कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

1947-2019: भारतीय वायुसेना ने कब-कब दुश्मनों के छक्के छुड़ाए, यहां पढ़ें

1971 में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को दो टुकड़ों में बांट दिया और लगभग 90,000 पाकिस्तानी सैनिकों को युद्धबंदी बनाकर घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया.

पुलवामा आतंकी हमले के बाद पूरे देश में जो आवाज एक सुर में उठ रही थी, वो यह थी कि एक बार फिर से पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सर्जिकल स्ट्राइक किया जाए. आतंकी हमले का बदला लिया जाए. लेकिन, पूर्व में हुए सर्जिकल स्ट्राइक को फिर से दोहराने के ख़तरे थे. रक्षा विशेषज्ञों का मानना था कि सर्जिकल स्ट्राइक के लिए इस्तेमाल होने वाली स्ट्रेटजी से अब पाकिस्तानी सेना भी परिचित हो गई है. इसलिए फिर से यह कदम उठाना घातक सिद्ध होगी.

तमाम अवरोधों के बीच आज सुबह जब लोगों ने सर्जिकल स्ट्राइक की जगह ‘एयर स्ट्राइक’ जैसे नए शब्द को पहली बार सुना. दरअसल, भारतीय वायु सेना ने आज तड़के ही पाकिस्तान में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया. पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पल रहे आतंकियों के ख़िलाफ़ सर्जिकल स्ट्राइक के जगह एयर स्ट्राइक कर दिया गया.

आज जब पूरा देश भारतीय वायुसेना के विराट शौर्य के दर्शन से गौरान्वित महसूस कर रहा है, तो हमें अपने बहादुर वायुसेना के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में जाने लेना चाहिए. हमें यह भी जान लेना चाहिए कि भारतीय वायुसेना ने किन जंगों में किस तरह दुश्मनों के छक्के छुड़ाए.

भारत का अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान से चार तो चीन से एक युद्ध हो चुका है. चीन के साथ हुई 1962 की लड़ाई में भारत ने अपने वायु सेना का इस्तेमाल ही नहीं किया. कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उस वक्त भारत ने अपने वायु सेना का इस्तेमाल किया रहता तो नतीजे कुछ अलग होते.

भारतीय वायुसेना की स्थापना 8 अक्टूबर, 1936 ई. में की गई थी. आज़ादी के पहले इसे रॉयल इंडियन एयरफोर्स के नाम से जाना जाता था. नाम के साथ ‘रॉयल’ शब्द का नाम तब जुड़ा जब द्वितीय विश्वयुद्ध में भारतीय वायुसेना ने बर्मा में बढ़ती जापानी सेना को रोकने में अंग्रेज़ों की मदद की. इस योगदान के लिए 1945 में राजा जॉर्ज VI ने इसे रॉयल की उपाधि दी.

आज़ादी के बाद भारत से बंटकर एक नया देश पाकिस्तान बना. उद्भव के साथ ही कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के साथ जंग छिड़ गई . इस जंग में पाकिस्तानी समर्थित जनजातीय लड़ाकुओं ने कश्मीर पर हमला कर दिया. फलस्वरूप जम्म-कश्मीर के राजा हरि सिंह ने भारत सरकार से सहयता मांगी. भारत सरकार ने अपनी सेना कश्मीर में उतार दी. इस युद्ध में भारतीय वायु सेना ने सीधे हिस्सा तो नहीं लिया, लेकिन सैन्य टुकडियों को पहुंचाने व ज़मीनी दल को हवाई सहकार्य देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

गोवा मुक्ति संग्राम

आज़ादी के बाद गोवा ही एक मात्र ऐसा राज्य था जहां 1961 तक विदेशी सरकार का आधिपत्य था. इस मसले को लेकर सालों से भारत सरकार पूर्तगाली सरकार से बात कर रही थी, ताकि मामला बातचीत से ही सुलझ जाए. लेकिन, सारा कुछ व्यर्थ देखकर भारत ने 1961 के आख़िर में पुर्तगालियों को गोवा और उसके आस पास के इलाकों से खदेड़ने के लिए सशस्त्र बलों को तैनात करने का निर्णय लिया. भारतीय वायुसेना को इसमें जमीनी सेना को मदद करने के लिए कहा गया. वायुसेना अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई. दीव में रनवे पर बमबारी की और नियंत्रण टावर, वायरलेस स्टेशन और मौसम स्टेशन नष्ट कर दिए. जैसे-तैसे पुर्तगाली वहां से भाग निकले.

