कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

ग्राउंड रिपोर्टः हवाई है मोदी की देशभक्ति, बेगूसराय का बेटा है आशा की किरण: न्यूज़सेंट्रल24×7 की चुनावी पड़ताल

बेगूसराय की लड़ाई "बाहरी नेता" बनाम "घर का बेटा" के मुद्दे पर लड़ी जा रही है.

“बेगूसराय में बहुत सालों बाद लोगों को उम्मीद का सूरज उभरता नज़र आ रहा है” ये कहना है बिहट में कन्हैया कुमार से मिलने आए 43 वर्षीय स्वदेश कुमार का. बेगूसराय में इस तरह की बातें बोलने वाले स्वदेश अकेले नहीं हैं. यह चर्चा लगभग हर दूसरे-तीसरे आदमी की जुबानी सुनी जा सकती है.

बिहार का बेगूसराय 2019 के लोकसभा चुनाव के लोकसभा चुनाव के सबसे दिलचस्प मुकाबलों में से एक है. इसका कारण है लगातार बीजेपी के निशाने पर रहे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार जो सीपीआई के प्रत्याशी के तौर पर अपने जिले में ग़रीबी, भुखमरी और बेरोज़गारी से आज़ादी मांग रहे हैं. यहां से भाजपा ने गिरिराज सिंह को मैदान में उतारा है, जो कि कुछ दिन पहले तक नवादा सीट से टिकट ना मिलने के कारण अपनी ही पार्टी से नाराज़ थे. ये बात बेगूसराय के लोगों को भी शायद समझ में आ रही है. “वो बाहर से आए, बड़े बाबू के नेता हैं. कन्हैया ग़रीब का बेटा है, ग़रीब का नेता है” ये कहना है कि 31 वर्षीय प्रकाश कुमार का.

महागठबंधन ने राजद के तनवीर हसन को टिकट दिया है. इन तीनों उम्मीदवारों के बीच मुकाबले में बेगूसराय की आम जनता इस बार अलग ढंग से सोच रही है. कन्हैया कुमार इस लड़ाई को त्रिकाणीय नहीं मानते. उनका कहना है कि इस लड़ाई में एक तरफ़ जहां नफ़रत और झूठ है, वही दूसरी तरफ़ सच्चाई और असली मुद्दे हैं.

न्यूज़सेंट्रल24X7  ने बेगूसराय के विभिन्न विधानसभा क्षेत्र के लोगों से मुलाकात की. टेघरा बाजार के मो. शकील बताते हैं कि वे मजदूरी करते हैं . उनका कहना है कि मोदी जी पहाड़ तोड़ने जैसी घोषणाएं करते हैं, लेकिन जमीन पर कुछ भी दिखाई नहीं देता. शकील मोदी जी को जुमलेबाज बताते हैं. शकील का कहना है कि तनवीर हसन कितने बार आए और चले गए इन पर हमें विश्वास नहीं है, इसलिए हमने कन्हैया को वोट देने का फ़ैसला किया है.

न्यूज़सेन्ट्रल से बातचीत करते बेगूसराय के मतदाता (साभार-अभिनव प्रकाश)

टेघरा बाजार पर ही मजदूरी करने वाले अब्बास आलम बताते हैं कि मोदी जी ने बेरोज़गारी को बढ़ा दिया, इन पांच सालों में सेना के जवान सबसे अधिक मरे हैं. अब्बास ने कहा कि एयर स्ट्राइक करके मोदी जी अब अपना वाहवाही खुद ही कर रहे हैं. अब्बास का मानना है कि कन्हैया में नया जोश है और वो सच बोलता है.

बेगूसराय को केंद्र सरकार ने 2016 में देश के 250 सबसे पिछड़े जिलों की श्रेणी में रखा था. बेरोज़गारी के कारण जिले में पलायन की समस्या भयावह है. कन्हैया कुमार ने अपने चुनावी वादों में रोज़गार के साधन बढ़ाने की अक्सर बातें की है.

फुलवरिया के मनोज कुमार वेल्डर का काम करते हैं. मनोज मानते हैं कि मोदी जी जब पीएम रहे तो देश की आर्थिक स्थिति ख़राब हुई और नोटबंदी से ग़रीब जनता को बहुत नुकसान हुआ. इनका मानना है कि हालांकि कन्हैया नवयुवक है, लेकिन वो ज़मीन के सच्चे मुद्दों की बात करता है. मनोज ने बताया कि उन्होंने अभी तक फ़ैसला नहीं किया है कि वो किसको वोट देंगे.

फुलवरिया के ही मो. गौहर बताते हैं कि उनकी नज़र में गिरिराज सिंह और कन्हैया कुमार, दो ही मजबूत प्रत्याशी हैं. गौहर का कहना है कि गिरिराज सिंह बाहर से आए हैं और कोई भी जनता अपने ही बेटे को अपना सांसद बनाना चाहेगी. गौहर का कहना है कि बेगूसराय के मुस्लिम दिल से कन्हैया पर भरोसा करती है. उन्होंने कन्हैया के कई सारे विडियो देखे हैं, उन्हें विश्वास है कि कन्हैया देश के विकास के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं और बेगूसराय को एक अच्छा और पढ़ा लिखा सांसद कन्हैया के रूप में मिलने वाला है. गौहर का कहना है कि तनवीर हसन की पार्टी जात-पात की राजनीति करती है और वे इससे कई बार धोखा खा चुके हैं.

