कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

ग्राउंड रिपोर्ट: बेगूसराय: ज़मीनी विवाद को स्वराज्य मैग द्वारा दिए गए साम्प्रदायिक रंग को नकारते नूरपुर गांव के निवासी

10 जून को हिन्दू परिवार ने एक मुस्लिम परिवार के सदस्यों पर बलात्कार की कोशिश और घर बेचने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया था.

“सोमवार, 10 जून की रात मैं, मेरी मां और मेरी बहन आंगन में सो रहे थे. रात के करीब 1 बजे तीन लोग मेरे घर में घुसे. तोड़फोड़ किया. फिर एक आदमी ने मेरे कनपटी पर पिस्तौल रख दिया. दूसरा आदमी मेरी मां के कपड़े फाड़ने लगा और तीसरा आदमी मेरी बहन के साथ जबरदस्ती करने लगा. मेरी मां के कपड़े उतार कर उसका बलात्कार करने की कोशिश की गई. बहन ने उसके साथ छेड़छाड़ कर रहे आदमी को धक्का मारा, जिससे उसका पिस्तौल गिर गया. फिर थोड़ी देर बाद वो लोग भाग गए.” ये बातें 16 साल के राजीव कुमार* बता रहे हैं.

राजीव का परिवार बेगूसराय के बरौनी रिफाइनरी थाना क्षेत्र के नूरपुर गांव में रहता है. यह गांव मुस्लिम बहुल है.

बीते दिनों बगल के एक मुस्लिम युवक लड्डू आलम सहित दो अन्य अज्ञात लोगों ने राजीव कुमार* के घर पर धावा बोला और उनकी मां-बहन के साथ कथित तौर पर बलात्कार की कोशिश की. इस ख़बर को कुछ मीडिया चैनलों ने सांप्रदायिक स्वरूप देकर चलाया. स्वराज्यमैग ने लिखा कि बेगूसराय के हिन्दू परिवार मुसलमानों की भीड़ ने हमला बोला है, जिससे हिन्दू परिवार अपना घर बेचकर उस गांव से भागने पर मजबूर हो रहा है. लेकिन, न्यूज़सेंट्रल24×7 ने ग्राउंड पर जाकर जब इस घटना की सच्चाई जानी तो मामला कुछ और निकला. यह मामला सांप्रदायिक नहीं बल्कि दो व्यक्तियों के बीच ज़मीनी विवाद को लेकर जन्मा है.

क्या है मामला

45 वर्षीय विभा देवी* बताती हैं, “लगभग एक महीना पहले (1 मई को ) मो. फिरोज आलम के बेटे लड्डू आलम ने मेरे साथ छेड़खानी की कोशिश की थी. इसकी शिकायत हमने बरौनी रिफाइनरी सहायक थाने में की, लेकिन पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया और कहा कि सामाजिक स्तर पर इसे सुलझा लिया जाए. यह मामला यही पर रूक गया. फिर बीते 10-11 जून की देर रात 1 बजे अपने बच्चों के साथ सो रही थीं. तभी तीन लोगों ने मेरा और मेरी बेटी का बलात्कार की कोशिश करने की. हमने शोर मचाया लेकिन अगल-बगल का कोई हमें देखने भी नहीं आया. ऐसे समाज से क्या उम्मीद करूंगी.”

विभा देवी* आगे कहती हैं, “इस घटना के बाद रात के दो बजे हमलोग रिफाइनरी थाने में शिकायत कराने गए. लेकिन वहां सिर्फ मुंशी मौजूद था. हमारी शिकायत नहीं सुनी गई. सुबह 5 बजे पुलिस आई और एफ़आईआर दर्ज कर लड्डू आलम को गिरफ़्तार करके ले गई. पुलिस का रवैया काफी लचर रहा है, इसलिए हमें पूरा विश्वास है कि कुछ दिन बाद लड्डू आलम को छोड़ दिया जाएगा.”

विभा देवी* का कहना है कि फिरोज आलम का परिवार धमकी दे रहा है कि 16 लाख रुपए में अपना घर हमसे बेच दो, नहीं तो यहां रहने नहीं देंगे.

आरोपी के परिवार का क्या है पक्ष

न्यूज़सेंट्रल24×7 ने आरोपी लड्डू आलम के घर पर लोगों से बात करने की कोशिश की. परिवार ने ज्यादा बोलने से इनकार किया. लड्डू की मां राजदान ख़ातून का कहना है, “हम सभी लोग एक रिश्तेदार के यहां शादी में गए थे. घर में मेरा बेटा और एकाध लोग और थे. आरोप लगाने वाली महिला के साथ ज़मीन का विवाद है और बलात्कार की कोशिश का आरोप ग़लत है. पुलिस ग़लत तरीके से मेरे बेटे को उठाकर ले गई है.”

