कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

मनोहरलाल खट्टर के हरियाणा रोडवेज़ को प्राइवेट बनाने के सपने को पूरा नहीं होने देंगे कर्मचारी!

मज़ेदार बात यह है कि हरियाणा के विभिन्न परिवहन मन्त्री रोडवेज की बेहतरीन यात्री सेवा के कारण राष्ट्रपति से क़रीब 7 बार पदक भी प्राप्त कर चुके हैं। फिर भी मंत्री जी और खट्टर जी सार्वजनिक परिवहन को निजी हाथों में सौपने के लिए तैयार खड़े हैं।

पिछले कई दिनों से हरियाणा की सार्वजनिक बस सेवा यानी हरियाणा रोडवेज़ ठप चल रही है। गाड़ियां ज़िलों के बसअड्डों पर धूल फांक रही हैं। बसअड्डों पर पुलिस का पहरा है और बसों के ड्राइवर, कंडक्टर और हरियाणा रोडवेज़ के कर्मचारी ग़ायब हैं। हरियाणा रोडवेज़ के कर्मचारियों के ग़ायब होने का कारण है उनकी लंबे समय से चल रही हड़ताल। ये कर्मचारी पिछले लंबे समय से हरियाणा रोडवेज़ के निजीकरण के खिलाफ़ अपनी नौकरी तक को संकट में डालकर हड़ताल कर रहे हैं।

क्यों कर रहे हैं हड़ताल? 

हरियाणा की मौजूदा मनोहरलाल खट्टर सरकार 720 प्राइवेट बसों को किलोमीटर स्कीम के तहत परमिट जारी कर रही है, जिसका विरोध करते हुए हरियाणा रोडवेज़ के कर्मचारी काम छोड़कर आंदोलन करने पर मजबूर हैं। मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर का कहना है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सुधारने के लिए सरकार ने ये फैसला लिया है और अपने इस फैसले को किसी भी कीमत पर नहीं बदलेंगे। सरकार रोडवेज़ कर्मचारियों की हर मांग मानने को तैयार है पर यह मांग बिल्कुल नहीं।

वहीं हरियाणा रोडवेज़ के हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि इस समय रोडवेज़ के बेड़े में हज़ारों नयी बसों को शामिल करने की आवश्यकता है। रोडवेज़ के बारे में सरकार यह झूठ फैला रही है कि रोडवेज़ घाटे का सौदा है। सरकार रोडवेज़ विभाग को बदनाम कर रही है, जबकि रोडवेज़ सरकारी खज़ाने को भरने में अपना सहयोग देती है।

सरकारी की नीति के ख़िलाफ़ विरोध करते रोडवेज के कर्मचारी, फ़ोटो-जनसंघर्ष मंच हरियाणा

 

हरियाणा रोडवेज़ की हालत क्या है? 

साल 1993। हरियाणा की जनसंख्या लगभग 1 करोड़ थी। तब हरियाणा में 3500 सरकारी बसें दौड़ रही थीं और इस महकमे में 24 हज़ार कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे थे। समय बीता तो हरियाणा की आबादी तो बढ़ी मगर बसों की संख्या नहीं। इस समय हरियाणा की आबादी लगभग 3 करोड़ है। केन्द्र सरकार के ही नियम के अनुसार 1 लाख की आबादी के ऊपर 60 सार्वजनिक बसों की सुविधा होनी चाहिए। इस लिहाज़ से हरियाणा की क़रीब 3 करोड़ की आबादी के लिए हरियाणा सरकार के पास कम से कम 18 हज़ार बसें होनी चाहिए थीं। लेकिन अभी सिर्फ 4200 बसें ही प्रदेश की आबादी को ढोती हैं। इतना ही नहीं हरियाणा रोडवेज़ डिपार्टमेंट में कर्मचारियों की संख्या भी 24 हज़ार से घटकर 19 हज़ार ही रह गयी है। पिछले 25 सालों के अन्दर चाहे किसी भी पार्टी की सरकार रही हो, हरियाणा रोडवेज़ की सार्वजनिक बस सेवा की हालत को सुधारने के कोई विशेष प्रयास देखने को नहीं मिले हैं।

हरियाणा रोडवेज में आबादी के हिसाब से बहुत कम बसें हैं।

 

हड़ताल तुड़वाने के लिए सरकारी दमन चरम पर!

