कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

#KisanLongMarch: किसानों का नासिक से मुंबई कूच, राज्य पुलिस द्वारा रास्ते में रोकने की कोशिश

किसानों की मुख्य मांगें सूखा ग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई का प्रबंध, बर्बाद हुए फ़सलों का मुआवज़ा सहित पीड़ित किसान के बच्चों को पेयजल, शिक्षा तथा अन्य सुविधाएं मुहैया कराना है.

आज से शुरू होने वाले किसान लॉन्ग मार्च को लेकर ऐसी कई सूचनाएं आ रही हैं कि नासिक के कई जगहों पर किसानों को आगे जाने से रोक लिया गया है. साथ में ऐसी भी ख़बर है कि कई स्थानों पर पुलिस द्वारा नाकेबंदी भी कर दी गई है. दरअसल, महाराष्ट्र के 50,000 किसान अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के लिए नासिक से मुंबई मार्च कर रहे हैं.

इनकी प्रमुख मांगों में सूखा ग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई का प्रबंध, बर्बाद हुए फ़सलों का मुआवज़ा सहित पीड़ित किसान के बच्चों को पेयजल, शिक्षा तथा अन्य सुविधाएं मुहैया कराना है.

किसान मार्च को लेकर राज्य पुलिस द्वारा किए जा रहे कथित दुर्व्यवहार को लेकर माकपा ने महाराष्ट्र सरकार और केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है. एक ट्वीट के ज़रिए पार्टी ने कहा, “किसानों को नासिक के बाहर कई स्थानों पर रोक दिया जा रहा है. यह लोकतांत्रिक अधिकार के ख़िलाफ़ है. पार्टी राज्य के इस प्रकार के कार्रवाई की निंदा करता है.”

इसके साथ ही माकपा के महाराष्ट्र ईकाई ने भी एक ट्वीट के ज़रिए जानकारी दी कि ठाणे ज़िले के शाहपुर तालुका में कसारा घाट के पास किसान लॉन्ग मार्च में शामिल वाहनों को रोक लिया गया.

बता दें कि इस मार्च को देखते हुए बीते सोमवार को किसान संगठनों के कई लोगों को हिरासत में लिया गया था. बाद में किसानों को विरोध प्रदर्शन के बाद इन लोगों को छोड़ा गया.

ग़ौरतलब है कि यह मार्च ऑल इंडिया किसान सभा के द्वारा आयोजित किया गया है, जिसमें महाराष्ट्र के अलग-अलग ज़िले से किसान आगे नासिक पहुंचे हैं. फिर यहां से छह दिन का सफ़र तय कर वो 27 फ़रवरी को वो मुंबई पहुंचेंगे.

मार्च 2018 में ही 30,000 किसानों का नासिक से मुंबई तक लॉन्ग मार्च हुआ था. उस समय मुख्यमंत्री फडणवीस के आश्वासन पर किसान वापस लौट गए थे. लेकिन इतने महीने बीत जाने के बाद भी सरकार द्वारा उन वादों को पूरा नहीं किया गया. मजबूरन किसानों को फिर से सड़क पर उतरना पड़ रहा है.

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