कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

सरकार की नीतियों के विरोध में हजारों आदिवासियों ने ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ के पास निकाला पैदल मार्च

आदिवासियों ने सरदार सरोवर बांध के लिए गुजरात सरकार द्वारा सालों पहले अधिगृहित की गई ज़मीनों को भी लौटाने की मांग की.

बीते सोमवार को गुजरात के नर्मदा ज़िले में ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ के पास प्रस्तावित विकास के विरोध में हजारों आदिवासियों ने मार्च निकाला. यह पैदल मार्च  केवड़िया से शुरू होकर 21 किमी दूर राजपिपला पर समाप्त हुआ. इस मार्च में ‘भारतीय ट्राइबल पार्टी’ के विधायक महेश वसावा ने भी हिस्सा लिया.

वसावा ने आरोप लगाया कि आदिवासी नेताओं और ग्रामीणों को ‘अवैध भूमि अधिगृहण’ के ख़िलाफ़ आवाज उठाने के लिए पुलिस द्वारा परेशान किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के ज़मीन का उचित मुआवजा नहीं मिलने पर मना करने के बाद अब सरकार कोई भी मुआवजा दिए बिना अधिक जमीन लेने की योजना बना रही है.

182 मीटर ऊंची प्रतिमा के आसपास प्रस्तावित विकास के नाम पर आदिवासियों को हटाये जाने का विरोध करते हुए प्रदर्शनकारियों ने सरदार सरोवर बांध के लिए गुजरात सरकार द्वारा 50 साल पहले अधिगृहित की गई उनकी ज़मीनों को भी लौटाने की मांग की.

आदिवासी नेता शांतिकर्म वसावा ने कहा कि वे विकास के ख़िलाफ़ नहीं हैं, लेकिन प्रतिमा के आसपास इस तथाकथित विकास के नाम पर जिस तरह आदिवासियों को हटाकर उनकी ज़मीन बिना सहमति के अधिगृहित की जा रही है, वे उसके खिलाफ़ हैं.

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल अक्टूबर को सरदार सरोवर बांध के नजदीक  सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा का अनावरण किया था जिसे लेकर कई स्थानीय आदिवासियों ने विरोध भी जताया था.

पीटीआई इनपुट्स पर आधारित

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