कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के सैकड़ों छात्र प्रशासन की संघी मानसिकता के खिलाफ धरने पर

यौन उत्पीड़न की भी कई शिकायतें आईं सामने, बीते 27 अगस्त से अपनी मांगों को लेकर छात्र कर रहे हैं प्रदर्शन

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित हिदायतुल्लाह विधि विश्वविद्यालय की छात्राओं ने 27 अगस्त की रात से आन्दोलन की शुरुआत की है। आन्दोलन की पहली रात कोई 400 छात्र-छात्राएं इकठ्ठा हुए। हफ़्ते भर में ये संख्या बढ़कर अब 1000 के पार पहुँच गई है। “हमें चाहिए आज़ादी”, “तख़्त बदल दो ताज बदल दो बेईमानों का राज बदल दो” का नारा लगाते हुए ये छात्र मोबाईल के टॉर्च को मशाल की तरह इस्तेमाल करते हैं और पोस्टर हाथ में लिए मार्च निकालते हैं।

 

लड़कियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार

27 अगस्त की आधी रात से धरने पर बैठी छत्राओं का आरोप है कि विश्वविद्यालय परिसर के अन्दर और ख़ासकर हॉस्टल में लड़कियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जाता है मसलन लड़कों को रात 10:30 के बाद भी हॉस्टल में आने की छूट मिल जाती है। लेकिन हायतौबा मच जाती है अगर लड़कियां 9 बजे के बाद बाहर नज़र भी आईं तो।

दरअसल हमारे देश में नियम-कानून तो भरपूर लिखे हुए हैं पर उनको लागू करवाने वाली संस्थाएं अपनी मर्ज़ी के मुताबिक काम करती हैं। इनके नियम-कानून सामाजिक मान्यताओं के आधार पर बनते हैं, संविधान के आधार पर नहीं। हिदायतुल्लाह विश्वविद्यालय का यह मामला कुछ इसी तरह का है। विश्वविद्यालय का नियम यह कहता है कि शाम 7 बजे तक कैम्पस के अन्दर आ जाना अनिवार्य है और रात 10 बजे तक हॉस्टल के अन्दर चले जाना ज़रूरी है। कागज़ों पर तो यह नियम लड़के-लड़की दोनों के लिए एक सामान ही है पर जैसा कि हमारे समाज में एक जबरन नियम है कि लड़कियों को रात में बाहर नहीं जाना चाहिए, उसी तरह यहां विश्वविद्यालय में भी लड़कियों को 9 बजे के बाद हॉस्टल से बाहर निकलने की मनाही है।

 

यूं छिड़ा विवाद

सोमवार की रात विश्वविद्यालय की लड़कियों का गुस्सा तब फूटा जब हॉस्टल की वार्डन ने 9 बजे के बाद आई एक छात्रा को हॉस्टल में प्रवेश देने से मना कर दिया। छात्रा ने फ़ोन से अपने बाकी साथियों को इसकी इत्तला की और कुछ ही देर में लगभग 400 से 500 छात्र-छात्राएं कैम्पस में इकठ्ठा होकर इस भेदभाव और जबरन के नियम का विरोध करने लगे। ये विरोध एकाएक नहीं उत्पन्न हुआ है। हॉस्टल में लड़कियों के रहने की जगह में साफ़-सफ़ाई तक ढंग से नहीं की जाती है। कभी किसी की तबीयत बिगड़ जाए तो दवा के लिए दिन निकलने की राह देखनी पड़ती है। कोई लड़की रात 9 बजे के बाद आए तो अव्वल उसे डांटा जाएगा, दुनियादारी सिखाई जाएगी, फिर जबरन उसके कमरे की तलाशी ली जाएगी और उसके घर वालों को फ़ोन पर नसीहत झाड़ी जाएगी। एक छात्रा ने उसकी ग़ैरहाज़िरी में उसके कमरे की तलाशी लिए जाने की भी बात कही। ऐसी कई समस्याओं के लिए पिछले सालभर से यहां के छात्र आवेदन दिए जा रहे हैं पर कार्यवाही कभी कुछ नहीं हुई।

 

क्या मांग रहे हैं ये छात्र

  • पिछलेकुलपति जिनकी नियुक्ति को रद्द कर दिया गया है उनकी जगह नए कुलपति तुरन्त नियुक्त किये जाएं, तब तक किसी काबिल व्यक्ति को इस पद की ज़िम्मेदारी दी जाए।
  • नए कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी एवं न्यायपूर्ण हो।
  • छात्रों को कैम्पस में हर समय हर जगह आने-जाने की आज़ादी हो।
  • रात 10:30 बजे के बाद कैम्पस के बाहर न जाने का नियम बदला जाए।
  • लाइब्रेरी रात 10 बजे बन्द हो जाती है। इस समय को बढ़ाकर सुबह 3 तक कर दिया जाए।
  • हॉस्टल में वार्डन के पद की ज़िम्मेदारी विश्वविद्यालय के किसी शिक्षक को नहीं दी जानी चाहिए इसके लिए अलग नियुक्ति की जाए।
  • निर्धारित नियमों के आधार पर रजिस्ट्रार और फैकल्टी की भर्ती की जाए।
  • समीक्षा आयोग द्वारा की गई सिफ़ारिशों को सार्वजनिक किया जाए।
  • नियमित रूप से छात्रों का फ़ीडबैक लेने की व्यवस्था बनाई जाए।
  • एकेडेमिक,एकज़ेक्युटिव काउन्सिल की बैठकों का ब्यौरा दिया जाए।
  • एकेडेमिक,एकज़ेक्युटिव काउन्सिल में छात्रों के दो प्रतिनिधि हों।
  • सभी मौजूदा नियमों को मिलाकर स्टूडेंट मैनुअल बनाया जाए।
  • यूजीसी के मुताबिक दीक्षांत समारोह हर साल आयोजित हों।

