कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

किसान मुक्ति मार्च: मोदी सरकार के लिए आखिर चेतावनी, यदि शर्तें नहीं मानी तो 2019 चुनावों में भुगतना होगा परिणाम- Ground Report

न योगी,न मोदी,न जय श्री राम..देश पर राज करेगा,मजदूर-किसान!

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (AIKSCC) के आह्वान पर हज़ारों की संख्या में आज किसानों ने किसान मुक्ति मार्च में हिस्सा लिया और दिल्ली की सड़क पर मार्च किया. मोदी सरकार की जन-विरोधी तथा किसान-विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ देशभर के किसानों ने अपनी आवाज़ बुलंद करते हुए दिल्ली के अलग-अलग स्थानों (सराय काले खां, मजनू का टीला, आनंद विहार, बिजवासन) से विरोध मार्च निकाला और अलग-अलग किसान संगठनों के साथ सभी रैलीयां अपने निर्धारित स्थान रामलीला मैदान में इकट्ठा हुई.

इस विरोध प्रदर्शन में बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा तथा देश के अन्य राज्यों के किसानों ने हिस्सा लिया. इस मार्च का मकसद दो मुख्य शर्तों – क़र्ज़ माफ़ी और डेढ़ गुना फ़सलों के दाम देने के लिए केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करना है. इसके अलावा किसानों ने कृषि संकट को संबोधित करने के लिए एक 21 दिन के विशेष संसद सत्र की मांग की है. रैली में किसानों की संख्या को ध्यान में रखते हुए और राजधानी को जमा दूर रखने के लिए दिल्ली पुलिस की टीम और सुरक्षा बलों की तरफ से पुख्ता इंतजाम किए गए थे. रैली को आगे और पीछे दोनों तरफ से पुलिस सुरक्षा के बीच निकाला गया.

अखिल भारतीय किसान महासभा ने आंनद विहार रेलवे स्टेशन से किसान मुक्ति मार्च का आयोजन किया. यहां से आयोजित इस मार्च में उत्तराखंड, झारखंड, बिहार और उत्तरप्रदेश के पुरुष एवं महिला किसान शामिल हुए. मोदी सरकार के ख़िलाफ़ किसानों की यह रैली आंनद विहार से निकलकर गीता कॉलोनी और प्रीत विहार होते हुए रामलीला मैदान तक पहुंची. रैली में मोदी सरकार के शासन में, लाखों किसान मरते हैं जैसे नारे लगाए गए.

आखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रेम सिंह गेहलावत ने न्यूज़सेंट्रल24X7 से बातचीत करते हुए कहा, “हमारा रास्ता संघर्ष का है, क्योंकि देश की व्यवस्था ऐसी हो गई है कि बिना संघर्ष किए कोई चीज नहीं मिल सकती है.” उन्होंने अपनी मांगों के विषय में बताते हुए कहा, “मुख्य रूप से हम दो मांगों को लेकर आएं हैं. पहली पूरे देश के किसानों को क़र्ज़ मुक्त किया जाए और दूसरा स्वामीनाथन की रिपोर्ट को लागू कर किसानों को उनकी फ़सल का डेढ़ गुना दाम दिया जाए.” प्रेम सिंह ने मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी 1 प्रतिशत लोगों का प्रतिनिधत्व करते हैं, उस में भी वह 4-5 कॉपेरेट घरनों जैसे आदानी-अंबानी के प्रिय उनके प्रिय हैं. उन कॉपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए मोदी जी देश की जनता को ठग रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस रैली में 5 हज़ार से अधिक लोग शामिल हैं.

