कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

अॉपरेशन 136 : हिंदुत्व का प्रोपेगैंडा चलाने के लिए राज़ी हुए दैनिक भास्कर के स्टिंग वीडियो से रोक हटी

स्टिंग वीडियो से छवि ख़राब होने के डर से दैनिक भास्कर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डीबी कॉर्प) बीते 24 मई को कोर्ट चला गया और कोर्ट से कोबरापोस्ट की वीडियो सार्वजानिक करने पर रोक लगवा दी।

बीते शुक्रवार, 28 सितम्बर को दिल्ली हाईकोर्ट ने कोबरा पोस्ट की पोल खोलने वाले वीडियो को बैन करने वाले एक आदेश को रद्द कर दिया है। स्टिंग ऑपरेशन करने के लिए मशहूर रही कोबरापोस्ट के इस वीडियो में नामी-गिरामी मीडिया हाउस पैसों के लिए प्रोपेगेंडा करने के लिए तैयार हो गए थे। इस स्टिंग की चपेट में अपने आपको देश का सबसे बड़ा बताने वाला दैनिक भास्कर भी था। स्टिंग वीडियो से छवि ख़राब होने के डर से दैनिक भास्कर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डीबी कॉर्प) बीते 24 मई को कोर्ट चला गया और कोर्ट से कोबरापोस्ट की वीडियो सार्वजानिक करने पर रोक लगवा दी।

अब फैसला कोबरा पोस्ट के हक में आया है। 28 सितम्बर को इस मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस एस रविंद्र भट्ट और जस्टिस एके चावला वाली पीठ ने कहा कि दैनिक भास्कर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डीबी कॉर्प) की याचिका पर केस की सुनवाई के दौरान एकतरफा रोक लगाने का आदेश न्यायसंगत नहीं था। जब तक शुरुआत में ही यह नहीं साबित हो जाता कि अपमानजनक बताई गई वीडियो पूरी तरह झूठी और दुर्भावनापूर्ण है, तब तक एकतरफ़ा होकर बिना किसी कारण के वीडियो पर रोक के आदेश नहीं दिए जा सकते।

इस मामले को पीठ ने दोनों पक्षों के दलीलों के आधार पर अंतरिम राहत देने के प्रश्न पर विचार करने के लिए सिंगल जज बेंच पर भेज दिया है और कहा है कि दैनिक भास्कर को अंतरिम राहत देने वाली याचिका पर दोबारा विचार किया जाएगा। बेंच ने दोनों पक्षों को 3 अक्टूबर को सिंगल जज बेंच के आगे मौजूद रहने के लिए कहा है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक हाईकोर्ट ने कहा, “बेशक न्यूमीडिया, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और इंटरनेट मीडिया की ज़्यादा चुनौतियाँ हैं, लेकिन इसके एवज में लोकतंत्र के लिए ज़रूरी अभिव्यक्ति की आज़ादी के महत्वपूर्ण अधिकार को कम नहीं किया जा सकता। फ्री स्पीच का सही सिद्धांत यही है कि हर तरह की मानहानि या निंदा का दावा या आरोप लगाने वाले बड़े इज्जतदार लोगों और सार्वजनिक संस्थानों के पास किसी तरह की रोक लगवाने के लिए पुख्ता मानक होने चाहिए।”

इस वीडियो में दैनिक भास्कर के अलावा करीब दो दर्जन बड़े मीडिया हाउस पैसे के बदले में हिंदुत्व के प्रोपेगेंडा चलाने के लिए तैयार हो गए थे। इसके साथ-साथ इन मीडिया हाउस ने सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में वोटों के ध्रुवीकरण करवाने वाली ख़बरें दिखाने के लिए भी हामी भरी थी। इस स्टिंग को कोबरा पोस्ट ने ऑपरेशन 136 का नाम दिया था और दो किश्तों में सार्वजनिक किया था।

पहला वीडियो 26 मार्च को जारी किया गया था जिसमें पैसों के बदले सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में प्रोपेगेंडा करने की बात थी। वहीं, दूसरी किश्तजो 26 मई को जारी हुई थी, उसमें पैसों के बदले हिंदुत्व का प्रोपगेंडा करने के लिए मीडिया हाउस राज़ी थे। लेकिन दूसरी वीडियो के सार्वजनिक होने से पहले ही दैनिक भास्कर कोर्ट चला गया था और 24 मई को दिल्ली हाईकोर्ट से स्टिंग वीडियो पर रोक लगवाने में कामयाब हो गया। इसके बाद कोबरापोस्ट ने 26 मई को दैनिक भास्कर वाला पार्ट हटाकर दूसरी किश्त को जारी कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ कोबरापोस्ट ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया और कई वरिष्ठ पत्रकारों ने भी इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बताया था। फिलहाल कोबरापोस्ट के यूट्यूब चैनल पर दैनिक भास्कर के स्टिंग वाली वीडियो भी आ गई है।

यहाँ विडियो देखें।    

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