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कश्मीरी पंडितों का छलका दर्द, कहा- मोदी सरकार हमें भूल चुकी है

कश्मीरी पंडितों का आरोप है कि भाजपा सरकार ने हमारी घाटी में पुनर्वास के लिए कोई क़दम नहीं उठायी है.

कश्मीरी पंडितों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर 2014 के चुनाव से अपने घोषणापत्र में किये वादे को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया. अपना दर्द बयां करते हुए उन्होंने कहा कि मोदी उनका दर्द समझ पाने में नाकाम साबित हुए.

गौरतलब है की मोदी जी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में यह वादा किया था की वे उन सभी कश्मीरी पंडितों के परिवारों को पूरे सम्मान और सुरक्षा के साथ घाटी में पुनर्वास कराएंगे जिन्हें अपना घर छोड़कर पलायन करना पड़ा था. मोदी सरकार के पांच साल पूरे होने वाले हैं और कश्मीरी पंडितों का यह आरोप है कि इस मामले में भाजपा सरकार ने कोई क़दम नहीं उठाया है. उन्हें लगता है कि मोदी इस समुदाय को भूल गए हैं. उनका कहना है कि वे फेल हो गए हैं.

इंडिया टुडे ने इस मामले को लेकर दो RTI दायर की. पहली RTI में उन्होंने कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की हत्या से संबंधित मामलों में प्रगति के बारे में पूछा और उन मामलों में दर्ज FIR की संख्या और घाटी में मारे गए कश्मीरी पंडितों की कुल संख्या के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन उनका जवाब चौंकाने वाला था क्योंकि इस सम्बन्ध में प्रशासन का कहना है की उनके पास कोई जानकारी मौजूद नहीं है. इस जानकारी के लिए उन्हें राज्य सरकार से संपर्क करने के लिए कहा गया.

वहीं दूसरी RTI में घाटी में रह रहे कश्मीरी पंडितों की संख्या और बाद में पुनर्वासित होने वाले लोगों की सटीक संख्या के बारे में पूछा गया था. इसके जवाब में कहा गया कि सरकार को इसकी जानकारी नहीं है. इसकी जानकारी के लिए भी राज्य सरकार से संपर्क करने को कहा गया.

इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक़ उन्होंने पिछले 10 साल में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में भी पूछा. उसको लेकर भारत सरकार ने कश्मीरी ब्राह्माणों के पुनर्वास के लिए उनके द्वारा ली गई तीन प्रमुख योजनाओं की पहचान की जिसमें उन्होंने कश्मीरी पंडितों को दिए जाने वाले मासिक नगद, राहत/सूखा राशन, प्रधानमंत्री राहत पैकेज 2008 और प्रधानमंत्री देव पैकेज 2014 के बारे में बताया. मज़ेदार बात यह है की इन 3 में से 2 योजनाएं मोदी सरकार के सत्ता में आने से पहले से कार्यान्वित हैं.

पिछले 10 वर्षों में कश्मीरी पंडितों के गोचर आवास पर भारत सरकार द्वारा खर्च किए जाने वाले धन के बारे में पूछे जाने पर जवाब में कहा गया, “भारत सरकार नेजम्मू-कश्मीर के 6000 ट्रांजिट आवास के निर्माण के लिए सरकारी को मंजूरी जारी की है PMDP के तहत कश्मीर घाटी में 2014 और जम्मू-कश्मीर में सितंबर 2016 तक 114 करोड़ रुपये दिए गए.”

जम्मू में शिविरों में रह रहे कश्मीरी शरणार्थी ने इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा, “हम नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से बेहद खुश थे. हमें उनसे बेहद उम्मीदें थीं, वह फेल हो गए हैं. हमनें घाटी में अपना सब कुछ खो दिया है, हमें अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा. हमें इन शिविरों में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.”

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