कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

पीएम मोदी की ‘नमामि गंगे योजना’ धराशायी, 2014-18 के बीच गंगा सबसे ज़्यादा मैली

गंगा 2014 -2018 के बीच उत्तराखंड में गंगा सबसे अधिक प्रदूषित हो गई.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने के बाद गंगा की सफाई के लिए शुरू की गई नमामि गंगे योजना फेल हो गई है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि चार साल के बाद भी गंगा प्रदूषित है. जहां गंगा 2014 -2018 के बीच उत्तराखंड में गंगा सबसे अधिक प्रदूषित हो गई, वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में गंगा 2018 में सबसे ज़्यादा प्रदूषित रही है.

दरअसल, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार ने सत्ता में आते ही गंगा की सफाई को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक बनाया. सरकार ने जल संसाधन मंत्रालय का नाम बदलकर ‘जल संसाधन मंत्रालय, नदी विकास और गंगा कायाकल्प’ कर दिया. उसके बाद पीएम मोदी ने ” नमामि गंगे योजना ” शुरु की. मोदी सरकार ने अपने पहले बजट में 20,000 करोड़ रुपये गंगा की सफाई के लिए रखे. तब से यह पहले से ही कार्यक्रम पर 6,100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुका है. लेकिन जमीनी तस्वीर बदलती नहीं दिख रही. सरकारी प्रयासों से गंगा में पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा.

CPCB के वैज्ञानिकों ने प्रदूषण के बढ़ते क्रम में गंगा के जल की गुणवत्ता को पाँच श्रेणियों – स्वच्छ, मामूली, मध्यम, भारी और गंभीर – में वर्गीकृत किया. उन्होंने 2017-18 में मॉनसून से पहले और बाद में, दो मौसमों में गंगा के विस्तार के साथ 36 स्थानों पर प्रदूषण की मॉनिटरिंग की. उन्होंने इसके बाद इनमें से 23 स्थानों पर पानी की गुणवत्ता की तुलना की, जिसके लिए 2014-15 के आंकड़े भी उपलब्ध थे.

CPCB की रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल राज्यों में पिछले तीन वर्षों (2014-15, 2015-16 और 2017-18) के दौरान किए गए गंगा नदी के जैविक परीक्षण अध्ययन के अनुसार, “औसत जैविक जल गुणवत्ता, औसत रूप से प्रदूषित है.वहीं उत्तराखंड में औसत जैविक जल की गुणवत्ता मामूली से मध्यम प्रदूषण में गिरावट को दर्शाता है.

रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि, उत्तराखंड में 2014-2018 के बीच हरिद्वार के एक स्थान पर पानी की गुणवत्ता में एक डिग्री (मामूली से साफ) में सुधार हुआ, वहीं उसी दौरान दूसरे अन्य स्थान जगदीशपुर में चार डिग्री तक खराब रहा. वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला कि कुल मिलाकर राज्य के भीतर नदी की गुणवत्ता में गिरावट थी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में 2017-18 में गंगा में प्रदूषण का उच्चतम स्तर दर्ज किया गया था, जहां प्री-मानसून अवधि में पानी की गुणवत्ता “गंभीर” पाई गई थी। हालांकि, मानसून के बाद इसमें थोड़ा सुधार हुआ।

बता दें कि वाराणसी लोकसभा सीट से 2014 के आम चुनावों के लिए अपना नामांकन दाखिल करने के समय, मोदी ने गंगा को नमन करते हुए कहा था, न मैं यहां खुद आया हूं, न किसी ने मुझे लाया है, मुझे तो गंगा मां ने बुलाया है. गंगा के प्रति उनकी भक्ति देखकर देश खुश हुआ था.

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