कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

जब गोडसे फांसी पर चढ़ा तो उसके हाथ में तिरंगा नहीं भगवा झंडा था, होंठो पर संघ की प्रार्थना

महात्मा गांधी तक चिट्ठी पहुंचे- परसाई का एक लेख

यह सभी जानते हैं कि गोडसे फांसी पर चढ़ा, तब उसके हाथ में भगवा ध्वज था और होंठों पर संघ की प्रार्थना- नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि. पर यही बात बताने वाला गांधीवादी गाइड दामोदरन नौकरी से निकाल दिया गया है. उसे आपके मोरारजी भाई ने नहीं बचाया.

मोरारजी सत्य पर अटल रहते हैं. इस समय उनके लिए सत्य है प्रधानमंत्री बने रहना. इस सत्य की उन्हें रक्षा करनी है. इस सत्य की रक्षा के लिए जनसंघ का सहयोग ज़रूरी है. इसलिए वे यह झूठ नहीं कहेंगे कि गोडसे आर.एस.एस. का था. वे सत्यवादी हैं.

तो अब महात्माजी, जो कुछ उम्मीद है, बाला साहेब देवरस से है. वे जो करेंगे, वही आपके लिए होगा. वैसे काम चालू हो गया है. गोडसे को भगतसिंह का दर्जा देने की कोशिश चल रही है. गोडसे ने हिंदू राष्ट्र के विरोधी गांधी को मारा था.

गोडसे जब भगतसिंह की तरह राष्ट्रीय हीरो हो जायेगा, तब तीस जनवरी का क्या होगा? अभी तक यह ‘गांधी निर्वाण दिवस’ है, आगे ‘गोडसे गौरव दिवस’ हो जायेगा. इस दिन कोई राजघाट नहीं जायेगा. फिर भी आपको याद ज़रूर किया जायेगा.

जब तीस जनवरी को गोडसे की जय-जयकार होगी, तब यह तो बताना ही पड़ेगा कि उसने कौन-सा महान कर्म किया था. बताया जायेगा कि इस दिन उस वीर ने गांधी को मार डाला था. तो आप गोडसे के बहाने याद किये जायेंगे. अभी तक गोडसे को आपके बहाने याद किया जाता था.

एक महान पुरुष के हाथ से मरने का कितना फायदा मिलेगा आपको? लोग पूछेंगे- यह गांधी कौन था? जवाब मिलेगा- वही जिसे गोडसे ने मारा था.

#महात्मागांधीतकचिट्टीपहुँचे

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