कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का निधन

मनोहर पर्रिकर लंबे समय से बीमार थे.

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का रविवार को उनके निजी आवास पर निधन हो गया. वह 63 वर्ष के थे. चार बार के मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री पर्रिकर फरवरी 2018 से ही अग्नाशय संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे. पिछले एक साल से बीमार चल रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता का स्वास्थ्य दो दिन पहले बहुत बिगड़ गया था.

सूत्रों ने बताया कि पूर्व रक्षा मंत्री पर्रिकर शनिवार देर रात से ही जीवनरक्षक प्रणाली पर थे. राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई..भाषा को बताया कि मुख्यमंत्री का निधन रविवार शाम छह बजकर चालीस मिनट पर हुआ. पर्रिकर के परिवार में दो पुत्र और उनका परिवार है.

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक के तौर पर शुरुआत कर गोवा के मुख्यमंत्री और देश के रक्षा मंत्री बनने वाले पर्रिकर की छवि हमेशा ही बहुत सरल और सामान्य व्यक्ति की रही. वह सर्वस्वीकार्य नेता थे. ना सिर्फ भाजपा बल्कि दूसरे दलों के लोग भी उनका मान-सम्मान करते थे. उन्होंने गोवा में भाजपा को मजबूत आधार प्रदान किया. लंबे समय तक कांग्रेस का गढ़ रहने वाले गोवा में क्षेत्रीय संगठनों की पकड़ के बावजूद भाजपा उनके कारण मजबूत हुई.

मध्यमवर्गिय परिवार में 13 दिसंबर, 1955 में जन्मे पर्रिकर ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक के रूप में करियर शुरू किया. यहां तक कि आईआईटी बंबई से स्नातक करने के बाद भी वह संघ से जुड़े रहे.

सक्रिय राजनीति में पर्रिकर का पदार्पण 1994 में पणजी सीट से भाजपा टिकट पर चुनाव जीतने के साथ हुआ. वह 2014 से 2017 तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कैबिनेट में रक्षा मंत्री रहे. केन्द्र सरकार ने उनके निधन पर सोमवार को राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट किया है, ‘‘गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के निधन की सूचना पाकर शोकाकुल हूं.’’ उन्होंने कहा कि पर्रिकर बेहद साहस और सम्मान के साथ अपनी बीमारी से लड़े. उन्होंने लिखा है कि सार्वजनिक जीवन में वह ईमानदारी और समर्पण की मिसाल हैं और गोवा और भारत की जनता के लिए उनके काम को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा.

पर्रिकर के निधन पर शोक जताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट किया है, ‘‘श्री मनोहर पर्रिकर बेमिसाल नेता थे. एक सच्चे देशभक्त और असाधारण प्रशासक थे, सभी उनका सम्मान करते थे. देश के प्रति उनकी निस्वार्थ सेवा पीढ़ियों तक याद रखी जाएगी. उनके निधन से बहुत दुखी हूं. उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदनाएं. शांति.’’

मोदी ने कहा कि जब पर्रिकर रक्षा मंत्री थे तो भारत ने कई फैसले दिए जिसने देश की सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाया, स्वदेशी रक्षा उत्पादन बढ़ाया और पूर्व सैनिकों के जीवन को बेहतर बनाया. उन्होंने कहा, ‘‘यह उनका मधुरभाषी व्यक्तित्व और मिलनसार स्वभाव था कि वह वर्षों तक राज्य के पसंदीदा नेता रहे. उनकी जन समर्थक नीतियों ने गोवा को प्रगति की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया.’’

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने रविवार को कहा कि भारत ने एक सच्चा देशभक्त खो दिया जिसका पूरा जीवन राष्ट्र और सिद्धांतों को समर्पित था. शाह ने कहा कि पर्रिकर ने दिखाया कि कैसे भाजपा का एक कार्यकर्ता ‘‘उसके सबसे कठिन समय में भी, राष्ट्र सर्वप्रथम, फिर पार्टी और स्वयं को अंत में रखने के सिद्धांत पर अटल रहता है.’’

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा कि सशस्त्र बलों को ताकतवर और आधुनिक बनाने में उनका योगदान अद्वितीय है. उन्होंने कहा कि पूरी भाजपा पर्रिकर के परिवार के साथ है. पर्रिकर को निष्कपट, ईमानदार और संवेदनशील राजनीतिक कार्यकर्ता बताते हुए सीतारमण ने कहा कि ‘‘मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है.’’

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘मनोहर पर्रिकर नहीं रहे. निष्कपट, ईमानदार और संवेदनशील राजनीतिक कार्यकर्ता. वह सरल और जमीन से जुड़े थे, मैंने पर्रिकर से बहुत कुछ सीखा है. रक्षा मंत्री के तौर पर सशस्त्र बलों को आधुनिक और ताकतवर बनाने में उनका योगदान अद्वितीय है.’’

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया है, ‘‘गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के निधन की सूचना से मैं बहुत दुखी हूं. वह एक साल तक पूरे साहस से अपनी बीमारी से लड़ते रहे. दलगत राजनीति से इतर सभी उनका मान-सम्मान करते थे और वह गोवा के सबसे लोकप्रिय बेटों में से एक थे. दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजन के साथ हैं.’’

तमाम केन्द्रीय मंत्रियों, कांग्रेस नेताओं और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी पर्रिकर के निधन पर शोक व्यक्त किया है.

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