सांप्रदायिकता को लेकर पीड़ित परिवार और गांव के लोगों का अलग अलग है मत

बलात्कार की कोशिश करने का आरोप लगाने वाली महिला विभा देवी* का मानना है कि उनका घर मुसलमानों से घिरा हुआ है और वह यहां अकेली हैं इसलिए मुसलमान उन्हें डरा रहे हैं और यहां से भगाने में लगे हैं. उनके बेटे राजीव* का कहना है कि हमें मुसलमानों की ज्यादतियों के कारण अपना घर बेचकर जाना पड़ सकता है. विभा देवी* का कहना है कि बजरंग दल के लोगों ने उनका बहुत साथ दिया है. जब उनकी बात पुलिस और प्रशासन ने नहीं सुनी तो बजरंग दल के लोगों के प्रयास के कारण पुलिस ने इस मामले में सख़्ती दिखाई.

इधर, नूरपुर गांव के अन्य लोग इस घटना को दूसरे एंगल से देखते हैं. नूरपुर गांव के रहने वाले योगेन्द्र दास बताते हैं कि उस रोज हुआ झगड़ा हिन्दू-मुसलमान नहीं बल्कि ज़मीन की वजह से हुआ था. “पहले विभा देवी* (पीड़िता) के घर के बगल में एक माली का घर था. माली ने अपना घर फिरोज आलम (बलात्कार की कोशिश के आरोपी लड्डू आलम के पिता) को बेच दिया. पहले इस ज़मीन को विभा देवी* खरीदना चाहती थी, उन्हें ज़मीन नहीं मिली इसी कारण आए दिन दोनों लोगों में झगड़ा होता रहता है.”

(पीड़ित हिन्दू परिवार का निर्माणाधीन घर. बगल में बांस लगी ज़मीन  को ही दोनों पक्षों के बीच विवाद का कारण बताया जाता है.)

नूरपुर गांव भले ही मुस्लिम बहुल है. लेकिन, यहां हिन्दुओं के भी कई घर हैं. कई दुकानें और सैलून अभी भी हिन्दू परिवार के लोग यहां चला रहे हैं. गांव के हिन्दुओं का भी मानना है कि यह मामला सांप्रदायिक नहीं है. दो लोगों के बीच की लड़ाई है, जिसमें धर्म को घुसाने का कोई मतलब नहीं है. योगेन्द्र दास बताते हैं, “आज तक कभी हिन्दू-मुसलमान वाली बात नहीं हुई. सभी लोग मिलकर रहते हैं. यहां सांप्रदायिकता नहीं है.” इसी तरह की बात सैलून चलाने वाले मिंटू ठाकुर और राजीव ठाकुर बताते हैं.

योगेन्द्र दास (फोटो- अभिनव प्रकाश)

हिन्दूवादी संगठनों के ख़ौफ़ में गांव के लोग

नूरपुर के लोग इस घटना में बाहरी लोगों के हस्तक्षेप से नाराज़ हैं. उनका कहना है कि बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद के लोग समूह बनाकर आते हैं और मुसलमानों को धमकाते हैं. नूरपुर में किराने की दुकान चलाने वाले मो. नियाद अहमद बताते हैं, “बजरंग दल के लोग गांव में आकर मुसलमानों को मारने की बात करते हैं. हमारा गांव बहुत शांतिप्रिय है, लेकिन हमें इस तरह के बाहरी तत्वों से डर लगता है.”

अब तक क्या हुई कार्रवाई

कथित बलात्कार की कोशिश करने के तीन आरोपियों में से एक (लड्डू आलम) को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है. आरोपी लड्डू आलम के परिवार ने दूसरे पक्ष के नाबालिग राजीव कुमार* पर भी मारपीट करने का आरोप लगाकर मुक़दमा दर्ज करा दिया है. इधर, ड्यूटी में लापरवाही बरतने को लेकर बरौनी रिफाइनरी थानाध्यक्ष अजीत कुमार को निलंबित कर दिया गया है. अब विवेक भारती को इस थाने की जिम्मेदारी दी गई है.

न्यूज़सेंट्रल24×7 से बातचीत में थानाध्यक्ष विवेक भारती ने बताया कि नूरपुर का मामला सांप्रदायिक किस्म का नहीं है. पीड़ित परिवार की सुरक्षा के लिए वहां पुलिस बल की तैनाती की गई है. हालांकि न्यूज़सेंट्रल24×7 ने जब उस गांव का दौरा किया, तब वहां कोई पुलिस बल तैनात नहीं था. इसके जवाब में उन्होंने कहा कि दस मिनट के लिए स्नान करने के लिए वहां से जवान हटे थे.

जदयू के बेगूसराय जिला उपाध्यक्ष मो. जावेद आलम का कहना है कि हम सभी लोग दोषी को सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं तथा जनता दल यूनाइटेड किसी भी अपराध को अपराधी के संप्रदाय से जोड़ने के पक्ष में नहीं है.

*पहचान गोपनीय रखने के उद्देश्य से नाम बदले गए हैं.

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