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जम्मू कश्मीर: केंद्र सरकार ने राज्य के कर्मचारियों के लिए अनिवार्य की रिलायंस की हेल्थ बीमा पॉलिसी

कर्मचारियों की संस्था का कहना है कि एक निजी कंपनी को फ़ायदा पहुंचाने के लिए सरकार उनपर अतिरिक्त भार सौंप रही है।

केंद्र सरकार ने रिलायंस को फ़ायदा पहुंचाने के लिए एक नई कारिस्तानी की है। जम्मू कश्मीर के राज्यपाल ने राज्य के कर्मचारियों, पेंशनधारियों और मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए रिलायंस की हेल्थ बीमा पॉलिसी लेना अनिवार्य कर दिया है। 20 सितम्बर को जारी इस आदेश में राज्यपाल ने कहा है कि सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की बजाय रिलायंस जनरल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी का बीमा लिया जाए।

राज्यपाल के आदेश में कहा गया है कि सरकार ने रिलायंस के साथ समझौता किया है कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को सालाना 8,777 रुपए और पेंशनधारियों को 22,229 रुपए की किस्त जमा करनी होगी। यह बीमा राज्य सरकार के सभी कर्मचारियों (गैजेटेड और नॉन गैजेटेड) राज्य के विश्वविद्यालयों, आयोगों और तमाम स्वायत संस्थानों के लिए जरूरी होगी।

कांग्रेस नेता सलमान निज़ामी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमलावर होते हुए कहा है कि पीएम मोदी घाटे में चल रही रिलायंस को संभालने का जिम्मा उठा चुके हैं।

राज्य में कर्मचारियों की संयुक्त कार्य समिति ने भी इस पहल की निंदा की है। समिति ने कहा है कि यह निर्णय एक खास निजी कंपनी को फ़ायदा पहुंचाने के लिए लिया गया है, इसे किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। यह राज्य के कर्मचारियों पर एक अतिरिक्त बोझ है।

डेलीएक्सेलसियर की रिपोर्ट के मुताबिक इस स्वास्थ्य बीमा का प्रीमियम भी काफ़ी ज्यादा है। रिपोर्ट में इसे अनुचित और अस्वीकार्य ठहराया गया है। अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक एलआईसी ने इस बीमा के लिए सालाना प्रीमियम 5,300 रुपए तय किया था। जबकि, रिलायंस इसी बीमा पर 65 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर 8,770 रुपए की किस्त ले रही है। निजी बैंक आईसीआईसीआई ने भी 5,300 की ही सालाना किस्त तय की थी। इस बीमा योजना में गड़बड़झाले की आशंका है।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर घोर पूंजीवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगता रहा है। विभिन्न रिपोर्टों में कहा गया था कि भाजपा सरकार ने नियमों में हेराफेरी कर मुकेश अंबानी की जियो इंस्टीच्यूट को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा दिया था।

फ्रांस से राफेल विमान के सौदे को लेकर भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए)सरकार सवालों के घेरे में फंस चुकी है। कहा जा रहा है कि अनिल अंबानी को फ़ायदा पहुंचाने के लिए मोदी सरकार ने विमान सेवा में अनुभवहीन रिलायंस डिफेंस को इस सौदे के लिए आगे किया।

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