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शर्मनाकः आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने भारत के जीडीपी आकलन पर जताई चिंता, कहा- जीडीपी गणना में समस्या

गीता गोपीनाथ ने कहा, “हम नए आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं. हम भारत में अपने सहकर्मियों से बातचीत कर रहे हैं, जिसके आधार पर हम फैसला लेंगे.”

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने भारत के आर्थिक विकास की दर पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि भारत में जीडीपी आकलन की विधि में अभी भी कुछ समस्याएं हैं.

बिजनेस इनसाइडर की ख़बर के अनुसार गीता गोपीनाथ ने कहा, “हम नए आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं. हम भारत में अपने सहकर्मियों से बातचीत कर रहे हैं, जिसके आधार पर हम फैसला लेंगे.”

गीता गोपीनाथ ने कहा, “भारत के राष्ट्रीय आय खातों के आंकड़ों के आधुनिकीकरण के हिस्से के रूप में 2015 में किए गए संशोधन जरूरी थे, इसलिए उसका निश्चित रूप से स्वागत है. लेकिन फिर भी कुछ समस्याएं हैं जिनका समाधान होना चाहिए. उन्होंने कहा कि वास्तविक जीडीपी के आकलन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अपस्फीतिकारक (डीफ्लैक्टर) को लेकर हमने पहले भी चिंता जाहिर की थी.”

इस बयान से सरकार को झटका लग सकता है क्योंकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के वरिष्ठ अधिकारी लगातार दलीलें देते रहे हैं कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों को विश्व बैंक और आईएमएफ जैसे वैश्विक संगठनों ने स्वीकार किया है.

ग़ौरतलब है कि इससे पहले 108 विशेषज्ञों समेत भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन बेरोज़गारी और विकास दर के आंकड़ों पर संदेह व्यक्त कर चुके है. उनका आरोप है कि सरकार असुविधाजनक आंकड़ों को दबा रही है.

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