कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

आसमान में लुटाए गए करोड़ों रुपए? BJP सांसद किरण खेर के गोद लिए गांव में नहीं है ढंग का शौचालय

किरण खेर का दावा है कि उन्होंने इस गांव के विकास के लिए 1.68 करोड़ रुपए खर्च किए, लेकिन गांव के लोगों का कहना है कि उन्हें अभी तक जरूरी सुविधाएं भी नसीब नहीं हुई हैं.

मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही सांसद आदर्श ग्राम योजना लागू की. इसके तहत हर सांसद को एक गांव चुनकर उसका विकास करना था. लेकिन, आए दिन इस योजना की सच्चाई सामने आती रहती है. अब चंडीगढ़ की भाजपा सांसद किरण खेर द्वारा गोद लिए गए गांव की असलियत देखी गई है. किरण खेर का दावा है कि उन्होंने इस गांव के विकास के लिए 1.68 करोड़ रुपए खर्च किए, लेकिन गांव के लोगों का कहना है कि उन्हें अभी तक जरूरी सुविधाएं भी नसीब नहीं हुई हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक चंडीगढ़ के सारंगपुर गांव के निवासी अमरीक सिंह का कहना है कि उनके गांव की सड़कें खस्ता हालत में हैं. जो स्ट्रीट लाइट लगाए गए हैं, वो रात में काम नहीं करते, जिसके कारण दोपहिया वाहनों के यात्री आए दिन दुर्घटना के शिकार होते हैं.

इस गांव के सामुदायिक केन्द्र की हालत भी बुरी है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इस सामुदायिक केन्द्र के चौकीदार अवतार सिंह का कहना है कि उन्हें पिछले चार महीने से सैलरी नहीं मिली है. अवतार सिंह बताते हैं कि यहां सफ़ाई की व्यवस्था भी सही नहीं है. उनके मुताबिक इस सामुदायिक केन्द्र के इस्तेमाल के लिए 300 रुपए की फीस ली जाती है, जो काफ़ी महंगी है.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार गांव के लोगों का कहना है कि सड़कें बुरी हालत में हैं. इसके साथ ही यहां लगी स्ट्रीट लाइट भी काम नहीं करते. गांव वालों को यह नहीं मालूम है कि इसकी शिकायत कहां की जाए. इसके साथ ही यहां बनाए गए शौचालयों की बनावट भी ऐसी है कि उन्हें इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार चंडीगढ़ से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार हरमोहन धवन का कहना है, “ऐसी सुविधाओं को बहाल करने से क्या फायदा है, जब इस्तेमाल ही नहीं किया जा सके. मैं, खुद कुछ दिनों पहले उस गांव में गया था और वहां के लोगों का कहना था कि वहां के सरकारी दवाई के दुकान की हालत बदतर स्थिति में है.”

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक चंडीगढ़ लोकसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी पवन कुमार बंसल का कहना है कि किसी भी गांव को गोद लेकर फंड खर्च करना काफी नहीं है, इसके लिए लगातार ध्यान देने की जरूरत होती है. उन्होंन कहा, ” मुझे भी बताया गया है कि उस गांव में बनाए गए शौचालय की हालत इतनी बुरी है कि लोग इस्तेमाल नहीं कर पाते.”

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