कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

बीते एक साल में करीब 15 लोगों ने भुखमरी से गंवाई अपनी जान – खाद्य अधिकार अभियान

झारखंड में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में क़रीब 40% कुपोषित हैं।

शुक्रवार को खाद्य अधिकार अभियान की तरफ़ से झारखंड में भुखमरी से होने वाली मौत की बढ़ती संख्या के बारे में चिंताओं को व्यक्त करते हुए एक बयान जारी किया गया। इन्होंने राज्य सरकार से कुछ मांगें की है, साथ ही भुखमरी से होने वाली मौतों को रोकने में मदद करने के लिए कुछ सुझाव भी दिए हैं।

फाउंडेशन ने अपने बयान में कहा कि झारखंड में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में क़रीब 40% कुपोषित हैं। 2017 में कम से कम 15 लोग जिनमें छह आदिवासी, चार दलित और पिछड़ी जातियों के पांच व्यक्ति हैं, भूखमरी से मारे गए। सभी मृतकों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) से सामाजिक सुरक्षा पेंशन या राशन से वंचित किया गया था।

द वायर के रिपोर्ट के मुताबिक़ इनमें से पांच परिवारों के पास राशन कार्ड नहीं था एवं अन्य पांच को आधार कार्ड आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को लेकर लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था जिसकी वजह से उन्हें राशन देने से इंकार कर दिया जा रहा था। हुई मौतों में से दस की वजह आधार कार्ड संबंधी परेशानियों को ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है।

बयान में यह भी कहा गया है कि झारखंड सरकार ने “राज्य में लगातार भुखमरी से होने वाली मौत रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की है।”

द वायर की रिपोर्ट के अनुसार राइट टू फूड अभियान द्वारा सरकार से की गई मांगें निम्नलिखित हैं :-

– किसी भी कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार अनिवार्य नहीं होना चाहिए और आधार आधारित बॉयोमीट्रिक प्रमाणीकरण भी बंद होना चाहिए।

– जिनका राशन कार्ड रद्द कर दिया गया था और जिनके नाम पेंशन सूचियों से उनके आधार कार्ड नहीं जुड़े होने की वजह से काट दिया गए थे, उन परिवारों की सूची तुरंत सार्वजनिक की जानी चाहिए एवं तत्काल प्रभाव से राशन और पेंशन को फिर से शुरू करना चाहिए।

– सार्वजनिक वितरण प्रणाली को ग्रामीण इलाकों में सार्वभौमिक बनाया जाना चाहिए और पीवीटीजी परिवारों एवं एकल महिलाओं को अंत्योदय कार्ड दिया जाना चाहिए।

– निजी राशन डीलरों को तत्काल हटा दिया जाना चाहिए और ग्राम पंचायत या महिलाओं के संगठनों के साथ इसे प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए।

– राज्य में पोषण की स्थिति में सुधार के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली में किफ़ायती दरों पर दालें और खाद्य तेल उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

– राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में अनिवार्य मातृत्व लाभ को रूप से 5000 रुपये से (प्रधानमंत्री मटरू वंदना योजना के तहत) 6000 रुपये तक बढ़ाया जाना चाहिए और इसे केवल पहले बच्चों तक ही सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

– सभी गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को प्रति सप्ताह पांच अंडे दिए जाने चाहिए।

– सभी बच्चों को आंगनवाड़ी और मिड डे मील के तहत प्रति सप्ताह पांच अंडे दिए जाने चाहिए।

– राज्य के सभी गांवों में आंगनवाड़ी स्थापित की जानी चाहिए। आंगनवाड़ी में शिक्षा प्रणाली को मज़बूत किया जाए और बच्चों को बाहर का तैयार खाना देने के बजाय गर्म पकाया भोजन परोसा जाए।

– राज्य में सभी बुजुर्गों, विधवाओं और विकलांग व्यक्तियों को समय पर कम से कम 2000 रुपए प्रति माह की सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जानी चाहिए।

– झारखंड की मनरेगा मज़दूरी दर कम से कम राज्य की न्यूनतम मज़दूरी जितनी बढ़ाई जानी चाहिए।

– मनरेगा में प्रति वर्ष 200 दिनों के काम का अधिकार सभी घरों को दिया जाना चाहिए।

– सभी मनरेगा श्रमिकों को किसी भी परिस्थिति में 15 दिनों के भीतर भुगतान किया जाना चाहिए।    

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