कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

बाबा साहेब और महात्मा फुले का अलख जगाते हुए गुरु गोलवलकर के चेलों को दिल्ली से खदेड़ना है: भारत के नाम लालू यादव की चिट्ठी

इस बार वाला चुनाव सरकार और गद्दार दोनों को पहचानने का है अगर चूक गए तो हमेशा के लिए चूक जाइएगा.

मेरे प्यारे बिहार वासियों,

आप सबको प्रणाम, नमस्कार, सलाम

इस वक़्त जब बिहार एक नयी गाथा लिखने जा रहा है, लोकतंत्र का उत्सव चल रहा है. यहां रांची के अस्पताल में अकेले में बैठकर सोच रहा हूं कि क्या विध्वंसकारी शक्तियां मुझे इस तरह कैद कराके बिहार में फिर किसी षडयंत्र की पटकथा लिखने में सफल हो पाएंगी? मेरे रहते मेरे बिहारवासियों के साथ मैं फिर से धोखा नहीं होने दूंगा. मैं कैद में हूं, मेरे विचार नहीं. अपने विचारों को आपसे साझा कर रहा हूं क्यूंकि एक दूसरे से विचारों को साझा करके ही हम इन बांटने वाली ताकतों से लड़ सकते हैं.

रांची के अस्पताल में अभी शाम में अकेले बैठकर आप लोगों से बात करने का मन हुआ. जैसा कि आप सब जानते ही हैं लोकसभा चुनाव का बिगुल फुक चुका है. देश में बहुत बार चुनाव हुआ है पर इस बार का चुनाव पहिले जैसा चुनाव नहीं है. इस बार के चुनाव में सब कुछ दांव पर है, देश, समाज, लालू यानी आपका बराबरी से सिर उठाकर चलने का जज्बा देने वाला और आपके हक और आपकी इज्ज़त और आपकी गरिमा सब दांव पर है. लड़ाई आर पार की है. मेरे गले में सरकार और चालबाजों का फंदा कसा हुआ है उम्र के साथ शरीर साथ नहीं दे रहा पर आन और आबरू की लड़ाई में लालू की ललकार हमेशा रहेगा. ई ललकार हमारे सिपाहियों के दम पर है. जो हार में जीत में हर हाल में मैदान में डटने वाला रहा है पीठ दिखाकर भागनेवाला नहीं. जैसे गांधी जी ललकार कर अंग्रेजों को भारत छोड़ो कहने के बाद करो या मरो का नारा दिए थे. वैसे ही ई लड़ाई देश तोड़ने वाले लोगों के ख़िलाफ है, संविधान में दिए हक की हिफाजत की लड़ाई है. आरक्षण और संविधान विरोधी नरेन्द्र मोदी को खदेड़ने की लड़ाई में करो या मरो वाले जज्बे की जरूरत है हर आदमी को लालू यादव बनना होगा उसकी तरह डटना होगा. लालू यादव की तरह लड़ना होगा. सामने चाहे कितनी भी मुश्किल हो, डर और धमकी हो, लालच हो, खतरा हो डटकर लड़ना होगा और गरीब-गुरबों की मान-प्रतिष्ठा बचानी होगी.

आप सब अखबार और टेलीविजन आदि के माध्यम से जानते ही है कि किस प्रकार मोदी की सरकार ने आपके आरक्षण को ख़त्म करने की कोशिश की. किस प्रकार हमारे रोहित वेमुला जैसे दलित बेटे को प्रताड़ित कर आत्महत्या करने को मजबूर किया गया, किस प्रकार दलित उत्पीड़न को बढ़ावा दिया गया. किस प्रकार दलितों और अनुसूचित जाति पर उत्पीड़न के कानून को कमज़ोर करने की कोशिश की गई. आप दलित-बहुजन साथी अगर पूरी गोलबंदी से सड़क पर कोहराम नहीं मचाते तो आप दलित-बहुजन के आरक्षण और आपके अधिकारों को मोदी की सरकार ने समाप्त करने का बीड़ा उठा लिया था. मैं बीमार और परेशान रहकर भी लगातार नज़र बनाए हुए था. आपको बस यह याद रखना है गुरु गोलवलकर के चेले लोग आप दलित-बहुजन को मिटाने की हर संभव कोशिश करेंगे. जागते रहना है और बाबा साहब और महात्मा फुले का अलख जगाते हुए इन्हें दिल्ली से खदेड़ देना है.

