कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: हार्वर्ड लॉ स्कूल ने सामाजिक कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज को किया सम्मानित

सुधा भारद्वाज जनजातियों और दलितों के अधिकार की वकालत करती रही हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता व अधिवक्ता सुधा भारद्वाज को हार्वर्ड लॉ स्कूल द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2019  के अवसर पर सम्मानित किया गया है. उन्हें “परिवर्तन को प्रोत्साहित करने वाली महिलाएं” श्रेणी में रखा गया है. फिलहाल सुधा भारद्वाज भीमा-कोरेगांव मामले में पुणे की जेल में बंद हैं.

सुधा भारद्वाज मानवाधिकारों की कानूनी लड़ाई लड़ने वाली एक सामाजिक कार्यकर्ता, जुझारू ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता हैं. वे करीब तीन दशक से छत्तीसगढ़ में काम कर रही हैं. वह छत्तीसगढ़ में पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिब्रेशन (पीयूसीएल) की महासचिव भी हैं. इन्होंने भूमि अधिग्रहण के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर काम किया है.

सुधा भारद्वाज जनजातियों और दलितों के अधिकार की वकालत करती रही हैं और इन समुदायों के बीच उनकी अच्छी-खासी पहचान है. वह वर्ष 2000 में वकील बनीं. तब से वह किसानों, आदिवासियों और श्रम के क्षेत्र में गरीब लोगों, भूमि अधिग्रहण, वन अधिकार एवं पर्यावरण अधिकार के लिए काम करती आयी हैं. वह 2007 से छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में वकालत कर रही हैं.

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