कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

‘आत्महत्या से अच्छा पुलिस की गोली से मर जाऊँगा’ यह कहकर घर से निकले थे 73 वर्षीय किसान लालूराम

हरियाणा के कैथल ज़िले के खुराना गांव के किसान लालूराम का कहना है कि "उन्हें सरकार से लड़ते हुए 40 साल हो गए। किसान आंदोलन जब भी होता है। पुलिस द्वारा ऐसी ही कार्रवाई की जाती है। लेकिन इस तरह की कार्रवाई से किसानों के हौंसले डगमगाने वाले नहीं हैं।"

 2 अक्टूबर को भारतीय किसान यूनियन द्वारा आयोजित किसान क्रांति यात्रा में पुलिस और किसानों के बीच जो झड़प हुई उसे पूरे देश ने देखा। लेकिन इसी झड़प के बीच एक किसान नेता की बहादुरी की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई। लोगों ने तस्वीर को हर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से ख़ूब शेयर किया। किसी ने इसे संघर्ष की ख़ूबसूरत तस्वीर कहा, तो किसी ने  बुजुर्ग से युवाओं को जज़्बा सीखने की सलाह दी। सोशल मीडिया का फ़ीड इसी तस्वीर में अलग-अलग कैप्शन से साथ भरा दिखा।

सोशल मीडिया पर जितनी उस तस्वीर और उसके संदर्भ पर बात हुई, उतनी उस बहादूर किसान पर नहीं हो पाई। शायद ही किसी व्यक्ति को तस्वीर शेयर करते वक़्त उस किसान के बारे में थोड़ी सी भी जानकारी हो।

दरअसल, मजबूत जज़्बे के साथ मोदी प्रशासन से लोहा लेते 73 वर्षीय बुजुर्ग किसान का नाम लालूराम हैं। हरियाणा के कैथल ज़िले के खुराना गांव के किसान लालूराम का कहना है कि “उन्हें सरकार से लड़ते हुए 40 साल हो गए। किसान आंदोलन जब भी होता है। पुलिस द्वारा ऐसी ही कार्रवाई की जाती है। लेकिन इस तरह की कार्रवाई से किसानों के हौंसले डगमगाने वाले नहीं हैं।”

न्यूज़18 की रिपोर्ट के मुताबिक लालूराम का लाठी से मुकाबला करने का परिणाम ये हुआ कि पुलिस द्वारा चलाई गई गोली उनके दाहिने कंधे को छूकर निकल गई। लेकिन गोली लगने के बावजूद भी लालूराम रुके नहीं और जख़मी कंधे के साथ किसान घाट तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि सरकार स्वामीनाथन आयोग रिपोर्ट लागू करें, कर्जमाफी के वादे पूरे करे। देश की रीढ़ की हड्डी किसान हैं अगर किसान ही मर जाएगा तो देश का क्या होगा? जब किसान कल फसल उगाना छोड़ देगा तो देश भूखा मरेगा। यदि सरकार ने लाभकारी मूल्य नहीं दिया तो किसान खेती बंद कर देंगे।किसान नेता लालूराम गांव के प्रधान रह चुके हैं। उनके बेटे का कहना है कि घरवालों को उनकी चिंता रहती है, उन्हें आंदोलन में जाने से रोकने की कोशिश करते हैं। लेकिन वे किसी की नहीं सुनते हैं। जब से भारतीय किसान यूनियन बना है तब से वे किसानों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस बार आंदोलन में जाने से रोकने पर उन्होंने कहा- 

 मैं तो किसान आंदोलन में जा कर रहूंगा। मेरे किसान भाई मर रहे हैं और मैं चुप बैठ जाऊंमैं मरने से नहीं डरता हूं। किसान वैसे भी आत्‍महत्‍या कर रहे हैं सरकार की गोली से मर जाएंगे। एक ही बात है।

भारतीय किसान यूनियन की उत्तर-प्रदेश शाखा द्वारा लालूराम को उनकी बहादुरी के लिए सम्मानित किया जाएगा। उनके बेटे ने बताया कि तस्वीरें वायरल होने के बाद युवा उन्हें बहुत पसंद और उनकी निडरता की तारीफ कर रहे हैं।

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