कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

राजनीतिक छत्रछाया में गोरक्षा के नाम हो रहा क़त्लेआम, पुलिस पर आरोपियों को छोड़ने का बन रहा दबाव: ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दशक में 90% धर्म आधारित घृणा अपराध 2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद हुए थे.

भारत में कथित गोरक्षा के नाम पर पिछले तीन सालों में लगभग 44 लोगों की हत्या कर दी गई. अमेरिकी संस्था ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ की रिपोर्ट के अनुसार मई 2015 से लेकर दिसंबर 2018 तक इस प्रकार के हमले में 44 लोगों की जान चली गई तो 280 लोग घायल हो गए.  रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि गो-रक्षकों के हाथों मारे गए 44 लोगों में से 36 मुस्लिम समुदाय के लोग थे.

जनसत्ता की ख़बर के अनुसार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई वाली पार्टी भाजपा, गाय की रक्षा की नीतियों का समर्थन करती है. भाजपा के ही कई नेता इस प्रकार के हमले को जायज़ ठहराते नज़र आते हैं. गोरक्षकों के नाम पर पुलिस आरोपियों पर कार्रवाई करने से बचती है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि भाजपा की सांप्रदायिक बयानबाज़ियों की वज़ह से बीफ़ खाने के विरोध में हिंसक अभियान शुरू हुए हैं. इस तरह की हिंसक घटनाओं से मुस्लिम सहित दलित और आदिवासी भी पीड़ित हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दशक में 90% धर्म आधारित घृणा अपराध 2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद हुए थे.

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ साल 2018 में ही गाय से संबंधित हिंसा पर अपनी चुप्पी तोड़ी थी. उन्होंने कहा कि “मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मॉब लिंचिंग एक अपराध है, चाहे उसके पीछे कोई भी मकसद हो. हालांकि, एचआरडब्ल्यू के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी राजनीतिक रूप से प्रेरित बढ़ती मुस्लिम असुरक्षा के दावों को खारिज करते हुए दिखाई दिए.

इसके बावजूद इस प्रकार की घटनाओं में कमी नहीं आई है. हाल ही में उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर में गोरक्षा के नाम पर हुई हिंसा में एक पुलिस इंस्पेक्टर की जान चली गई थी.

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