भारत-पाकिस्तान युद्ध-1965

भातीय वायुसेना के लिए यह पहला दफ़ा था जब उसका सामना दुश्मन देश से सामने से हो रहा था. पहली बार भारतीय सेना ने व्यापक पैमाने पर वायु सेना का इस्तेमाल किया. इसमें वायुसेना थलसेना को मदद करने के बजाय सीधे रूप से पाकिस्तानी सेना का टक्कर ले रही थी. पाकिस्तान में दूर-दूर जाकर गोले बरसा रही थी. हालांकि वायुसेना की विमाने बहुत पुरानी हो चुकी थी. भारतीय वायुसेना के मुकाबले पाकिस्तानी सेना के पास उच्चतम गुणवत्ता के विमानों की श्रेणी मौजूद थी. फिर भी भारतीय वायुसेना ने दुश्मनों का डटकर मुकाबला किया. एक स्वतंत्र पत्रकार के अनुसार इस लड़ाई में दोनों तरफ़ के वायुसेनाओं ने अपने 50 बमवर्षक जहाज खोए. हालांकि भारतीय सेना का आकार काफ़ी बड़ा था इसलिए इस क्षति को बर्दाश्त करना आसान था.

बांग्लादेश मुक्ति युद्ध 1971

भारत ने अब तक जितने युद्ध लड़े, उसमें सबसे ऐतिहासिक जीत इसी युद्ध में प्राप्त हुई. भारत ने पाकिस्तान को जहां दो टुकड़ों में बांट दिया वहीं लगभग 90,000 पाकिस्तानी सैनिकों को युद्धबंदी बनाकर घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया. पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण के बाद भारतीय वायुसेना ने 94 पाकिस्तानी विमान, जिनमें 54 एफ-86 सेबर लडाकू विमान शामिल थे, मार गिराने का दावा किया.

इस युद्ध में भारतीय वायु सेना ने थल सेना की काफ़ी मदद की. भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी सीमा में 2,000 उड़ानें भरी और बढ़ती थल सेना को सहायता प्रदान की. इसके साथ ही नौ सेना को भी अरब सागर व बंगाल की खाडी में पाकिस्तानी नौ सेना के विरुद्ध लडने में सहायता प्रदान की.

कारगिल

1999 में भारत पाकिस्तान का तीसरा युद्ध हुआ, जिसे कारगिल युद्ध के नाम से जाना जाता है. दुर्गम पहाड़ी इलाके में लड़ी जाने वाली लड़ाई में वायुसेना की बहुत बड़ी भूमिका थी. इंडियन एयरफोर्स के पूर्व चीफ एन.ए. के. ब्राउन ने कहा था कि अगर इंडियन एयरफोर्स का इस्तेमाल नहीं किया गया होता तो 1999 का करगिल संघर्ष भी तीन महीने और खिंच जाता.

इस युद्ध में भारतीय वायुसेना ने दुर्गम पहाड़ियों पर दुश्मनों के ठिकानों पर बमवर्षकों जहाजों से बम गिराए. इससे थल सेना को ऊपर पहाड़ियों पर चढ़ने में काफ़ी मदद मिली.

इन युद्धों के अलावे भारतीय वायुसेना विदेशों में शांति स्थापित करने के लिए भी कई ऑपरेशनों को अंजाम दिया. संयुक्त राष्ट्र के कई अभियानों में सम्मलित रहा. श्रींलंकाई गृह युद्ध को खत्म करने और मानवीय सहायता प्रदान करने की वार्ता जब विफ़ल रही, तब भारतीय प्रशासन ने ऑपरेशन पुमलाई शुरू किया जिसके चलते 4 जून 1987 को पांच एन-32 के द्वारा, जिन्हे पांच मिराज ने हवाई सुरक्षा प्रदान करने का कार्य किया, इन्सानी ज़रुरतों का सामान गिराया जिसे श्रीलंकाई सेना ने बिना विरोध होने दिया.

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