कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

देश की अर्थव्यवस्था में घट रहा भारतवासियों का विश्वास, 44 प्रतिशत लोग मौजूदा आर्थिक स्थिति से असंतुष्ट

आंकड़ों में 2017 की तुलना में 27 प्रतिशत की गिरावट आई।

जनता के सवाल:

प्रश्न 1 – ऐसे कौन से कारण हैं कि जनता के बीच असंतोष इतना बढ़ गया है?

प्रश्न 2 – क्या मोदी सरकार की नीतियाँ जनता के बीच भारत के आर्थिक स्थिति को लेकर बढ़े असंतोष को कम करने के लिए कारगर हैं?

प्रश्न 3 – क्या मोदी सरकार सच में देश की जनता के आर्थिक विकास के लिए समर्पित है?

देश की जनता नरेन्द्र मोदी के शासन में अर्थव्यवस्था को लेकर आश्वस्त नहीं है। इसका खुलासा हाल ही में पिव रिसर्च सेंटर द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के 44 प्रतिशत लोग भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर निश्चिंत नहीं हैं।

गौरतलब है कि 2017 के सर्वे में कहा गया था कि 83 प्रतिशत लोग देश की आर्थिक स्थिति को सही मानते हैं। लेकिन, मौजूदा साल में इस आंकड़े में भारी कमी दर्ज की गई है। अब मात्र 56 प्रतिशत भारतीय ही देश की अर्थव्यवस्था को लेकर निश्चिंत हैं, यानि 44 प्रतिशत लोग देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति से संतुष्ट नहीं हैं।

किसी भी उभरती हुई अर्थव्यवस्था में जनता का इस कदर अविश्वास सही नहीं माना जाता है। भारत में दर्ज़ ये आंकड़े दूसरे किसी भी देश से ज्यादा हैं।

पिव ने बीते मंगलवार को यह रिपोर्ट जारी किया है। इसे 2018 के ग्लोबल एटिट्यूड्स सर्वे से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है। कहा जा रहा है कि इसमें लोगों ने अपने राजनीतिक झुकाव से प्रेरित होकर भी अर्थव्यवस्था को लेकर अपनी राय दी है।

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