कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

फैक्ट चेकः श्रीलंका पुलिस ने ‘आतंकवादी-समर्थकों’ की पिटाई की? सोशल मीडिया पर पाकिस्तान का पुराना विडियो वायरल

ऑल्ट न्यूज़ की पड़ताल

आंखों पर पट्टी बंधे सेना के जवानों का एक वीडियो सोशल मीडिया में प्रसारित किया जा रहा है। इस वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा है, “श्रीलंकाई पुलिस ने आतंकवादी समर्थकों को पकड़ा और देखिए कैसे वो रोज़ ऐसा व्यवहार करते हैं, लेकिन कोई अदालत / कोई बिरयानी नहीं बल्कि रोज़ाना यह पिटाई। देखिए। ” -(अनुवाद) दावा किया जा रहा है कि श्रीलंका  के पुलिसकर्मी आतंकवाद समर्थकों की पिटाई कर रहे हैं।

यह दावा कि श्रीलंकाई पुलिस उन्हें “बिरयानी” नहीं परोस रही है, इस संदेश में, पूर्व यूपीए शासन का मज़ाक उड़ाने की कोशिश भी की गई है। यह ध्यान देने योग्य है कि भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों द्वारा बार-बार यह मज़ाक उड़ाया जाना भी गलत सूचनापर आधारित है।

फेसबुक पर कुछ और लोगों ने इसी संदेश के साथ यह वीडियो शेयर किया है।

तथ्य-जांच

ऑल्ट न्यूज़ ने पहले भी यह वीडियो खारिज किया था, जब इसे मार्च के शुरुआत में सोशल मीडिया में इस दावे के साथ वायरल था कि यह पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों द्वारा चौकी खाली छोड़कर भाग जाने वाले अपने ही सैनिकों को मारते हुए दिखलाता था। यह वीडियो यूट्यूब पर फरवरी 2019 की शुरुआत से उपलब्ध है, यानि कि श्रीलंका बम हमलों के दो महीने पहले से। इस प्रकार, 5 फरवरी 2019 से इंटरनेट पर उपलब्ध कोई वीडियो, उस घटना का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता, जो अप्रैल 2019 में हुई थी।

संदेश के अनुसार, वीडियो में पाकिस्तानी सेना के स्पेशल सर्विस ग्रुप कमांडो प्रशिक्षण को दर्शाया गया है। इसके अलावा, यूट्यूब पर एक प्रासंगिक कीवर्ड खोज ऐसे ही कई अन्य वीडियो तक पहुंचाता है, जिनमें आंखों पर पट्टी और पीठ पीछे हाथ बंधे हुए सैनिकों को इसी तरह से प्रताड़ित होते देखा जा सकता है।

सैनिकों के पहनावे भी बताते हैं कि ये श्रीलंकाई पुलिस कर्मी नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सेना के जवान हैं।

उर्दू न्यूज़ चैनल एक्सप्रेस न्यूज़ की एक रिपोर्ट, भी पाकिस्तानी सैनिकों को दिए जाने वाले इस यातना प्रतिरोध प्रशिक्षण के बारे में बताती है। इस बारे में आप हमारी विस्तृत तथ्य-जांच यहां पढ़ सकते हैं।

निष्कर्ष रूप में, एक पुराने वीडियो को, जो हमले से दो महीने पहले से यूट्यूब पर मौजूद था, श्रीलंकाई पुलिस द्वारा आतंकवादियों के समर्थकों पर अत्याचार के रूप में शेयर किया गया।

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