कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

स्टेचू ऑफ़ यूनिटी: विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा बनी गुजरात के किसानों के लिए जल संकट की वजह

राज्य में जल संकट इतना बढ़ गया है कि किसान नहर से पानी चोरी करने को मजबूर हैं.

मोदी सरकार ने बड़े ही ज़ोर-शोर से सरदार पटेल की प्रतिमा, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, का अनावरण किया था. लेकिन अब सरदार पटेल की यह प्रतिमा कच्छ के किसानों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है. सरदार पटेल की प्रतिमा के आस-पास बोटिंग करने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इंदिरा सागर बांध से छोड़ा गया अतिरिक्त पानी का कटाव सरदार सरोवर बांध की ओर कर दिया गया है. इसकी वजह से कच्छ के किसानों को पानी के संकट सामना करना पड़ा रहा है.

आजतक की ख़बर के अनुसार सरदार सरोवर बांध से सिंचाई के लिए निकलने वाली नहरों का कार्य अभी तक पूरा नहीं किया गया है. इसलिए कच्छ के किसानों को पर्याप्त मात्रा में सिंचाई के लिए जल नहीं मिल रहा है. इसकी वजह से पानी की मांग को लेकर जनता आंदोलन करने पर उतारू है. इलाके में हालात इस कदर ख़राब हैं कि नर्मदा लाओकच्छ बचाओ के पोस्टरों के साथ भुजलखपत और कांडला समेत कई इलाकों में पानी के लिए प्रदर्शन किया जा रहा है.

नर्मदा नहर का निर्माण कार्य पूरा न होने की स्थिति में पानी की समस्या ज़्यादा बढ़ गई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इंदिरा सागर बांध से छोड़ा गया पानी का कटाव सरदार सरोवर बांध की ओर कर दिया गया है. इस वजह से स्थानीय लोगों को खेती के लिए पानी नहीं मिल रहा है. जल संकट का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि गुजरात के विभिन्न इलाकों में नर्मदा नहर से पानी चोरी की घटनाएं हो रही हैं.

उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने बताया कि नर्मदा नहर से गैरकानूनी रूप से पानी लेने वालों के ख़िलाफ़ प्रशासन कड़ी कार्रवाई कर रहा है और अब तक 37 लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर भी दर्ज की गई है. किसान नहर में मोटर लगाकर खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए मजबूर हैं क्योंकि नहर में पानी का स्तर सामान्य न होने की वजह से पानी को खेतों तक पहुंचाने के लिए मोटर का उपयोग करना पड़ता है.

किसान संगठनों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि सरकार जल्द कोई क़दम नहीं उठाएगी तो पानी के लिए पूरे राज्य में आंदोलन होगा. कच्छ में मानसून में केवल 26.21 फीसदी की बारिश हुई थी जिसकी वजह से क्षेत्र को सिंचाई और पानी के संकट का सामना करना पड़ रहा है. ज्ञात हो कि राज्य सरकार ने पहले ही कच्छ क्षेत्र को अकालग्रस्त घोषित कर दिया है.

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