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केरल: बिशप पर रेप का आरोप लगाने वाली पीड़िता का समर्थन करने वाली चार ननों को कॉन्वेंट छोड़ने का आदेश

सितंबर में ननों ने कैथोलिक सुधारवादी मंचों के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन कर बिशप के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की थी.

कोच्चि. केरल में बिशप फ्रैंको मुलक्कल के ख़िलाफ़ बलात्कार का आरोप लगाने वाली पांच में से चार ननों को एक बार फिर से कोट्टायम ज़िले में स्थित उनके कॉन्वेंट को छोड़ने का निर्देश दिया गया है.

रोमन कैथलिक चर्च के जालंधर सूबा के तहत जीसस की उनकी मंडली–मिशनरीज़ ने नन को निर्देश दिया है कि वे उन कान्वेंट में जाकर जिम्मेदारी संभालें जो उन्हें 2018 में मार्च और मई के बीच जारी तबादला आदेश के अनुसार सौंपी गई थी. हालांकि,  मुलक्कल पर बलात्कार और अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने का आरोप लगाने वाली नन, जो इस समय अपने सहकर्मी के साथ रह रही हैं उन्होंने कहा कि वे कौरवियलंगद में कॉन्वेंट नहीं छोड़ेंगी.

सितंबर में इन ननों ने कैथोलिक सुधारवादी मंचों के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन कर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन करते हुए बिशप के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की थी. भारत में रोमन कैथोलिक वरिष्ठ सदस्य पादरी बिशप मुलक्कल को सितंबर में नन द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद सितंबर में गिरफ्तार किया गया था. बिशप पर आरोप है कि उन्होंने 2014 और 2016 के बीच कुरावलीयांग में कॉन्वेंट में पांच ननों के साथ बलात्कार और यौन उत्पीड़न किया, हालांकि बिशप अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार करते रहे हैं.

मामला सामने आने पर 54 वर्षीय बिशप को अस्थाई रूप से धर्मगुरु संबंधी सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था. साथ ही आरोप लगने के बाद हुई उनकी गिरफ्तारी के तीन हफ्ते बाद, बिशप को केरल उच्च न्यायालय द्वारा अक्टूबर में जमानत पर रिहा कर भी दिया गया था. अब दुबारा आए इस कॉन्वेंट को छोड़ने के निर्देश को लेकर पांच ननों में से एक नन ने आरोप लगाया कि यह निर्णय उनके समूह को विभाजित करने और मुलक्कल के ख़िलाफ़ उनके सहयोगी ननों को अलग-थलग करने के उद्देश्य से दिया गया है.

आपको बता दें कि इस मामले में पांच ननों ने जालंधर के बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर 2014 से 2016 के बीच उनके साथ बलात्कार और अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने करने का आरोप लगाया है. यह घटना कोट्टयम जिले में संचालित कॉन्वेंट के बिशप के दौरे के दौरान हुई थी.

पीटीआई इनपुट्स पर आधारित

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