उत्तराखंड से आए रंजीत सिंह ने मोदी सरकार को जुमलेबाज़ी सरकार करार देते हुए कहा, “इस सरकार को किसान बदलना चाहते हैं. क्योंकि इस सरकार के अंतर्गत किसानों के हित में कोई काम नहीं हो रहा है. किसानों से फ़सल का डेढ़ गुना दाम देना का वादा सरकार ने पूरा नहीं किया. किसानों को गन्ने की फ़सल का भुगतान नहीं हो रहा है. फ़सलों के वाजिब दाम न मिलने के कारण किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हैं.” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “हम ऐसी सरकार को बदल कर रहेंगे जो किसान और मजदूर विरोधी है. हम मोदी सरकार को आखिरी चेतावनी देने के लिए इकट्ठा हुए हैं.” उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में 200 से अधिक किसान आत्महत्या कर चुके हैं. उन्होंने कहा, “हम सरकार से भीख नहीं मांग रहे बल्कि अपना हक मांग रहे हैं.” उन्होंने आगे कहा, “यदि सरकार ने हमारी मांगे पूरी नहीं की 2019 के चुनावों में सरकार को इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा.” किसान और मज़दूर केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ हो चुके हैं. उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा, “यदि सरकार कॉपोरेट घरानों के क़र्ज़ माफ कर सकती है तो किसान का क़र्ज़ क्यों माफ नहीं करती? सिंह ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि यह सरकार केवल अमीरों की सरकार है. सरकार केवल उद्योगपतियों को ही फायदा पहुंचा रही है.

बिहार से आए किसान ने कहा कि देश की 70 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर हैं और मोदी सरकार देश की इतनी बड़ी आबादी को बेवकूफ बनाने में लगी है. मोदी ने विजय माल्या, ललित मोदी पर पैसे लुटा दिए और अब रिज़र्व बैंक में डांका डाल रहे हैं. उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि जो लोग भाजपा जिंदाबाद कहते हैं वे देश भक्त हैं लेकिन जो लोग मोदी मुर्दाबाद बोलते हैं उसे आंतकवादी कहा जाता है.

अयोध्या में धर्मसभा के आयोजन पर उन्होंने कहा कि धर्मसभा में शामिल होने वाले लोग भाजपा से जुड़े हुए थे. जब चुनाव आते हैं वे मंदिर का मुद्दा उठाते हैं. वह मंदिर का मामला नहीं बल्कि वोट का मामला है. मंदिर के नाम पर वोट हासिल करने के लिए राम मंदिर का मुद्दा उठाया जाता है. उन्होंने आगे कहा कि पूरी दुनिया में सबसे अधिक किसानों की समस्या हिंदुस्तान में है. आज किसान को लूटा जा रहा है. 1200 रुपये में धान बेचने वाले देश के अन्नदाता के पास खुद का पेट भरने के लिए भोजन नहीं बचता है. बिहार में खाद बीज पहले 11 रुपये किलो बिकता था लेकिन अब 30 रुपये में बिक रहा है. मोदी जी बीज, खाद ऑनलाइन खरीदने के लिए कहते हैं लेकिन वहां आधार कार्ड से चीजें नहीं मिलती बल्कि ‘दलाल कार्ड’ से मिलती हैं. पूरे देश में किसानों के नाम पर 234 योजाएं चलती हैं लेकिन बिहार में केवल 13 योजनाएं चलाई जाती हैं. मोदी जी ने किसानों से किया एक भी वादा पूरा नहीं किया है. किसान बैंक का क़र्ज़ न चुका पाने की सूरत में आत्महत्या का रास्ता अपना रहे हैं.

ऐक्टू से संबद्ध विभिन्न यूनियनों ने किसानों का रामलीला मैदान में स्वागत किया. दिल्ली आशा कामगार यूनियन(ऐक्टू), बिल्डिंग वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) तथा डीटीसी वर्कर्स यूनिटी सेंटर (ऐक्टू) की तरफ़ से पानी और बिस्किट की पैकेट के साथ सहायक बूथ किसानों के लिए जगह-जगह पर लगाए गए थे. एक तरफ़ जहां मोदी सरकार धर्म-जाति के आधार पर नफ़रत और हिंसा की राजनीति फैलाकर लोगों को बांटने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी किसान और मज़दूर अपनी एकजुटता के माध्यम से देश को जोड़ रहे हैं. ज्ञात हो कि आज रात रामलीला मैदान में किसानों से संबंधित कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा और किसान मुक्ति मार्च का अगला पड़ाव 30 नवंबर को संसद मार्ग में मोदी सरकार के ख़िलाफ़ अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करेगा.

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