कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

जब परसाई ने लिखा- फासिस्टवाद पूंजीवाद का निकृष्टम रूप

अमेरिका फासिस्ट तरीके अपनाता है. फासिस्ट शासकों को समर्थन देता है. लोकतन्त्र का नाश करता है. तभी रीगन ने जर्मनी के फासिस्टों को श्रदांजलि दी.

दूसरे महायुद्ध के पहले से जर्मन फासीवाद को ब्रिटेन, फ़्रांस अमेरिका बढ़ावा दे रहे थे. वे चाहते थे कि नाजी जर्मन रूस से भिड़े और उसे नष्ट कर दे. इस तरह पूरा यूरोप साम्यवाद से बचे. अमेरिका बेहद युद्ध सामग्री जर्मनी को बेचता रहा. युद्ध छिड़ने के बाद भी जर्मनी और फ़्रांस ने नाज़ी जर्मनी से म्युनिख समझौता किया और उसे पूर्वी यूरोप के देश सौंप दिए. वे चाहते थे कि पूर्वी यूरोप लेकर फासिस्ट सेनाएं रूस में घुस जाये इसे नष्ट कर दे या दोनों नष्ट हो जाए. अमेरिका का भी यही रुख था. बात यह है कि फासिस्टवाद भी पूंजीवाद का निकृष्टम रूप है.

जब जर्मनी इन फ्रांस ले लिया और ब्रिटेन पर बमबारी शुरू की, तब ब्रिटेन , फ़्रांस अमेरिका को लोकतंत्र, स्वाधीनता और मानव गरिमा की याद आयी. तब रूस, ब्रिटेन और अमेरिका ने मित्र राष्ट्रों के गुट बनाकर जर्मनी के खिलाफ लड़ाई की. असली घमासान लड़ाई रूस ने 4 साल तक लड़ी. ब्रिटेन और फ़्रांस ने अपनी फ़ौजें तब यूरोप की मध्यभूमि पर उतरी जब देख लिया कि रूस अकेला ही कुछ महीनों में जर्मनी को हरा देगा और पूरे यूरोप में उसका प्रुभुत्व हो जाएगा. फिर जब रूस फासिस्टों से लड़ रहा था तब अमेरिका और ब्रिटेन उससे धोखा कर रहे थे. सही यह है कि अगर रूस की जीत म होती तो दुनिया फासिस्टों के कब्जे में आ जाती.

अमेरिका फासिस्ट तरीके अपनाता है. फासिस्ट शासकों को समर्थन देता है. लोकतन्त्र का नाश करता है. तभी रीगन ने जर्मनी के फासिस्टों को श्रदांजलि दी. दक्षिण अफ्रीका में नस्लवादी फासिस्ट सरकार है जिसे ब्रिटेन और अमेरिका दोनो समर्थन दे रहे हैं. अंधे साम्यवाद विरोध के उन्माद में अमेरिका फासिस्ट हो सकता है.

पूछो परसाई से ( पेज 210)

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