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गुजरात में सामने आया 3,40,00,00,000 रुपए का पानी सप्लाई घोटाला: पूर्व CM सुरेश मेहता ने ऑडिट रिपोर्ट के हवाले से लगाया आरोप

जल बोर्ड के वार्षिक खातों और लेखा परीक्षक की रिपोर्ट (2017-18) का हवाला देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री मेहता ने बेहिसाब खर्च और पानी के बिलों की मात्रा पर सवाल खड़े किए हैं.

गुजरात सरकार के एक उपक्रम जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड में वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है. यहां लगभग 340 करोड़ रुपए के खर्च का लेखा-जोखा इन्स्टिच्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के निर्देशों के अनुसार नहीं किया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री सुरेश मेहता ने राज्य की भाजपा सरकार पर करोड़ों रुपए के घोटाले का आरोप लगाया है. जल बोर्ड के वार्षिक खातों और लेखा परीक्षक की रिपोर्ट (2017-18) का हवाला देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री मेहता ने बेहिसाब खर्च और पानी के बिलों की मात्रा पर सवाल खड़े किए हैं. फरवरी 2019 में गुजरात विधानसभा में सरकार ने इन खर्चों को सार्वजनिक किया था.

प्रेस को संबोधित करते हुए सुरेश मेहता ने राज्य सरकार से सवाल पूछा, “340 करोड़ रुपए के पानी के बिल का क्या हुआ? क्या गुजरात जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड को भेजी गई पानी सूख गई?”

2017-18 के साल तक गुजरात वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने गुजरात जल आपूर्ति बोर्ड को पानी सप्लाई के लिए 502 करोड़ रुपए का बिल थमाया है. इनमें से 163 करोड़ रुपए के बिल को गुजरात जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड ने भुगतान करने के लिए मंजूर भी कर लिया है.

लोकशाही बचाओ अभियान के सदस्य सुरेश मेहता का कहना है कि एक साल के भीतर ही इन घोटालों को अंजाम दिया गया है. सुरेश मेहता ने इस बात पर जोर देकर कहा कि एक स्वतंत्र लेखा रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि जल आपूर्ति बोर्ड ने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया द्वारा तय नियमों का उल्लंघन किया है.

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