कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

Exclusive: “मुझे अबतक कोई पेपर नहीं दिया गया..आदेश के बारे में कुछ नहीं बताया गया. क्या मैं इस अंधकार के बीच क़ानूनी लड़ाई लड़ूंगा?

प्रधानमंत्री का हेलीकाॅप्टर जांच करने पर निलंबित हुए IAS अफ़सर ने न्यूज़सेंट्रल24×7 से बयां किया अपना दर्द

प्रधानमंत्री नेरन्द्र मोदी के हेलीकॉप्टर जांच करने पर निलंबित हुए IAS अफ़सर मोहम्मद मोहसिन चुनाव आयोग के रवैए से काफ़ी नाख़ुश हैं. उन्होंने चुनाव आयोग के द्वारा की गई कार्रवाइयों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या इस देश में प्राकृतिक न्याय है या नहीं? निलंबन का आदेश देने से पहले चुनाव आयोग ने मेरा पक्ष नहीं जाना. मुझे अबतक किसी प्रकार का कोई पेपर नहीं दिया गया. क्या मैं इस अंधकार के बीच क़ानूनी लड़ाई लड़ूंगा ?

मोहम्मद मोहसिन ने इस संदर्भ में न्यूज़सेन्ट्रल24×7  से बातचीत की. यह पूछने पर कि 17 अप्रैल को संबलपुर में आख़िर हुआ क्या था? जवाब में अफ़सर बताते हैं, “सोमवार को उस दिन मैं हेलीपैड गया था और चुनाव आयोग के अधिकारियों को मैंने बताया था कि कैसे क्या काम करना है. पर मैं वहां से पहले ही निकल चुका था. मेरे जाने के बाद प्रधानमंत्री वहां आए. मैं दूसरे काम के लिए कलेक्ट्रेट कार्यालय में गया था.”

जब आप हेलीपैड के पास थे नहीं, फिर आपका निलंबन किस आधार पर किया गया? इसके जवाब में मोहम्मद मोहसिन कहते हैं, “मसला तो यही है कि मैं उस समय घटनास्थल पर था भी नहीं. मैं उस समय कलेक्ट्रेट कार्यालय में बैठा था. मैं इसी को लेकर चुनाव आयोग के साथ ज़िला प्रशासन से भी अनुरोध कर चुका हूं कि आपलोग उस रिपोर्ट को मेरे साथ शेयर करें जिसके आधार पर यह आदेश जारी किया गया है. लेकिन अभी आपसे बात कर रहा हूं. मैं बहुत निराश हूं क्योंकि मेरे पास कोई पेपर नहीं है. क्या आदेश राज्य सरकार को जारी किया गया है..क्या रिपोर्ट चुनाव आयोग द्वारा जारी किया गया ..मुझे कभी शेयर ही नहीं किया गया. मैं इस अंधकार के बीच क़ानूनी लड़ाई लड़ूंगा? मेरे पास कम्यूनिकेशन के लिए कोई विकल्प ही नहीं दिया गया. मैं कलेक्ट्रेट को व्हॉटसैप, फ़ेसबुक और ईमेल तक कर चुका हूं कि प्लीज़ आप रिपोर्ट शेयर करें लेकिन कोई जवाब नहीं आया.”

जब आपके साथ इतना कुछ हो रहा है, फिर आगे कि लड़ाई आप कैसे लड़ेंगे? इस जवाब में IAS अफ़सर कहते हैं कि “मैं क़ानूनी लड़ाई लड़ूंगा. मैं एक बार फिर ‘केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट)’ के पास जाऊंगा कि आप इस मामले को देखें, यदि आप किसी लटकाते हैं तो उसे कुछ कहने का अवसर भी तो देंगे न…इस देश में नेचुरल जस्टिस है या नहीं?

घटना को लेकर आईएएस एसोसिएशन द्वारा कोई वक्तव्य जारी किया जाएगा, इसके जवाब में आईएएस अफ़सर मोहसिन कहते हैं, “मैं इस बारे में नहीं जानता. मेरे एसोसिएशन के लोग मुझसे बात किए हैं. वो इस केस को देख भी रहे हैं.  आगे देखा जाएगा. लेकिन अभी तक कोई स्टेटमेंट नहीं जारी किया गया है. मैं अपने लोगों के बीच मामले को रखा हूं. मुझे लगता है कि कुछ न कुछ ज़रूर होना चाहिए.”

बता दें कि मोहम्मद मोहसिन 1996 बैच के कर्नाटक कैडर के आईएएस अधिकारी हैं. उड़ीसा में उन्हें सामान्य प्रेक्षक के तौर पर नियुक्त किया गया था. इसके बाद बीते 17 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी के हेलीकॉप्टर की तलाशी लेने के कारण उन्हें निलंबित कर दिया गया था. चुनाव आयोग का कहना था कि मोहसिन ने एसपीजी सुरक्षा पाने वालों को मिलने वाली सुविधाओं का उल्लंघन किया है.

बाद में गुरुवार को बेंगलुरु में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने मोहसिन के निलंबन संबंधी चुनाव आयोग के आदेश पर रोक लगा दी थी. कैट ने कहा था कि एसपीजी सुरक्षा पाने वालों को किसी भी तरह से और कुछ भी करने की छूट नहीं होती.

हालांकि सूत्रों की मानें तो इसके बाद भी चुनाव आयोग द्वारा  कर्नाटक सरकार पर मोहम्मद मोहसिन पर कार्रवाई करने का दबाव बनाया जा रहा है.

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