ई सरकार नौटंकी सरकार है. कभी देश खतरा में, कभी हिन्दू खतरा में, कभी अर्थव्यवस्था खतरा में, के नाम पर आप लोगों को खबास (गुलाम) बना के रखना चाहता है. आप दलित बहुजन को कहा जाता है कुछ सोचो समझो मत सिर्फ गुलाम की तरह हमारा हुकुम बजाओ. आप क्या खाइयेगा क्या पहनिएगा, ई दोस्त है ई दुष्ट है सब साहब तय करेंगे. लालू के रहते कोई जालीबाज इधर झांकने का भी हिम्मत नहीं करता था. पर ई सरकार मुंह में राम बगल में छूरी वाली सरकार है. निशाचर लोगों की सरकार है रात मे जब आप सोये रहते हैं तो ये हमला करता है और आपकी मति फेर कर आपके अपने ही खिलाफ काम करने पर मजबूर कर देता है. मायावी राक्षस की तरह लड़ाई आपस में लड़ाई करने वाली सरकार है. कौन लकड़ी सुंघा देते हैं कि भाई की तरह कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने वाला आदमी आपका खून पीने के लिए तैयार हो जाता है. हमको भी अपना मायाजाल में लपेटकर तोड़ने की जी तोड़ कोशिश किया ये लोग जला डाल के भी काबू नहीं कर पा रहे पीछे से किसी शिखंडी के कंधा पर बंदूक रखके हमला हमला पर हमला, बार बार जेल में रखकर हिम्मत तोड़ने की कोशिश. लाख तरह की बीमारी और कानून का फंदा के बाद भी लालू का हिम्मत नहीं तोड़ पा रहे है ना उसके सिपाही का हौसला. अगर मेरा पूरा परिवार और समस्त राष्ट्रीय जनता दल फिर भी मैदान में डटा हुआ है तो आप दलित-बहुजन साथियों की ताकत इसकी सबसे बड़ी वजह है.

देश-समाज की मान मर्यादा और एका के लिए भले गुरू गोविंद सिंह के बच्चे की तरह दीवार में चिनवा दिया जाय पर ये जंग जारी रहेगी. देश संविधान की बात तो हमारे सब लोग आपको बता ही रहे हैं रहा है पर उससे ज्यादा जो जरूरी बात है कि अगर ये दलित-बहुजन विरोधी लोग दुबारा हेर फेर से वापस आ गए तो देश में आपकी हैसियत क्या रहेगी. ये आपके उठने बैठने से लेकर आपकी पहचान को तीस पैंतीस साल पुरानी स्थिति में आपको धकेलना चाहेंगे. आपका मान-मर्यादा के साथ रहना और बिना भय अपनी बात रखना इनको फूटी आंख नहीं सुहाता है. आपने कुदाल फावड़ा और गैंती छोड़ कर कलम पकड़ना शुरू किया ये उन्हें हजम नहीं हो रहा है. ये फिर से आपको अपने ढोर चराने और खेत पर सर झुकाकर ‘जी मालिक’ कहने वाले बंधुआ मजदूर के रूप में देखना चाहते हैं. आप पटना और दिल्ली की सत्ता में और देश के संसाधनों में आबादी के आधार पर अपनी हिस्सेदारी मांगते हैं ये इन्हें परेशान कर देता है.

गुजरात के ऊना में, दलित पुरुषों पर जुलाई 2016 में गौ-रक्षकों द्वारा हमला किया गया था.

इसलिए इस बार वाला चुनाव सरकार और गद्दार दोनों को पहचानने का है अगर चूक गए तो हमेशा के लिए चूक जाइएगा. हमारे गरीब गुरबा लोग जो मंडल जी, कुशवाहा जी, यादव जी, बिन्द जी, सहनी जी, पासवान जी, मांझी जी या राम जी कहने लगे थे वो फिर से अशोभनीय जाति-सूचक नामों से पुकारे जायेंगे. इस बार दुश्मन आपके ताकत को तौल रहा है कभी बिना दस्तावेज़ और सर्वेक्षण को सवर्णों को आरक्षण दे के कभी रोस्टर सिस्टम को बदलके या फिर अनुसूचित जाति/ जन जाति पर उत्पीड़न के कानून को कमज़ोर करके. कोई सोंटा भांज रहा है तो कोई राम जी को भांज रहा है. लेकिन याद रखना मेरे साथियों! आपके लाल लालू का हौसला बहुत मजबूत है उससे भी मजबूत है उसके सिपाही का जो कभी नहीं टूटेगा और कभी नहीं फूटेगा. लालच का, धर्म का, धमकी का सब लाठी फेल हो जाएगा. ई मायावी सरकार आपको दिखाती कुछ और है करती कुछ और है. बोलती है कि देश खतरा में हम हथियार खरीद रहे और आपका पॉकेट से पैसा निकाल के आपना यार दोस्त को देके कहती है कि आराम से विदेश निकल जाओ और मौज करो हम आए तो हमको भी कराओ. ई समय दोस्त और दुश्मन दोनों को पहचानने की घड़ी है साथ में जुटके और जोड़के लड़ने की घड़ी है.

राजद के सिपाहियों और दलित बहुजन साथियों! गठबंधन में कई दल हैं इसलिए सीट बंटवारे में सबका ध्यान रखना पड़ा है. हमारे कई नेता और कार्यकर्ता जिन्हें टिकट नहीं मिला उन सबसे अपील करते हैं कि सब मिलकर सबकुछ भुलाकर दलित बहुजन समाज का आरक्षण और संविधान बचा लीजिये. देश को खेत समझिये और जानिये कि अगर अपना समाज खेत बचा लेगा तो फसल फिर लगेगी और बराबरी से सब दलित बहुजन की भागीदारी होगी. बहुत कुछ कहने का है लेकिन अब रखते हैं लेकिन फिर लिखूंगा.

बस एक बार और हाथ जोड़कर अपने दलित बहुजन साथियों से आग्रह है कि एकता कायम करिए, संघर्ष कीजिये. दिल्ली के तख़्त पर वंचित समाज के लोगों का कब्ज़ा ज़रूरी है.
प्रणाम!

(यह चिट्ठी लालू प्रसाद यादव के ट्विटर हैंडल से शब्दश: ली गई है.)

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