कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

पुलिस हिरासत से छूटने के बाद बोले ज्यां द्रेज- भारत में धीरे-धीरे सारी आज़ादियों को दबाया जा रहा है, देखें विडियो

पुलिस ने उनके दो अन्य साथियों को भी हिरासत में लिया था.

भोजन के अधिकार के लिए लड़ाई लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज को झारखंड पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद छोड़ दिया है. द्रेज को झारखंड पुलिस गढ़वा से हिरासत में ली थी, जहां वो ‘भोजन के अधिकार’ को लेकर एक बैठक का आयोजन कर रहे थे.

पुलिस ने उनके साथ उनके दो और साथियों को भी हिरासत में लिया था. पुलिस का कहना था कि इस बैठक के लिए प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई थी. हालांकि तीनों लोगों से पूछताछ कर छोड़ दिया जाएगा.

हालांकि ज्यां द्रेज ने पुलिस हिरासत से छूटने के स्पष्ट के बाद स्पष्ट किया कि उन्होंने इस बैठक के लिए दस दिन पहले आवेदन दिया था लेकिन प्रशासन के तरफ़ से कोई जवाब नहीं दिया गया. उन्होंने कहा “प्रशासन से हमारी नाराज़गी है कि दस दिन पहले लिखित आवेदन देने के बाद भी जवाब नहीं आया. न अनुमति दिया गया और न मना किया गया.

मुझे लगता है कि चुनाव के समय इस प्रकार के अराजनैतिक बैठक बहुत ज़रूरी है. और ऐसा कोड ऑफ़ कन्डक्ट में कहीं नहीं लिखा है कि इस तरह के बैठक की अनुमति नहीं दी जा सकती. कल रात भी हमने एक गांव में एक बैठक की थी पर उसके लिए अनुमति हमने नहीं मांगी और न प्रशासन द्वारा उसे रोका गया.”

ज्यां द्रेज ने आगे कहा कि “भारत में लोकतंत्र की समझ सिकुड़ता जा रहा है. चुनाव के समय लोगों को अपनी बात रखना बहुत ज़रूरी है. और चुनाव के समय शांति से गैरराजनीतिक बैठक करने का मौक़ा होना चाहिए. लेकिन धीरे-धीरे सारी आज़ादियों को कम किया जा रहा है. मुद्दा यही है.”

बता दें कि अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज भारत में भोजन के अधिकार जैसे अहम मुद्दा पर काम कर रहे हैं. इसके साथ ही वे रांची विश्वविद्यालय में अतिथि प्रोफेसर हैं.

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