जहां एक तरफ़ गिरिराज सिंह ने ऐसे गांवों में प्रचार ही नहीं किया जहां मुस्लिम मतदाता ज्यादा संख्या में हैं. वही दूसरी तरफ़ तनवीर हसन भी चुनाव से पहले मुस्लिम और पिछड़े वर्ग का भरोसा जीतने में असमर्थ रहे हैं.

दरियापुर के मनोज कुमार बताते हैं कि कन्हैया कुमार एजुकेटेड हैं और युवा हैं और वे उनकी आवाज़ संसद तक ले जा सकते हैं. मनोज के बगल में बैठे एक बुजुर्ग का कहना है कि ‘भाजपा का काम सिर्फ जुबानी होता है. सिर्फ वादे और दावे किए जाते हैं और जमीन पर कुछ भी दिखाई नहीं देता’. यहां बैठे अन्य लोग कहते हैं कि भाजपा मंदिर-मस्जिद की राजनीति करती है. कई लोग मानते हैं कि मोदी जी का काम अच्छा रहा है, लेकिन बेगूसराय के उम्मीदवार मोदीजी नहीं, बल्कि सबको पाकिस्तान भेजने वाले गिरिराज सिंह हैं. कन्हैया पर देशद्रोह का झूठा इल्ज़ाम यहां के लोगों को काफ़ी ठेस पहुंचाई है. सरकार के प्रति गुस्से का एक कारण यह भी है. मनोज कुमार कहते हैं कि ‘गिरिराज सिंह बाहरी आदमी हैं और दंगा कराते हैं, हमलोग घर के बेटे को वोट देंगे.’

कन्हैया कुमार अपने भाषण में इस बात को दोहराते हैं. वे गिरिराज को बाहरी बताते हुए इस चुनाव को बेगूसराय के सम्मान की लड़ाई बताते हैं.

बरौनी जंक्शन में टेम्पू चलाने वाले आलम अली कहते हैं कि मोदी जी ने हिन्दुस्तान का अमन-चैन और शांति को ख़त्म कर दिया है. अब हिन्दुस्तान बदलाव चाह रहा है. हम मानते हैं कि मोदी जी अच्छी योजनाएं लाते हैं, लेकिन उनकी योजना सिर्फ पेपर पर रहती है, जमीन पर कुछ नहीं दिखता.” वे बताते हैं, “बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन अगले साल एक और टेम्पो खरीदकर उनको भी चलाने के लिए देना पड़ेगा.’

इसी दुकान पर खड़े बुजुर्ग ललन सिंह का कहना है, “मीडिया ने कन्हैया को बदनाम किया है. ग़लत ख़बरें चलाई जाती है. प्रियंका गांधी के बारे में अब फ़ेक न्यूज़ फैलाई जा रही है. यह कहिए कि कुछ पत्रकार हैं, जिनकी वज़ह से ख़बर की सच्चाई हम जान पाते हैं. 75 प्रतिशत मीडिया बिक चुका है’. कन्हैया के बारे में ललन सिंह कहते हैं, “कन्हैया मुफ़लिसी की जिंदगी जी कर हक की लड़ाई लड़ रहा है. सच्चाई की लड़ाई लड़ता है कन्हैया, फेकू नहीं है कन्हैया.’

कन्हैया कुमार की क्राउड फंडिंग की अपील से कुछ ही दिन में 70 लाख जमा हो गए हैं. देशभर से प्रचार में मदद करने लोग बेगूसराय आए हैं. कन्हैया की नामांकन रैली ने बेगूसराय की सड़कें जाम कर दी थीं. जाने माने कलाकार और हस्तियां कन्हैया के लिए प्रचार करने पहुंची, लेकिन मुकाबला आसान नहीं है. भाजपा के गिरिराज सिंह भूमिहार और सवर्ण वोटरों के साथ-साथ नीतीश कुमार के पिछड़े वोटरों के भरोसे हैं. वहीं तनवीर हसन इस क्षेत्र के पुराने कद्दावर नेता हैं. 2014 के मोदी लहर में तनवीर हसन बेगूसराय से दूसरे नंबर के प्रत्याशी के तौर पर उभरे थे. दोनों के ही समर्थक धर्म, जात और फेक न्यूज़ का इस्तेमाल करने से नहीं चूक रहे हैं. ऐसे में कन्हैया अपनी लोकप्रियता और जमीनी मुद्दों के सहारे वामपंथ के पुराने गढ़ को फिर से जिंदा करने की कोशिश में हैं. कन्हैया अपने प्रचार भाषण में कहते हैं “बेगूसराय में देश की भविष्यवाणी होने वाली है.” अगर ऐसा होता है तो बिहार में वामपंथ के सूरज के फिर से उभरने की उम्मीद है.

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