कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

ग़ैर-कश्मीरियों को कश्मीरियों के ख़िलाफ़ भड़काया जा रहा है, नेताओं और मीडिया की कही बातों पर अपनी राय ना बनाएं: इल्तिज़ा जावेद

पीडीपी प्रमुख और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिज़ा जावेद ने अनुच्छेद 370 के परिप्रेक्ष्य में न्यूज़सेंट्रल24x7 से की एक्सक्लूसिव बातचीत.

मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 हटाने से पहले (बीते रविवार) को जम्मू-कश्मीर में पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के कई नेताओं को हिरासत में लिया गया. जिसमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती सईद भी शामिल हैं. राज्य की नाजुक हालत को लेकर महबूबा मुफ़्ती की बेटी इल्तिज़ा जावेद  (सना मुफ़्ती) से न्यूज़सेंट्रल24×7  के प्रधान संपादक दुष्यंत ने बात की. पेश है इस बातचीत के मुख्य अंश:

दुष्यंत: जम्मू-कश्मीर में कैसे हालात हैं? लोग कैसे हैं? कुछ लोग कह रहे हैं कि वहां जश्न का माहौल है.

इल्तिज़ा जावेद: माहौल यहां बहुत तनावपूर्ण है. बहुत ही ज्यादा ख़ौफ है. जो लोग आपको कह रहे हैं कि यहां जश्न का माहौल है उनसे कहिए कि कर्फ्यू हटाई जाए ताकि लोग सड़कों पर उतरकर पटाखे फोड़ सकें और वाकई में जश्न मनाएं. मैं विश्वास नहीं कर सकती कि वहां के लोग ऐसी बेवकूफ़ी की बात करते हैं, अहमक हैं. मातम का माहौल है और जो ये प्रेशर कुकर टाइप माहौल कर रहे हैं कि लोगों को बंद करके रखा है अपने घरों में. लीडरशिप नहीं आम लोगों को भी बंद करके रखा गया है. लोगों ने एक हफ़्ते का राशन जमा किया था उसके ख़त्म होने के बाद क्या करेंगे कुछ पता नहीं. जिन्हें लगता है कि यहां जश्न का माहौल है वो यहां आए और हमारे साथ जश्न मनाए.

दुष्यंत: महबूबा जी कहां पर हैं? उनसे बात हो रही है? जब आख़िरी बार आपसे मिलीं उनकी प्रतिक्रिया क्या थी?

इल्तिज़ा जावेद: अंतिम बार मैं कल ही उनसे मिली थी. जब अधिकारी आए थे, तभी वो जल्दबाजी में अपना कुछ सामान लेकर उनके साथ चली गईं. तबसे मेरा उनके साथ कोई राब़्ता नहीं हुआ है. मैं अपनी मां से मिलने के लिए अनुमति लेने गई, लेकिन ये लोग इतने बुज़दिल हैं कि उन्हें एकांत में रखना चाहते हैं, टॉर्चर करना चाहते हैं, लेकिन वे नहीं जानते हैं कि वह पिछले 20 सालों से कश्मीरियों के हक़ की लड़ाई लड़ रही हैं. उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में बहुत संघर्ष किया है. इसलिए यह जो कुछ भी हो रहा है उससे मेरी मां झुकने वाली नहीं हैं. इसलिए उनके साथ कुछ करने से पहले उनकी व्यक्तित्व को देखिए. उनको हमसे अलग रखने की कोशिश नहीं चलने वाला है. हम उनको पूरे दिल से समर्थन करेंगे. हम इस वक्त हर एक कश्मीरी के साथ हैं और यहां जो डर का माहौल बनाया गया है, वह बहुत ज्यादा देर नहीं रखा जा सकता है. क्योंकि लोग आपके अत्याचारों के ख़िलाफ़ बोलेंगे जो आपने उनके ख़िलाफ़ किए थे.

दुष्यंत: शायद यह सवाल पूछना जल्दबाजी होगी, लेकिन मैं पूछ लेता हूं. अब जम्मू-कश्मीर को जब केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया है तो आगे का राजनीतिक कदम क्या होगा. चूंकि पहले पीडीपी ने बीजेपी के साथ विधानसभा चुनाव के बाद गठबंधन की थी, बावजूद लोगों को इस गठबंधन में विश्वास की कमी थी. अब आगे पार्टी इसको कैसे लेगी?

इल्तिज़ा जावेद: अभी यहां पर लोग इस हालात में हैं कि कोई चुनाव के बारे में सोच भी नहीं रहा है. अभी इसके बारे में बात करना बहुत जल्दी होगा. मैं अभी नहीं बता सकती हूं कि चुनाव को लेकर पीडीपी का क्या स्टैंड होगा. औपचारिक तौर पर अब ये लोग चुनाव भी कर लेंगे क्योंकि इनके जो मर्जी में आता है, वहीं करते हैं. किसी से भी विचार-विमर्श करने की जरूरत नहीं समझते. तो चुनाव तो यहां पर फार्स जैसा होगा. क्योंकि हमारी पहचान, हमारा गौरव, हमारी इज्जत तो हमसे छीन ली गई है.