कर्मचारियों की  हड़ताल तुड़वाने के लिए सरकार ने अब दमन का रास्ता अपना लिया है। अलग-अलग रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अब तक करीब 500 कर्मचारियों को जेलों में डाला जा चुका है। इतना ही नहीं सरकार ने हड़ताल में शामिल प्रोबेशन पीरियड में काम कर रहे ड्राइवरों, आउटसोर्सिंग पोलिसी के तहत ठेके पर लगे ड्राइवरों और क्लर्कों को भी निकालने का फैसला लिया है। सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों से खुन्नस निकालने के लिए जल्दबाज़ी में आउटसोर्सिंग पोलिसी-॥ के तहत 930 परिचालकों व 500 चालकों की नई भर्ती के लिए विज्ञापन भी जारी कर दिया है, जिसमें बहुत सारी ख़ामियां हैं।

फ़ोटो साभार- युवा हरियाणा

सरकार खाली पड़ी बसों को पुलिस के जवानों और होम गार्डों से एक रु. प्रति किमी के हिसाब से बसें चलवा रही है। इस मामले को लेकर परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार का कहना है कि 720 प्राइवेट बसों के मुद्दे के अलावा सरकार हर मुद्दे पर बात करने के लिए तैयार है। कर्मचारी भी ध्यान से सुन लें, जो भी हड़ताल में भाग लेगा। उस पर एस्मा के तहत जरूर कार्यवाही होगी। कर्मचारियों की ब्लैकमेलिंग इस सरकार के आगे नहीं चलेगी।

सार्वजनिक बस सेवाओं को बढ़ावा देने का मतलब है नए रोज़गार और बेहतर सुविधाएं

सार्वजनिक बस सेवा की एक बस 6 युवाओं को रोज़गार देती है। केंद्र सरकार के नियम के हिसाब से यदि सरकार 14 हज़ार नई बसें खरीदती है तो क़रीब 85 हज़ार युवाओं को रोज़गार मिलेगा और जनता को अच्छी बस सुविधा। रोडवेज़ 22 श्रेणियों को यात्रा करने में किराया छूट की सुविधा प्रदान करती है जिसमें बुजुर्गों, बीमारों, छात्रों को यात्रा सेवा में छूट शामिल है तथा प्रदेश की करीब 80 हज़ार छात्राओं को हरियाणा रोडवेज़ निःशुल्क बस पास की सुविधा देती है। इन सब सुविधाओं का लाभ निश्चित तौर पर सरकारी बस सेवा में ही मिलता है, निजी बसों में नहीं।

कर्मचारी सरकार के आगे झुकने वाले नहीं हैं! 

अपनी नौकरी संकट में डालकर निजीकरण के खिलाफ लड़ रहे कर्मचारी पीछे हटने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हैं। करीब 500 कर्मचारियों को जेल में डालने और बहुतेरे कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के बाद भी कर्मचारी हड़ताल वापस नहीं ले रहे हैं। अपनी हड़ताल के मकसद के बारे में रोडवेज़ कर्मचारी यूनियन के नेता समेर सिवाच का कहना है,

“निजीकरण के खिलाफ़ जनता को साझा संघर्ष करने की ज़रुरत अब आन पड़ी है। सरकार एक-एक करके हर सार्वजनिक क्षेत्र को निजी हाथों में सौंप रही है। शिक्षा-स्वास्थ्य तथा अन्य ज़रूरी सुविधाएँ यदि सरकार हमें नहीं दे सकती तो फिर वह है ही किसलिए? यदि उसका काम मुट्ठी भर धन्नासेठों को ही फ़ायदा पहुँचाना है तो फिर जनता से बेशुमार टैक्स किसलिए निचोड़ा जाता है। रोडवेज़ का निजीकरण जनता के हितों पर सरकार का सीधा हमला है। इसे हम बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम खट्टर के हरियाणा रोडवेज़ को प्राइवेट बनाने वाले सपने को कभी पूरा नहीं होने देंगे।”

रोडवेज़ कर्मचारियों की हड़ताल के समर्थन में बिजली, जनस्वास्थ्य, शिक्षा, आशा वर्करों सहित कई दूसरी कर्मचारी यूनियन भी मैदान में उतरी हैं। उतरें भी क्यों न, हरियाणा देश के उन गिने-चुने राज्यों में है जहां सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सरकार संभाले हुए है। अगर सरकार निजीकरण लागू करती है तो लोगों और कर्मचारी दोनों को घाटा ही होने वाला है। यह कोई छुपा हुआ तथ्य नहीं है कि निजी बस कंपनियों वाले अपने मुनाफे के हिसाब से काम करेंगे, जनता और कर्मचारियों के हित के लिए नहीं।

यहां मज़ेदार बात यह है कि हरियाणा के विभिन्न परिवहन मन्त्री रोडवेज़ की बेहतरीन यात्री सेवा के कारण राष्ट्रपति से क़रीब 7 बार पदक भी प्राप्त कर चुके हैं। फिर भी मंत्री जी और खट्टर जी सार्वजनिक परिवहन को निजी हाथों में सौपने के लिए तैयार खड़े हैं।

You can also read NewsCentral24x7 in English.Click here
+