कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

राफेल घोटाला: फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ने कहा मोदी ने अम्बानी के सिवाय और कोई नाम नहीं भेजा, हमारे पास कोई चारा नहीं था

मोदी सरकार यह दावा करती रही है कि दसॉल्ट ने खुद ही रिलायंस को डील के लिए चुना था।

जनता के सवाल:

प्रश्न 1 – क्या भ्रष्टाचार से घिर गए हैं मोदी?

प्रश्न 2 – क्या कॉरपोरेट के हाथों बिक गई है मोदी सरकार?

प्रश्न 3 – क्या उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता कर रही है मोदी सरकार?

राफेल मुद्दे पर लगातार सफाई पेश कर रही बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने कहा है कि भारत ने राफेल डील के लिए रिलायंस को पेश किया था जिसके कारण उसे रिलायंस के साथ ही यह डील करनी पड़ी।

मीडियापार्ट से बातचीत में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ने कहा है कि हमारे पास इस मामले में बोलने के लिए कुछ नहीं है। भारत सरकार ने इस कंपनी रिलायंस को प्रस्तावित किया जिसके साथ दसॉल्ट ने डील पूरी की। हमारे पास दूसरा कोई विकल्प मौजूद नहीं था।

गौरतलब है कि मोदी सरकार यह दावा करती रही है कि दसॉल्ट ने खुद ही रिलायंस को डील के लिए चुना था, इसमें भारत सरकार का कोई हाथ नहीं था। सरकार ने कहा था कि इस डील में भारतीय रक्षा मंत्रालय का कोई हाथ नहीं था। फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति का बयान सामने के बाद इस मामले पर मोदी सरकार की सच्चाई सामने आ गई है।

इससे पहले मोदी सरकार ने कहा था कि हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड राफेल विमानों के निर्माण में सक्षम नहीं था। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि पिछली यूपीए सरकार ने हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को इस डील से बाहर कर दिया था।

अब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ओलांद  का बयान सामने आने के बाद यह लगभग साबित हो गया है कि मोदी सरकार ने राफेल डील में अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस को मदद पहुंचाने की कोशिश की है।

 

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