मज़े की बात है कि इस विश्वविद्यालय के नियम के अनुसार 65 वर्ष से ज़्यादा उम्र के व्यक्ति को कुलपति के पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता है परन्तु कुलपति साहब ने अपनी कुर्सी बचाने के चक्कर में आतंरिक स्तर पर इस नियम को ख़ुद ही बदल डाला था और उम्र की ये सीमा बढ़ाकर 70 वर्ष कर दी थी।

 

मामला इन मांगो से कहीं ज़्यादा गंभीर है

भारत के ग्यारहवें मुख्य न्यायधीश हिदायतुल्लाह के नाम से चल रही इस लॉ यूनिवर्सिटी में लड़कियों के साथ शिक्षकों द्वारा किये जा रहे यौन उत्पीड़न की घटनाओं के बारे में सुनकर आश्चर्य होता है। यूनिवर्सिटी के अन्दर हो रही यौन उत्पीड़न की यह घटनाएं किसी अफ़वाह का हिस्सा नहीं हैं। हमसे बातचीत के दौरान कई छात्र-छात्राओं ने अपने अनुभव हमसे साझा किए।

  • शिक्षकों ने छात्राओं को नाच कर दिखाने के बदले अटेंडेंस देने की बात कही है।
  • “तुम बहुत सुन्दर हो सामने आ कर बैठो ताकि पढ़ाने में हमारा मन लगा रहे”ऐसी अभद्र बातें छात्राओं से कही गई हैं।
  • तुम ज़्यादा सवाल मत पूछा करो वरना भुगतोगी।
  • तुम जहां भी जाती हो मेरी नज़र तुम पर ही रहती है।

ऐसी घटनाएं कहीं भी हों छोटी नहीं कही जा सकतीं पर किसी नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में ऐसी घटना होना और लगातार होना, मामले को विशेष बना देता है। हिदायतुल्लाह लॉ यूनिवर्सिटी की छात्राओं को 180 पन्नों की कॉपी देकर अपने अनुभव लिखने को कहा गया, देखते ही देखते पूरी कॉपी भर गई हर पन्ने पर यौन उत्पीडन का कोई न कोई मामला दर्ज हुआ। गूगल पर एक फॉर्म जारी कर के भूतपूर्व छात्रों से भी उनके अनुभव लिखने को कहा गया और वहां भी 78 पन्नों की ऐसी ही शिकायतें दर्ज हुईं।

छात्रों ने कहा कि वे इन मामलों की लगातार शिकायत करते रहे हैं पर कभी कोई कार्रवाई नहीं की गई। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि आज तक एक भी यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

 

राष्ट्र के प्रति ये सरकारों की साज़िश है

देश के लगभग सभी शिक्षा संस्थानों में छात्रों के अधिकारों के हो रहे हनन पर क्या अब तक राज्य या केंद्र की सरकारों की नज़र नहीं गई है? यदि नहीं गई है तो ये एक घोर लापरवाही है और यदि नज़र होने के बावजूद ये सब हो रहा है तो ये एक जघन्य अपराध है। इसे राष्ट्र के प्रति सरकारों की साज़िश कहा जा सकता है। ये तस्वीर हर कीमत पर बदलनी ही चाहिए। दमनकारी सरकार सबसे पहले शिक्षण संस्थानों को ही अपना निशाना बनाती है ताकि सवाल करने वाली जमात ही न पनप पाए। ऐसे संस्थान बन्द कर दिए जाते हैं और जिन्हें बन्द न कर पाएं उन्हें देशद्रोही करार दिया जाता है। काबिल-ए-तारीफ़ हैं हिदायतुल्लाह लॉ यूनिवर्सिटी के ये छात्र-छात्राएं जो अपनी लड़ाई पुरज़ोर तरीके से लड़ रहे हैं।

 

कोई कुछ भी कहे कहने देना

अब ये छात्राएं शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बैठी हैं। इनका कहना है कि वे तब तक संघर्ष करती रहेंगी जब तक यहां बराबरी नहीं ले आएंगी। छत्तीसगढ़ में लड़कियां बहुतायत में इस भेदभाव का शिकार बनती हैं। हम उम्मीद करते हैं कि रायपुर के हिदायतुल्लाह विधि विध्वाविद्यालय की लड़कियों की ये लड़ाई पूरे छतीसगढ़ की लड़कियों को पिंजरा तोड़ने के लिए प्रेरित करेगी। ये आन्दोलन एक सतत प्रक्रिया है। अपने अधिकारों के लिए एक के बाद एक कई लड़ाईयां लड़नी होंगी। कई लान्छन लगेंगे, टांग खींचने वाले भी बहुतेरे मिलेंगे। हमारा बस इतना ही कहना है कि कोई कुछ भी कहे कहने देना, तुम अपनी राह पर बने रहना।

 

अनुज श्रीवास्तव छत्तीसगढ़ से हैं और पेशे से स्वतन्त्र पत्रकार हैं।

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