कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

नजीब की तरह मुझे भी ग़ायब कर दिया जाएगा: मुस्लिम महिला प्रोफेसर ने JNU के कुलपति पर लगाया धार्मिक भेदभाव और प्रताड़ना का आरोप

महिला ने बताया है कि यह सारी साजिश जेएनयू वीसी के मिलीभगत से हो रही है. इसमें सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल एक्सक्लूजन एंड इनक्लूसिव के निदेशक भी शामिल हैं.

जवाहर लाल नेहरू(जेएनयू) की मुस्लिम महिला प्रोफेसर के शिकायत पर दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने संज्ञाने लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को नोटिस भेजा है. दरअसल, मुस्लिम महिला प्रोफेसर का आरोप है कि उन्हें उनके धर्म के कारण परेशान किया जा रहा है. और यह उत्पीड़न ऐसा है कि कई बार उन्हें आत्महत्या करने का विचार आता है.

40 वर्षीय महिला प्रोफेसर रोसिना नासिर, जो जेएनयू के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल एक्सक्लूजन एंड इनक्लूसिव की सहायक प्रोफेसर हैं. अपनी शिकायत में बताती हैं कि उनकी सैलरी अप्रैल 2109 से ही रोक दी गई है. इसके पीछे कोई कानूनी वजह भी नहीं बताई गई है. साथ ही उन्हें बैठकों में बुलाया नहीं जाता है. ऑफिशियल मेल और इंटरनेट चलाने की पाबंदी है.

महिला ने बताया है कि यह सारी साजिश जेएनयू वीसी के मिलीभगत से हो रही है. इसमें सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल एक्सक्लूजन एंड इनक्लूसिव के निदेशक भी शामिल हैं. द वायर से महिला प्रोफेसर ने कहा, “ऐसा लगता है कि मैं अपना पद नहीं छोड़ूंगी तो मुझे भी जेएनयू छात्र नजीब के तरह गायब कर दिया जाएगा, जो तीन साल पहले कैंपसे से लापता है और अब तक उनका कुछ नहीं मालूम चला.”

पीएचडी और एम. फिल के कई छात्र उन्हें सुपरवाइजर चुनना चाहते हैं, लेकिन प्रशासन इस पर भी रोक लगा रखा है. यहां तक की जेएनयू के वेबसाइट पर उनके नाम की प्रोफाइल भी मौज़दू नहीं है. अब जेएनयू कैम्पस में मिले सरकारी आवास को खाली कराने का दबाव बनाया जा रहा है.

बता दें कि प्रोफेसर महिला जेएनयू से जुड़ने से पहले हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में चार साल पढ़ा चुकी हैं. इससे पहले भी उनकी सैलरी रोक दी गई थी, लेकिन उच्च न्यायालय के आदेश पर जेएनयू प्रशासन ने सैलरी देना शुरू किया था.

इस बार की शिकायत पर दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने 1 अगस्त तक जवाब मांगा है.

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