कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

बुरी है देश के किसानों की हालत, आत्महत्या करने को मजबूर हैं अन्नदाता: नितिन गडकरी

मोदी सरकार में मंत्री नितिन गडकरी ने किसानों की बदहाली पर चिंता व्यक्त की है.

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी अब मान लिया कि देश में किसानों के हालात बहुत बुरे हो गए हैं. चावल, गेहूं की खेती करने के बावजूद देश के अन्नदाता मर रहे हैं.

जनसत्ता की ख़बर के अनुसार नितिन गडकरी ने बीते सोमवार को एक कार्यक्रम में कहा कि सरकार को सबसे पहले आदिवासियों और खेती को प्राथमिकता देनी चाहिए.

उन्होंने आगे कहा कि मुंबई में बर्तन धोने वाली राख 18 रुपए की आती है, लेकिन चावल 14 रुपए किलो में मिलता है, जिससे पता चलता है कि किसानों की हालात बहुत खराब है. उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों से प्राप्त जैव ईंधन को किसानों और आदिवासियों के लिए बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करना चाहिए.

ग़ौरतलब है कि देश के किसान फ़सलों के उचित दाम न मिलने से परेशान चल रहे हैं. फ़सलों के उचित दाम न मिलने के कारण किसान आत्महत्या को मजबूर हो रहे हैं. हाल ही में महाराष्ट्र सहित पूरे देश के किसानों ने फ़सलों की कीमत और एमएसपी जैसे मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया था.

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