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फैक्ट चेकः रवीश कुमार ने मुसलमानों से BJP, RSS की आलोचना बंद करने की भावुक अपील नहीं की, सोशल मीडिया पर फैलाई गई झूठी ख़बर

ऑल्ट न्यूज़ की पड़ताल

सोशल मीडिया पर एक संदेश कथित तौर पर रवीश कुमार के नाम से शेयर किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि उन्होंने मुसलमानों से भावुक अपील करते हुए यह कहा है कि वो भाजपा, आरएसएस और मोदी की आलोचना करना बंद कर दें। पूरा संदेश नीचे दिया गया है:

“नई दिल्ली। वरिष्ठ पत्रकार रविश कुमार ने मुस्लिम भाइयों से भावुक अपील की है। अपनी अपील में उन्होंने कहा कि आप लोग भाजपा और आरएसएस की आलोचना करना बंद कर दें। आपका विरोध करना ही उनकी ताक़त है। वैसे भी जम्मू-कश्मीर को छोड़कर न तो तुम्हें कहीं का मुख्यमंत्री बनना है और न ही प्रधानमंत्री। जिनको सत्ता लेनी है, वो अपने आप आरएसएस, भाजपा की काट कर लेंगे।
आपके विरोध करने की वजह से ही भाजपा 18 फीसदी मुस्लिमों का भय दिखाकर 80 फीसदी हिन्दुओं का वोट अपने पाले में लाने में सफल रहती है और पूरे खेल के संचालक तो असल में 3 फीसदी ही हैं। उन्होंने कहा कि आपको जिस किसी भी पार्टी को वोट देना है दो, जिसका समर्थन करना है करो पर भूलकर भी भाजपा, आरएसएस और मोदी का विरोध मत करो।
भूल जाओ की आरएसएस नाम का कोई संगठन भी है।
भूल जाओ की भाजपा कोई पार्टी है। भूल जाओ कि मोदी कोई नेता है। आपकी यही दशा रही तो कुछ साल में आप राजनीतिक तौर पर अछूत बना दिए जाओगे, फिर न तो आपको कांग्रेस पूछेगी, न भाजपा, न सपा और न बसपा। जिस मीम और ओवैसी का आप अंध समर्थन कर रहे हो उसको चुनाव में हिस्सा तभी तक लेने दिया जायेगा जब तक की भाजपा को उनके चुनाव लड़ने से फायदा हो रहा है।
जिस दिन भाजपा को लगेगा कि अब इनके चुनाव लड़ने से उसे नुकसान हो रहा है उसी दिन मीम पर पाबंदी लगा दी जायेगी जैसे की पहले 30-40 साल तक पाबन्दी लगी थी। तुम केवल आधुनिक, वैज्ञानिक शिक्षा पर ध्यान दो, इतने अंक लाओ कि बिना आरक्षण के ही तुम सरकारी नौकरियां हासिल कर सको।
आजादी से पहले भारत में मुसलमानों की आबादी 35 फीसदी थी और 35 फीसदी सरकारी नौकरियों पर मुसलमानों का कब्जा था, उस समय यह आरक्षण जैसी कोई व्यवस्था भी नही थी। जो उस मुकाम तक पहुंचते थे वो अपनी काबिलियत के दम पर ही पहुंचते थे और जो आप दीनी इदारों में जकात, खैरात का पैसा देते हैं बेहतर होगा कि ऐसे इदारों में भी जकात, खैरात का पैसा दो जो आपकी शिक्षा और रोजगार के लिए काम करे। यदि ऐसे इदारे नही हैं तो बनाइये।
याद रखिये इस समय कम्पटीशन का जमाना है और आप हर क्षेत्र में पिछड़ रहे हैं, किसी भी तरह की सरकारी मदद का भरोसा छोड़ दीजिये। जो करना है आप अपने दम पर कीजिये। बाकी ख़ुदा मालिक है।”

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हमने पाया कि कई सोशल मीडिया यूज़र्स इस संदेश को फ़ेसबूक और ट्विट्टर पर शेयर कर रहे हैं।

यहाँ तक कि हमने पाया यह संदेश मार्च, 2018 से सोशल मीडिया यूज़र्स शेयर कर रहे हैं। इसी संदेश का अंग्रेजी अनुवाद व्हात्सप्प पर शेयर किया जा रहा है।

पड़ताल

ऑल्ट न्यूज़ ने जब इस संदेश की जांच की तो पता चला कि पिछले साल 29 मार्च, 2018 को सियासत डेली वेबसाइट ने इस पर लेख प्रकाशित किया था।

सियासत डेली ने अपने लेख में रवीश कुमार के कथित इस बयान को छापते हुए यह लिखा है कि उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान यह बयान दिया था। यह कार्यक्रम कहाँ हुआ था, किस विषय पर आधारित था इसका ज़िक्र इस लेख में कहीं नहीं किया गया है।

हमने रवीश कुमार से संपर्क किया, उन्होंने कहा, यह बयान उनका नहीं है और यह बिलकुल गलत है।

हमने पाया कि यह संदेश जब पिछले साल रवीश कुमार का बताकर वायरल किया जा रहा था, उसी समय उन्होंने अपने आधिकारिक फ़ेसबूक पेज से इसे ख़ारिज़ किया था। उन्होंने लिखा था, “आप अगर इस तरह का मेसेज देखें तो नज़रअंदाज़ करें। मैंने मुसलमानों से कोई अपील नहीं की है।

यहाँ यह ध्यान देने वाली बात है कि रवीश कुमार ने अपने आधिकारिक फ़ेसबूक पेज से इस वायरल संदेश को 20 मार्च, 2018 को ही खारिज़ कर दिया था, फिर भी सियासत ने इसपर 29 मार्च, 2018 को लेख प्रकाशित कर गलत संदर्भ दिया। हमने पहले भी सियासत डेली को गलत जानकारी प्रकाशित करते हुए पाया है। (12, 3)

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