कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

सर्जिकल स्ट्राइक का ज़रुरत से ज़्यादा प्रचार और राजनीतिकरण किया गया है – जनरल डी एस हुड्डा

2016 में सर्जिकल स्ट्राइक कर भारतीय सेना ने ऑपरेशन को अंजाम दिया था.

दो साल पहेल भारतीय सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक पर इस ऑपरेशन से जुड़े लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डी एस हुडा ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक का ज़रुरत से ज़्यादा प्रचार और राजनीतिकरण किया गया है.

एनडीटीवी की ख़बर के अनुसार हुड्डा ने कहा, “मुझे लगता है कि इसका कुछ ज़्यादा ही प्रचार किया गया. सेना का ऑपरेशन महत्वपूर्ण था और हमें ऐसा करना ही था. लेकिन इसका कितना राजनीतिकरण होना चाहिए था और यह कितना सही या गलत है, यह बात राजनेताओं से पूछनी चाहिए.”

उन्होंने कहा, “यदि आप सैन्य परिचालन का राजनीतिकरण शुरू करते हैं, तो यह अच्छा नहीं है. यदि आप एक सफल ऑपरेशन का प्रचार करते हैं, तो सफलता भी इसका बोझ है.”  हुड्डा ने यह भी बताया कि हमले के नियोजन या निष्पादन में कोई भी राजनेता शामिल नहीं था. गौरतलब है कि मोदी सरकार ने इस साल 28-30 सितंबर से सर्जिकल हमलों की दूसरी सालगिरह को याद करने के लिए पूरे देश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए थे. इसलिए पूर्व सेना कमांडर ने यह स्पष्ट किया कि सरकार के अति उत्साही उत्सव और इस मामले के राजनीतिकरण ने फायदे से ज़्यादा नुकसान किया है. 

हुड्डा के बयान पर सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया. उन्होंने कहा, “यह निजी विचार हैं, इसलिए उन पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए. हुड्डा इस ऑपरेशन से जुड़े मुख्य व्यक्तियों में से एक थे. इसलिए मैं उनके शब्दों का काफी सम्मान करता हूं.”

वहीं दूसरी ओर हुड्डा के बयान पर उत्तरी कमांड के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल रनबीर सिंह का कहना है, “सेना के पास जितने भी विकल्प थे, उनमें से सर्जिकल स्ट्राइक एक था. इसका देश पर काफी सकारात्मक असर पड़ा है. हम काफी हद तक आतंकवाद का खात्मा करने के लिए सक्षम हो चुके हैं.”

ज्ञात हो कि 9 सितंबर  2016 को नियंत्रण रेखा (एलओसी) में सर्जिकल स्ट्राइक किया गया था, जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा (सेवानिवृत्त) उत्तरी सेना के कमांडर थे. जिसमें पाकिस्तान स्थित आतंकियों के कई ठिकानों को नष्ट कर दिया गया था.

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