दूसरी बात कि हम भाजपा में क्यों गए थे तो आपका कहना सही है कि इसे लेकर जम्मू-कश्मीर के लोगों के बीच बहुत ज्यादा विश्वास की कमी थी. हालांकि पीडीपी के संस्थापक मुफ्ती मोहम्मद सईद के नज़रिए में उनका विज़न बहुत बड़ा था. यदि पावर के लिए हमें सरकार बनानी होती तो हम कांग्रेस या नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ भी जा सकते थे. हमें उनका प्रस्ताव भी आया था. लेकिन हमने सिर्फ कश्मीर घाटी के लिए नहीं बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हित के लिए हमने सोचा. हमें लगा कि भाजपा से जुड़ कर हम दोनों क्षेत्रों के बीच की दूरी को कम कर पाएंगे. लेकिन, इसका नतीज़ा क्या हुआ यह आप देख रहे हैं. अब इन्होंने राज्य का बंटवारा भी कर दिया है. जितना सुनने में आया है उसके अनुसार कारगिल के लोगों ने कल काफी विरोध प्रदर्शन किया है और कहा है कि वह लद्दाख के साथ नहीं रहना चाहते. वह जम्मू-कश्मीर के साथ रहना चाहते हैं. जो अखंड भारत करते हैं उन्हें बता दें कि दूसरा बंटवारा तो भाजपा के इतिहास में हुआ है. क्या भाजपा इस तथ्य पर गर्व करेगी कि हिंदुस्तान का पहला बंटवारा 1947 में हुआ और हिंदुस्तान, पाकिस्तान को अलग-अलग कर दिया गया. दूसरा कश्मीर जो मुस्लिम बहुल राज्य है. इसका बंटवारा भाजपा के राज में हुआ है तो यह हमारे संवैधानिक इतिहास में बहुत बड़ा कलंक है.

दुष्यंत: इस घोषणा का घाटी के उन लोगों पर, खासकर युवाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा जो भारत के उस विश्वास से जुड़े थे कि यह देश हमेशा जम्मू-कश्मीर के साथ न्याय करेगा.

इल्तिज़ा जावेद: आप जो बोल रहे हैं वो बिल्कुल सही है. वे बहुत बेवकूफ किस्म के लोग हैं जो इस एकीकरण पर ख़ुश हो रहे हैं. यदि किसी लड़की के मर्जी के ख़िलाफ़ आपने उसकी शादी किसी लड़के से करा दी तो उस शादी का कोई मतलब नहीं है. वैसे ही इस एकीकरण का कोई मतलब नहीं है, जो लोगों के साथ विश्वासघात करके की गई है. पूर्व मुख्यमंत्रियों को नज़रबंद करके यह फैसला चोरों की तरह लिया गया. भाजपा को यह बोलते हुए शर्म आनी चाहिए कि जम्मू-कश्मीर का भारत में एकीकरण होने से यहां के लोग खुश हैं. यह फैसला जम्मू-कश्मीर के लोगों पर थोपा गया है. जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों का उल्लंघन किया गया है. जिन नियमों पर जम्मू-कश्मीर भारत में शामिल हुआ था. उन नियमों का उल्लंघन किया गया है.

दुष्यंत: आप कश्मीरियों और गैर-कश्मीरियों से क्या कहना चाहती हैं ?

इल्तिज़ा जावेद: कश्मीरियों को तो अभी इतना बुरा हाल है कि अपने राज्य में ही वह बेहाल हो चुके हैं. लेकिन, मैं गैर-कश्मीरी लोगों से यह कहना चाहती हूं कि उनके दिमाग में कश्मीरियों को लेकर ज़हर भरा जा रहा है. मैं चाहती हूं कि आप यहां ख़ुद आएं और यहां की स्थिति को शांत दिमाग से देखें. अनुच्छेद 370 और 35 A दिवाली का तोहफा नहीं था, बल्कि वह हमारा अधिकार था जो भाजपा ने हमसे छीन लिया है. इस देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हमसे हिंदू- मुस्लिम एकता की बात की. यहां बुद्ध ने जन्म लिया और निर्वाण की प्राप्ति की. हमलोग ऐसे शांतिप्रिय देश के निवासी हैं. लेकिन, गैर-कश्मीरी लोगों को कश्मीरियों के ख़िलाफ़ भड़काया जा रहा है. ऐसा बताने की कोशिश हो रही है कि कश्मीरी कोई शैतान और हैवान टाइप के लोग हैं, जबकि ऐसा नहीं है. प्लीज़ आप दिमाग और अपना दिल खोलकर अच्छे से सोचिए. कश्मीरियों को आपकी जरूरत है. आज यह कश्मीरियों के साथ हुआ है कल आपके साथ भी हो सकता है. केंद्र सरकार अपने भारी बहुमत के दम पर फैसला ले रही है. सबको अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की जरुरत है. इसलिए हालात को देखते हुए सोच-समझ कर आप कश्मीरियों के बारे में कोई फैसला लें. मीडिया और नेताओं की कही बातों के आधार पर आप अपनी राय ना बनाएं और कश्मीरियों के बारे में नकारात्क ना सोंचे.

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