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सिख दंगे पर फ़ैसले सुनाते हुए कोर्ट ने कहा- 2002 में गुजरात में भी अल्पसंख्यकों पर हुए थे हमले

कोर्ट ने कहा कि सिख विरोधी दंगों की तरह 2002 के दंगे में भी अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया.

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को 1984 के सिख विरोधी दंगों में हत्या की साजिश रचने का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई. यह फ़ैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ ने 2002 के गुजरात दंगों का भी जिक्र किया. कोर्ट ने कहा कि दंगे में शामिल अपराधी राजनीतिक संरक्षण की वजह से बच जाते हैं. जिन्हें सजा देना कानूनी प्रक्रिया के लिए एक चुनौती है.

जनसत्ता की ख़बर के अनुसार कोर्ट ने 1993 के मुंबई दंगे, 2002 के गुजरात दंगे, 2008 का कंधमाल हिंसा और 2013 के मुजफ़्फ़रनगर हिंसा में अल्पसंख्यकों पर हमले की निंदा की. उन्होंने कहा कि सिख विरोधी दंगे में उसी प्रकार बड़े पैमाने में हत्या की गई, जैसे अन्य दंगों में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया. अपराधियों ने राजनीतिक संरक्षण का उपयोग किया और बच निकले. इन अपराधियों को सजा देना हमारी कानूनी प्रक्रिया के लिए एक बड़ी चुनौती है.

ज्ञात हो कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या उनके अंगरक्षकों ने कर दी थी. उसके बाद दिल्ली के राज नगर इलाके में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे थे. इन दंगों में सिख परिवार के 5 लोगों की हत्या कर दी गई थी. इस मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को हत्या का दोषी पाया गया. अदालत ने सज्जन कुमार को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है.

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