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मोदी सरकार के कार्यकाल में भारतीय रेलवे में सुधार यूपीए सरकार से भी कम- आरटीआई से खुलासा

यूपीए-2 के शासनकाल में हर साल औसतन 3,357 किलोमीटर ट्रैक का नवीनीकरण कराया था.

भारतीय रेलवे में सुधार के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने कई दावें किए थे. लेकिन आरटीआई से प्राप्त जानकारी के आधार पर ये दावे खोखले नज़र आते हैं.

डाउन टू अर्थ वेबसाइट के मुताबिक़ आरटीआई के दस्तावेजों के आधार पर ‘वादा फरामोशी’ नामक किताब में सरकार के दावों की पड़ताल की गयी है.

रेलवे ट्रैक का नवीनीकरण

मोदी सरकार बुलेट ट्रेन की बात करती है. लेकिन आम आदमी के लिए चल रही ट्रेनों के ट्रैक के नवीनीकरण का काम खास्ता हालत में है. 4 फरवरी 2019 को रेल मंत्रालय से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2017-18 में रेलवे ने 2009- 10 के मुकाबले अधिक ट्रैक का नवीनीकरण किया है. लेकिन, शुरुआती तीन सालों में मोदी सरकार ने इस दिशा में कोई ख़ास काम नहीं किया है.

वहीं, यूपीए-2 के शासनकाल में हर साल औसतन 3,357 किलोमीटर ट्रैक का नवीनीकरण कराया था. जबकि मोदी सरकार ने साल में औसतन 3,027 किलोमीटर ट्रैक का नवीनीकरण किया है.

 मोदी सरकार में रेल हादसों का आंकड़ा

मोदी सरकार में रेल हादसों में कमीं दर्ज की गयी है. रेल मंत्रालय द्वारा आरटीआई से मिले दस्तावेजों के मुताबिक:

साल     –  रेल हादसा

2014- 15 –  133

2015- 16 –  107

2016- 17 –  104

2017- 18 –   73

यह आंकड़ा दर्शाता है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में रेल हादसों में कमीं आई है. लेकिन, इन हादसों में कमीं के पिछे एक और प्रमुख कारण ‘ट्रेनों का रद्द’ होना भी है.

साल      –    रद्द हुई ट्रेनों की संख्या

2014- 15 –    3,591

2015- 16 –   14,336

2016- 17 –   9,550

2017- 18 –   21,053

यात्रियों की संख्या में गिरावट

डाउन टू अर्थ वेबसाइट के मुताबिक 26 दिंसबर 2018 को लोकसभा में राज्यमंत्री (रेलवे) राजेन गोहेन ने एक लिखित जवाब में कहा था कि भारतीय रेल में यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में तीन साल में 201 मिलियन की कमीं आयी है

साल     – यात्रियों की संख्या

2013-14 – 8317 मिलियन

2016- 17- 8116 मिलियन

यात्रियों की संख्या में कमीं आने का मुख्य कारण ट्रेनों का लेट होना और रदद् होना है.

 एलआईसी में निवेश

प्रेस सूचना ब्यूरो की विज्ञाप्ति में 11 मार्च 2015 को कहा गया था कि जीवन बिमा निगम (एलआईसी) भारतीय रेलवे में 1.5 लाख करोड़ का निवेश करेगी और यह निवेश मोदी सरकार के कार्यकाल यानी 5 वर्षों में होगा.

इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन के अनुसार, एलआईसी से अब तक 16,200 करोड़ रुपए ही मिले हैं. 2018-19 में एलआईसी द्वारा एक रुपया भी जारी नहीं किया गया है. ऐसे में तय राशि का केवल 10.5 प्रतिशत ही जारी किया गया.

 

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