से सोशल मीडिया पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है.

केंद्र व राज्य सरकार ने हाल ही में आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्ण (सामान्य) वर्ग को सरकारी नौकरी में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया प्रदान किया था. लेकिन आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग के युवाओं को आरक्षण नहीं मिल रहा है.

सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण लागू होने के बाद सरकारी नौकरियों की भर्ती के लिए विज्ञापित अधिसूचनाओं में नई आरक्षण नीति के तहत ईडब्ल्यूएस श्रेणी के उम्मीदवारों को आयु सीमा, कट-ऑफ या संख्या में छूट नहीं दी गई है.

14 जनवरी के बाद से जारी किए गए नौकरी विज्ञापनों में कर्मचारी चयन आयोग (SSC), संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) और भारतीय खाद्य निगम (FCI) शामिल हैं.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में सामाजिक न्याय मंत्री तवर चंद गहलोत ने कहा, “सरकार ईडब्ल्यूएस आरक्षण के लाभों को जल्द ही लागू करेगी. सामाजिक न्याय विभाग ने सभी हितधारकों को ईडब्ल्यूएस श्रेणी में आयु सीमा, कट-ऑफ और अन्य लाभ देने के लिए संदेश भेजा है.”

नई भर्तियों में इस आरक्षण नीति का लाभ न देने को लेकर मंत्री जी ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में समय लगेगा और इसे धीरे-धीरे लागू किया जाएगा.

सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु सीमा में केंद्र सरकार की अधिकांश नौकरियों जैसे कि यूपीएससी, एसएससी में 32 वर्ष है. ओबीसी जैसे उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी की तुलना में तीन साल की अतिरिक्त छूट मिलती है. इसी तरह, एससी/एसटी और जम्मू-कश्मीर के उम्मीदवारों के लिए आयु सीमा 37 वर्ष है. वहीं, विकलांग व्यक्तियों के लिए 42 वर्ष और पूर्व सैनिकों के लिए 35 वर्ष है.

इसी तरह, सामान्य वर्ग के लिए कटऑफ 40 फीसदी, ओबीसी (गैर क्रीमी लेयर) और एससी/एसटी उम्मीदवारों के लिए 25 फीसदी है. 10 प्रतिशत कोटा नीति को लागू करने में देरी को लेकर देश के उम्मीदवार चिंता व्यक्त कर रहे हैं.

दिल्ली में नौकरी तलाश कर रहे युवा ने नाम न बताने के शर्त पर कहा, “नई नीति गरीबों और वंचितों के लिए फायदेमंद है. हालांकि, सरकार आयु सीमा में छूट देने और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लाखों नौकरी उम्मीदवारों के लिए कोई प्रयास नहीं कर रही है. यह ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू होने के बाद जारी किए गये एसएससी, यूपीएससी, एफसीआई और आरआरबी की भर्ती से स्पष्ट हो गया है.”

दिल्ली के एक अन्य उम्मीदवार ने कहा कि, “लाखों ईडब्ल्यूएस युवाओं की आशाएं अब निराशा में बदल गई हैं. यह निर्णय काफी महत्वपूर्ण और तारीफ के लायक था लेकिन सरकार इसे लागू करने में कोताही बरत रही है.

उन्होंने कहा कि हम ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. अब (#EWSJumla, # agerelaxation4ews) जैसे हैशटेग के माध्यम से सोशल मीडिया पर युवाओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने बीते सोमवार को कहा कि वह आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे को संविधान पीठ के पास भेजने के के पक्ष में नहीं है. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कोटे को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के लिए 28 मार्च की तारीख की और कहा कि यह मामला संविधान पीठ के पास जाना चाहिए या नहीं इसपर भी विचार किया जाएगा.

उम्मीदवारों के एक वर्ग ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका भी दायर की है. नौकरी चाहने वालों एमएसआर चौधरी, सौरभ कुमार सिंह, एसएस अब्बास और एक अन्य उम्मीदवार ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की है. वहीं, नौकरी की तलाश में भटक रहे युवा भी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं.

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