कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

फ़ेक न्यूज़ः भारतीय सेना द्वारा 7 वर्षीय पाकिस्तानी बच्चे का शव सौंपने की तस्वीर झूठे दावे से साझा

ऑल्ट न्यूज़ की पड़ताल

“कितने गर्व का क्षण है यह! भारतीय सेना ने पाकिस्तानियों को सफ़ेद झंडे के साथ आकर मृत शरीर को यहां से लेकर जाने के लिए कहा! यह तस्वीर मुझे 1971 के दौर में ले गई जहाँ पर 93,000 पाकिस्तानी सैनिको ने भारतीय सेना के सामने सफ़ेद झंडा लहराके आत्मसमपर्ण किया था”-(अनुवाद)।

उपरोक्त संदेश को एक तस्वीर के साथ ट्वीट किया गया है, जिसमें एक सैनिक खड़े होकर घाटी की तरफ देख रहे हैं और कुछ अन्य सैनिक उनके पीछे सफ़ेद झंडे के साथ चलते हुए दिख रहे हैं। यहां ध्यान देने वाली बात है कि भारतीय सुरक्षा बलों ने हाल ही में पाकिस्तानी विशेष बलों द्वारा नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ करने की एक कोशिश को नाकाम कर दिया था, जिसमें पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) के कम से कम पांच कर्मियों को गोली मार दी गई थी। बाद में, भारतीय पक्ष ने पाकिस्तान सेना को शवों को वापस ले जाने की पेशकश की थी।

4 अगस्त को पोस्ट की गई इस ट्वीट को अब तक करीब 1400 बार रीट्वीट किया जा चूका है। एक अन्य ट्वीट को करीब 500 बार रीट्वीट किया जा चूका है।

गलत जानकारी

गूगल पर एक आसान सा रिवर्स इमेज सर्च करने से हम यह पता लगा पाए कि यह तस्वीर LoC पर हुई मुठभेड़ से संबधित नहीं है। यह तस्वीर जुलाई 2019 की है। तस्वीर में सात वर्षीय पाकिस्तानी लड़के का शव दिख रहा है, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) की एक नदी में गिर गया था और पानी के बहाव के साथ इस तरफ आ गया था। NDTV द्वारा 12 जुलाई, 2019 को प्रकाशित एक लेख के मुताबिक,

“जम्मू-कश्मीर के गुरेज़ सेक्टर में किशनगंगा नदी से निकाले गए पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) के आठ वर्षीय लड़के के शव को गुरुवार को तीन दिन बाद सेना ने पाकिस्तान की सेना को सौंप दिया”-(अनुवाद)। रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि, “8वर्षीय आबिद शेख कथित रूप से नियंत्रण रेखा से PoK में मिनीमर्ग क्षेत्र के चट्टान से चार किलोमीटर दूर नदी में गिर गया था। लड़के का शव  9 जून को जम्मू-कश्मीर की सीमा पर पहुंचा”-(अनुवाद)।

इसके अलावा, भारतीय सेना के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट द्वारा 11 जुलाई, 2019 को ऐसी ही जानकारी को ट्वीट किया गया था। पत्रकार आदित्य राज कौल ने भी इसके बारे में ट्वीट किया था, साथ में हाल में झूठे दावे के साथ साझा की गई इस तस्वीर को भी शेयर किया था।

निष्कर्ष के तौर पर, साझा की गई तस्वीर जुलाई 2019 की घटना से संबधित थी और हाल में जम्मू-कश्मीर में LoC की घटना से इसका कोई संबंध नहीं है।

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