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संविधान में नहीं है आर्थिक आधार पर आरक्षण का प्रावधान, सरकार की राह मुश्किल: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जे चमलेश्वर

पूर्व जस्टिस ने जे चेलमेश्वर कहा, "संविधान ने संसद या विधानसभा को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग के लोगों को आरक्षण देने का अधिकार दिया है."

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सामान्य वर्ग को दिए गए 10 प्रतिशत आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस जे चेलमेश्वर ने बुधवार को टिप्पणी करते हुए कहा कि संविधान में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं है.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़ आईआईटी-मुंबई में एक सभा को संबोधित करते हुए पूर्व जस्टिस ने कहा, “संविधान ने संसद या विधानसभा को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग के लोगों को आरक्षण देने का अधिकार दिया है, यह प्रावधान आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए नहीं है. वर्तमान में सरकार का यह फ़ैसला अदालत में किस हद तक टिक सकेगा, मुझे नहीं पता और यह आगे देखना होगा. मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है.

ज्ञात हो कि संसद के दोनों सदनों ने इस महीने की शुरुआत में 124 वें संविधान विधेयक को पास किया है . इसमें आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग के लोगों के लिए नौकरियों और शिक्षा में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फ़ैसला किया गया है. इस बिल को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई है.

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