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हरियाणा: पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति में 3.53 करोड़ का घोटाला, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के छात्रों की हक़मारी

विभाग में पात्र छात्रों को छात्रवृति भेजने के बजाए निलंबित अधिकारियों ने आधार नंबर में जालसाजी कर अपने चहेते छात्रों की डिटेल की सूची बैंक को भेज दी.

हरियाणा अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने एससी/बीसी छात्रों की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति में कथित रूप से 3.53 करोड़ के गड़बड़ी के आरोप में विभाग के मुख्य अधिकारी के साथ चार अन्य कर्मचारियों को  निलंबित कर दिया गया है.

विभाग में पात्र छात्रों को छात्रवृति भेजने के बजाए निलंबित अधिकारियों ने आधार नंबर में जालसाजी कर अपने चहेते छात्रों की डिटेल की सूची बैंक को भेज दी. हालांकि आगे खुलासा यह भी हो सकता है कि ये लाभार्थी छात्र किस जाति समुदाय से संबंधित हैं.

बैंक से बदले हुए आधार नंबर की सूचना मिलते ही आईएएस अधिकारी व विभाग के निदेशक संजीव वर्मा तत्काल हरकत में आए और जांच कमेटी गठित कर आरोपी कर्मचारियों पर कार्रवाई करते हुए उनकी गिरफ्तारी की गई.

अमर उजाला के मुताबिक़ इस मामले में विभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कुलजीत सिंह के अलावा चार अन्य कर्मचारी मुख्यालय के क्लर्क संजीव कुमार सहायक बिलेंद्र कुमार, लेखाकार सुरेंद्र कुमार और रामधारी सिंह को दोषी पाते हुए उनके पद से निलंबित कर दिया गया है.

रिपोर्ट के अनुसार पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति में गबन का यह खुलासा सोनीपत ज़िले का है. 13 फरवरी 2019 को ज़िला कल्याण अधिकारी सोनीपत ने 170 छात्रों को 1 करोड़ 71 लाख 67 हज़ार 800 रूपये और 18 फरवरी 2019 को 182 छात्रों को 1 करोड़ 81 लाख 42 हज़ार 700 रूपये की छात्रवृति राशि की मंजूरी का मामला मुख्यालय में भेजा था.

इसके बाद मुख्यालय स्तर पर 382 छात्रों की फाइल को ऑनलाइन भुगतान के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव के पास मंजूरी के लिए भेज दी गई. अतिरिक्त सचिव की मंजूरी मिलने के बाद छात्रवृति भेजने की प्रक्रिया में लगे कर्मचारियों ने पात्र छात्रों के बजाए अपने चहेते दूसरे छात्रों का आधार नंबर जोड़ दिया और यह सूची बैंक के पास भेज दी गयी.

बैंक की नज़र बदले हुए आधार कार्ड पर पड़ गई और इसकी सूचना ज़िला पुलिस को दी गई. वहीं, विभाग के बड़े अधिकारी पीएमएस में पहले भी इस तरह के घोटाले से इनकार नहीं कर रहे हैं.अमर उजाला के मुताबिक 344 छात्रों की छात्रवृति आधार नंबर बदल कर बैंक के पास भुगतान के लिए भेजी गयी थी.

वहीं, इस मामले में निलंबित कर्मचारियों को विभाग द्वारा जरूरी भत्ते तभी दी जाएगी जब वह यह प्रमाण पत्र देंगे कि वे लोग कहीं दूसरी जगह नौकरी या निजी बिजनेस नहीं कर रहे हैं. साथ ही सुरेंद्र कुमार, बिलेंद्र कुमार, रामधारी सिंह व संजीव कुमार को पदाधिकारियों के अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ने का आदेश दिया गया है.

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