कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

भाजपा सांसद हेमा मालिनी के गोद लिए गांव में न शौचालय न अस्पताल, सांसद आदर्श ग्राम योजना का बुरा हाल

पांच महीने पहले गांव में अस्पताल बनाया गया था। लेकिन, इलाज के लिए कोई डॉक्टर या नर्स नहीं रखा गया है। इसे कभी-कभी ही खोला जाता है। हमें इलाज के लिए मथुरा जाना पड़ता है।

मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही जोरशोर से सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत की थी। इसमें कहा गया कि हर सांसद कम से कम एक गांव को गोद लेकर उसे मॉडल के तौर पर विकसित करेंगे। लेकिन जमीन पर देखें तो इस योजना की हवा निकल चुकी है। आए दिन इसकी सच्चाई सामने आती रहती है। ताज़ा मामले में भाजपा सांसद हेमा मालिनी द्वारा गोद लिए गए गांव की असलियत सामने आई है। हेमा मालिनी के निर्वाचन क्षेत्र मथुरा का रावल गांव चार साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है।

क्विंट की रिपोर्ट के अनुसार, हेमा मालिनी गांव के बुनियादी जरूरतों को मुहैया कराने में भी विफल रही हैं। एक ग्रामीण ने कहा, “हेमा मालिनी के गांव का दौरा करते समय सड़क साफ हो जाता है और गंदगी हटा दी जाती है। जबकि और दिनों, यह गंदा रहता है।”  गांव के निवासी रवि कांत का कहना है कि एस.ए.जी.वाई के तहत गांव में कम से कम 40 सौर बत्ती लगाई गई थीं। हालांकि, उनमें से कोई भी अब काम नहीं करती है।

गांव में सड़कों का निर्माण बहुत पहले शुरू हुआ था, लेकिन उसका काम भी बीच में ही ठप हो गया। ग्रामीणों के मुताबिक, अब उनकी समस्याएं बढ़ गई हैं। जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। कुछ शौचालय बनाए गए थे।  लेकिन उनमें से अधिकतर नहीं इस्तेमाल करने लायक नहीं हैं। जिससे गांव की महिलाओं को खुले में शौच करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

 इसी प्रकार भाजपा सांसद द्वारा गांव में लगाया गया आर.ओ भी काम नहीं करता है। इसलिए, गांव के लोग अभी भी स्वच्छ पानी के लिए टंकी पर भरोसा करते हैं। विडंबना यह है कि हेमा मालिनी एक आर.ओ जल शोधक की ब्रांड एंबेसडर हैं।

गांव के जूनियर स्कूल में बिजली नहीं है, जिससे बच्चों को गर्मी में बंद कक्षाओं में बैठना पड़ता है। एक नया प्राथमिक विद्यालय बनाया गया था, लेकिन यहां भी बेसिक सुविधाएं नदारद हैं।

स्कूल के एक छात्र कमाल खान ने कहा, “यहां कोई बिजली कनेक्शन नहीं है। सांसद हेमा मालिनी ने हमसे मुलाकात की है। हमने उनसे अपनी समस्याओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा था कि जल्दी ही बिजली का कनेक्शन दिया जाएगा, लेकिन कुछ भी नहीं हुआ।”

वहीं गांव के निवासी चंद्र भूषण अस्पताल की कुव्यवस्था से खिन्न हैं। उनका कहना है कि पांच महीने पहले गांव में अस्पताल बनाया गया था। लेकिन, इलाज के लिए कोई डॉक्टर या नर्स नहीं रखा गया है। इसे कभी-कभी ही खोला जाता है। हमें इलाज के लिए मथुरा जाना पड़ता है। रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने दावा किया था कि एस.ए.जी.वाई के कारण देश में कोई भी बीमारू  क्षेत्र नहीं छोड़ा गया है। सांसद आदर्श ग्राम योजना के माध्यम से गांवों का विकास हो रहा है।

मथुरा का गांव रावल सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत चुना गया अकेला पिछड़ा गांव नहीं है। पिछले महीने एक रिपोर्ट में भाजपा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह द्वारा गोद लिए गए गांव की सच्चाई भी सामने आई थी। यहां के लोगों को भी तमाम तरह की बुनियादी सुविधाएं मयस्सर नहीं थी।

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