कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

फ़ेक न्यूज़ः पश्चिम बंगाल पुलिस ने इस्कॉन भक्तों को भगवद गीता बेचने पर नहीं मारा, सोशल मीडिया पर झूठी ख़बर वायरल

ऑल्ट न्यूज़ की पड़ताल

क्या पश्चिम बंगाल में पुलिस ने कृष्ण पंथ, इस्कॉन के सदस्यों पर हमला किया? एक वीडियो पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर आक्रामक रूप से चल रहा है। इसमें भगवा वस्त्र पहने कुछ लोगों को खाकी वर्दी वाले लोगों द्वारा परेशान करते हुए दिखाया गया है।

एक यूज़र द्वारा 7 मई को यह वीडियो पोस्ट किए जाने के बाद से, 10,000 से अधिक बार देखा गया था। अब इसे डिलीट कर दिया गया है। कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने अपनी टाइमलाइन पर यह वीडियो पोस्ट किया है। इसे WE SUPPORT NARENDRA MODI ग्रुप में भी पोस्ट किया गया है। दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने कृष्ण भक्तों को गीता की प्रतियां वितरित करने से रोका।

वीडियो को ट्विटर पर भी अपलोड और पोस्ट किया गया है।

असंबद्ध, 2008 का वीडियो

विचाराधीन वीडियो को पहले भी अप्रैल 2018 में इसी दावे के साथ खारिज किया गया था। वीडियो को इस दावे के साथ भी शेयर किया गया था कि यह घटना गोवा में हुई थी, जहां कृष्ण भक्तों पर ईसाई समुदाय के सदस्यों ने हमला किया था।

ऑल्ट न्यूज़ को एक गोआनी समाचार संगठन heraldgoa.in के 26 नवंबर, 2008 के लेख से हुआ था। heraldgoa.in में लेख की तस्वीर में वही लोग और पुलिस अधिकारी हैं, जो ऊपर दिए वीडियो में हैं।

हालाँकि, heraldgoa.in वेबसाइट पर लेख की सामग्री बहुत छोटी थी, शायद इसलिए कि यह लेख पुराना है और उनकी वेबसाइट पर पिछले 10 वर्षों में बदलाव हो सकते हैं जिसके परिणामस्वरूप पुराने लेखों में से कुछ अब सुलभ नहीं है। हमें 2013 के रेडिट थ्रेड में उस लेख का पाठ मिल गया।

यह घटना गोवा में 2008 में घटी थी, जिसमें हरे राम हरे कृष्ण संप्रदाय के रूसी सदस्यों का एक समूह पुलिस से भिड़ गया था, क्योंकि स्थानीय लोगों की शिकायतों के बाद पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की थी। दो पुलिसकर्मी घायल हो गए थे और उपद्रव और पुलिस पर हमला करने के आरोप में आठ रुस के लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया था।

इस प्रकार, यह दावा कि यह वीडियो पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा इस्कॉन भक्तों के उत्पीड़न का प्रतिनिधित्व करता है, झूठा है। 12 मई और 19 मई को चुनाव के अंतिम दो चरणों में पश्चिम बंगाल के कई निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान होना तय है। परिणामस्वरूप, मतदान से पहले गलत सूचनाओं में वृद्धि हुई है।

You can also read NewsCentral24x7 in English.Click here
+