कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

खोदा पहाड़, निकली चुहिया: मित्रो इस प्रकार की ‘प्रचार कॉन्फ़्रेंस’ आपने पहले कभी देखी थी?

‘थी ख़बर गर्म कि मोदी के दिखेंगे जलवे /देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ ‘

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आख़िरकार अपने कार्यकाल की पहली और अंतिम प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ही लिया. लेकिन सवालों और जवाबों का विवरण देखते हुए इसे ‘प्रचार कॉन्फ्रेंस’ कहना ज़्यादा उचित होगा. यह आश्चर्य करने वाली बात थी कि प्रधानमंत्री के नाम पर प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया लेकिन जवाब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दे रहे थे. प्रधानमंत्री ज़्यादा समय तक बस भाव भंगिमा बदलते हुए भाजपा अध्यक्ष को सुनते रहे.

प्रेस कॉन्फ्रे़ंस के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर इस कॉन्फ्रेंस की काफ़ी आलोचना हुई. कई पत्रकारों ने कहा कि यह कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस ही नहीं था.

वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी लिखते हैं, “प्रधानमंत्री पहली बार मीडिया के सामने आए, मगर सवाल अमित शाह की ओर खिसका गए. फिर भी चेहरा लटका दीखा, गर्दन झुकी हुई. किस बात का भय सताने लगा कि मायूस-से बिना तैयारी मीडिया के सामने आ बैठे?”

एक और वरिष्ठ पत्रकार अरुण माहेश्वरी ने इस प्रेस कॉन्फ्रे़ंस पर तंज कसते हुए फेसबुक पर लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी का पहला ‘संवाददाता सम्मेलन’ – ग़ालिब साहब से माफ़ी के साथ :‘थी ख़बर गर्म कि मोदी के दिखेंगे जलवे /देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ ‘मोदी ने किसी सवाल का जवाब नहीं दिया !”

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने भी आश्चर्य व्यक्त करते हुए ट्वीट किया कि “क्या वाकई प्रधानमंत्री मोदी की उनके कार्यकाल (सन् 2014-19) की यह पहली और आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस थी?”

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर विपक्ष भी खूब निशाना साध रहा है. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने तंज कसते हुए कहा, ” मोदीजी की पहली और आख़री प्रेसवार्ता- अमित शाह की बैसाखी बना  !खोदा पहाड़, निकली चुहिया! 1 घंटे का भाषण, पत्रकारों के चेहरे पर थकान, पत्रकारीता पर बहुत सारा प्रवचन,1 सवाल नहीं, 1 जबाब नहीं.”

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे. उन पर हमेशा से यह आरोप लगते रहे हैं कि वो मीडिया से मुखातिब नहीं होते. इस प्रकार के प्रेस कॉन्फ्रेंस इस सवाल को कहीं से ढंक नहीं पा रहा है कि आख़िर मोदी जी को सवाल से इतना डर क्यों लगता है?

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