कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

मध्य प्रदेश में कर्ज़माफी के बाद सामने आया 3000 करोड़ का घोटाला, भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुई थी अनियमितताएं

ये घोटाले भाजपा की पिछली सरकार के कार्यकाल में किए गए थे.

मध्यप्रदेश में किसानों की कर्ज़माफ़ी की लिस्ट सार्वजनिक करने के बाद सामने आई जानकारी से सरकार की नींद उड़ गई है. लिस्ट सामने आते ही 3000 करोड़ का घोटाला सामने आया है. ये घोटाले भाजपा की पिछली सरकार के कार्यकाल में किए गए थे.

कर्ज़माफ़ी की लिस्ट सामने आने के बाद सूबे के कोने-कोने से बड़ी संख्या में वो किसान सामने आए जिनका नाम  कार्ज़दारों की लिस्ट में है, लेकिन हैरानी की बात ये है कि इन किसानों ने कभी कोई कर्ज़ नहीं लिया.

पंचायत स्तर पर कर्ज़दार किसानों की लिस्ट चिपकाए जाने के बाद किसानों ने तीन तरह की शिकायत की. पहली- उन्होंने कर्ज़़ लिया ही नहीं और नाम कर्ज़दारों की सूची में आ गया. दूसरी – कर्ज़ कम लिया और दिखाया ज़्यादा गया है. तीसरी – कर्ज़ लेने वाले की मृत्यु हो जाने के बावजूद नाम कर्ज़दार की सूची में दर्ज़ है.

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शिकायतों की बढ़ती संख्या को देखते हुए हर ज़िला सहकारी बैंक मुख्यालय पर एक कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया है.

सत्य हिंदी के मुताबिक, पूर्व की बीजेपी सरकार के कार्यकाल के दौरान सहकारी बैंकों में 3000 करोड़ का घपला सामने आया है. राज्य के 38 ज़िला सहकारी बैंकों में अधिकांश की हालत बेहद खराब है. जिसको सुधारने के लिए सहायता राशि मुहैया दी गई थी. सहकारी समितियों के पास पैसा सीधे आने पर समितियों के अध्यक्षों ने सोसायटी के विपणन अधिकारियों के साथ मिलकर कर्ज़ वितरण का फ़र्ज़ीवाड़ा किया.

राज्य के सहकारिता मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने ‘सत्य हिन्दी’ से इस मामले पर बात करते हुए बीजेपी सरकार पर निशाना साधा, उन्होंने कहा, “अपने निजी स्वार्थों के लिए तत्कालीन बीजेपी की सरकार और उसमें बैठे लोगों ने मध्य प्रदेश के सहकारिता आंदोलन को बर्बाद कर दिया.”

उन्होंने आगे कहा कि शुरुआती जांच में  3000 करोड़ की गड़बड़ी देखने को मिली है. अभी तो 50 लाख आवेदनों में से 13 लाख के लगभग किसानों ने ही आवेदन किए हैं. बचे हुए आवेदनों के बाद घपले का आंकड़ा काफ़ी बढ़ सकता है. भ्रष्टाचार करने वाले हर व्यक्ति के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी.’

फिलहाल कमलनाथ सरकार ने कई जिलों में बैंक के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज़ कर जाँच शुरु कर दी है. वहीं कमलनाथ ने अधिकारियों को इस मामले में आवश्यक क़दम उठाने के निर्देश दिए हैं.

आपको बता दें कि इसके पहले कभी भी कर्ज़दार किसानों की लिस्ट को इस तरह से सार्वजनिक नहीं किया गया है.

 

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