कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

राफेल विमान सौदे पर बोले एचएएल के पूर्व अध्यक्ष- मोदी सरकार की ग़लतियों की वजह से भारत में नहीं हो रहा राफेल का निर्माण

पूर्व अध्यक्ष ने कहा, सरकार इस समझौते की कॉपी को सार्वजनिक नहीं कर रही है क्योंकि ऐसा करने पर उसकी सच्चाई जनता के सामने आ जाएगी।

हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के पूर्व अध्यक्ष टी सुवर्णा राजू ने कहा है कि भारत में भी राफेल विमानों का निर्माण हो सकता था, अगर मोदी सरकार ने दसॉल्ट एविएशन के साथ सौदेबाजी की बजाय वर्क शेयर कॉन्ट्रैक्ट किया होता। उन्होंने कहा कि एचएएल ने फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट के साथ समझौता किया था। इस समझौते की कॉपी सरकार को भेजी गई थी। उन्होंने कहा कि सरकार इस समझौते की कॉपी को सार्वजनिक नहीं कर रही है क्योंकि ऐसा करने पर उसकी सच्चाई जनता के सामने आ जाएगी।

अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जब एचएएल वायुसेना के इस्तेमाल में आनेवाली 25 टन की सुखोई-30 बना सकती है, तो राफेल का निर्माण कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। यह पहला मौका है जब किसी सरकारी विमान कंपनी की तरफ से खुले तौर पर किसी डील के बारे में बात की गई है।

राजू ने कहा – हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और दसॉल्ट ने राफेल विमान के लिए वर्क शेयर कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किया था। इसके बाद इस कॉन्ट्रैक्ट की फाइल सरकार को भेजी गई थी। इस फाइल के सार्वजनिक होते ही कई सच जनता के सामने आ जाएंगे।

उनके मुताबिक एचएएल भारत में बनने वाली राफेल विमानों की गारंटी लेने को तैयार था। भारत में निर्माण होने पर राफेल विमानों के खर्चे के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमें विमान के हर पीस पर होने वाले खर्च की बजाय उसके पूरे उम्र पर होने वाले खर्च पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक समय के बाद भारत में बनने वाला राफेल विमान सस्ता ही पड़ता और सबसे बड़ी बात कि भारत इस मामले में स्वावलंबी बन जाता। उन्होंने कहा कि अगर फ्रांस अभी 100 घंटे में 100 विमानों का निर्माण कर सकता है, तो भारत 200 घंटे लेकर भी अपनी पहला विमान बना सकता है।

राफेल विमान सौदे को लेकर प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस लगातार सवाल उठाती रही है। कांग्रेस का कहना है कि उसने फ्रांस से प्रति राफेल विमान 526 करोड़ रुपए का सौदा तय किया था, जिसे भाजपा सरकार ने तीन गुना बढ़ाकर 1,670 करोड़ कर दिया है। इसके साथ कांग्रेस का कहना है कि पिछले समझौते में फ्रांस ने भारत को राफेल बनाने की तकनीक देने की बात भी कही थी, जो मौजूदा समझौते से गायब है।

गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को राफेल सौदे पर जमकर हमला बोला। अपने एक ट्वीट में  राहुल गांधी ने कहा कि हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के पूर्व अध्यक्ष ने रक्षा मंत्री के झूठ का पर्दाफाश कर दिया है, इसलिए उन्हें अब अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

गौरतलब है कि बीते 18 सितम्बर को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि राफेल विमान सौदे में हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की अनदेखी किए जाने के लिए यूपीए की पिछली सरकार जिम्मेदार है।

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