कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

हमने भी किए थे कई सर्जिकल स्ट्राइक, पर सेना के नाम पर वोट मांगना हमारी फ़ितरत नहीं: पूर्व PM मनमोहन सिंह

मनमोहन सिंह ने कहा कि भाजपा और पीडीपी की अवसरवादी सरकार ने जम्मू कश्मीर में अस्थिरता को बढ़ावा दिया.

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में कई सर्जिकल स्ट्राइक किए गए, लेकिन हमने कभी भी राजनीति और वोट के लिए उसका इस्तेमाल नहीं किया.

हिन्दुस्तान टाइम्स की सुनेत्रा चौधरी को दिए अपने साक्षात्कार में मनमोहन सिंह ने कहा कि देश के जवानों को हमेशा से ही खुली छूट मिलती रही है. लेकिन, कांग्रेस नीत यूपीए की सरकार ने कभी भी  इस मुद्दे को लेकर राजनीति नहीं की. उन्होंने सेना के जवानों के नाम पर वोट मांगने को लेकर पीएम मोदी और भारतीय जनता पार्टी की आलोचना भी की.

राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले पर मोदी सरकार को घेरते हुए पूर्व पीएम ने कहा, “देश के सबसे सुरक्षित हाइवे पर पुलवामा में आतंकी हमला हुआ. यह पूरी तरह से ख़ुफिया विभाग और राष्ट्रीय सुरक्षा की असफलता थी. इसके बाद पता चला कि सीआरपीएफ और बीएसएफ जवानों ने हवाई माध्यम से यात्रा करने की मांग सरकार से की थी, लेकिन मोदी सरकार ने मना कर दिया था. सरकार ने पहले से मिली ख़ुफिया जानकारियों पर भी ध्यान नहीं दिया.”

इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में कई बड़े आतंकी हमले देश ने देखे हैं. पिछले पांच साल में पाम्पोर, उरी, पठानकोट, गुरदासपुर, सुंजवां आर्मी कैंप पर हमला और अमरनाथ यात्रियों पर हमले देश ने देखे हैं. मोदी सरकार ने पठानकोट आतंकी हमले की जांच के लिए पाकिस्तान के आईएसआई को भारत बुलाकर सेना का मनोबल गिरा दिया. यह सबसे बड़ी भूल थी.

मनमोहन सिंह ने कहा है कि भाजपा और पीडीपी की अवसरवादी सरकार ने जम्मू कश्मीर में अस्थिरता को बढ़ावा दिया.

हिन्दुस्तान टाइम्स  के इस साक्षात्कार में पूर्व प्रधानमंत्री से पूछा गया कि उनकी सरकार पर आरोप लगता है कि 2008 के मुंबई हमले के बाद कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए. इसके जवाब में पूर्व पीएम ने कहा कि ये आरोप बिल्कुल ग़लत हैं. मुंबई हमले के बाद यूपीए की हमारी सरकार ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिल्कुल अलग-थलग कर दिया और चीन जैसे देश की सहमति लेकर 14 दिनों के भीतर हाफ़िज सईद को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किया गया था.

बता दें कि मोदी सरकार लोकसभा चुनाव में राष्ट्रवाद और पुलवामा आतंकी हमले के मुद्दे को जोरशोर से उठा रही है. सेना के नाम पर राजनीति करने को लेकर विपक्षी दलों के साथ-साथ सेना के पूर्व अधिकारियों ने भी मोदी सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला है, लेकिन चुनाव आयोग इस पर कोई संज्ञान नहीं ले रहा है.

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